Tadap [part 104]

 आज' करवा चौथ' है, और ऐश्वर्या सभी तैयारियां कर रही है किंतु न जाने क्यों आज सुबह से ही ,प्रवीण उसे कहीं नहीं दिख रहा है। न जाने कहां व्यस्त है ? वैसे तो अभी उसकी कोई आवश्यकता नहीं है ,किंतु दिखना तो चाहिए कि वह कहां है ? न जाने कहां,क्या कर रहा है ? यह उसकी सबसे बुरी आदत है ,कभी बताकर नहीं जाता कि मैं कहां जा रहा हूं? अनेक विचार मन में आते हैं , किंतु सभी नकारात्मक विचारों को झूठला देती है। करें भी तो क्या ? जितना वश में होता है ,उतना कर लेती है। शारीरिक रूप से मेहनत करती ही है ,बच्चों की तो छुट्टी नहीं है ,बच्चों को समय पर स्कूल भेजा है। 

ऐसे समय में चंदा देवी, उसके पास आईं और बोलीं  -दोनों देवरानी और जेठानी मिलकर 'करवा चौथ 'की कहानी कह लेना। 

ऐश्वर्या ने मन ही मन सोचा ,जब साथ में थे ,तब तो एक बार भी नहीं कहा। बड़ी होकर स्वयं चलकर आई हैं ,यही सोचकर उनसे इंकार नहीं किया, इसमें ऐश्वर्या को भी ,कोई आपत्ति नजर नहीं आई। अब तो चंदा देवी स्वयं ही कह देती हैं -'' सबका अपना-अपना खाना और अपना -अपना कमाना है ''तो फिर ऐश्वर्या को ही क्यों सिर दर्दी  लेनी ?


तभी चंदा देवी ने पूछा-12:00 बज गए, क्या तूने कुछ खाया है ?

नहीं ,अभी तो कुछ भी नहीं खाया है, किंतु हमारे यहां ऐसी प्रथा भी नहीं है कि दिन निकलने के बाद ,कुछ खा ही नहीं सकते ,सबकी अपनी-अपनी रीत  है, सीधे मन से उसने बता दिया कि जब सुबह उठी थी ,तो उसके सिर में दर्द था ,भारीपन था इसलिए उसने एक कप चाय बनाकर पी है ,उसके पश्चात उसने कुछ नहीं खाया है। हमारे यहां कुछ ऐसा है ,भी नहीं, क्योंकि अब तक तो चंदा देवी की देखरेख में ही उसने पूजा -पाठ किया था तो उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था कि वह एक कप चाय भी नहीं पी सकती। 

अचानक चंदा देवी भड़क गईं  और बोलीं  -अरे ! यही दिन देखने को रह गए थे , मैं तो इससे उम्र में ज्यादा  हूं, किंतु मैंने कुछ भी नहीं खाया। 

चंदा देवी के भड़कने का कारण, ऐश्वर्या नहीं समझ पाई, और मुझे यह सब बतला रही है ? यह भी नहीं समझ पाई। 

उसने कहा -आप तो सुबह उठते ही नहाकर सबसे पहले चाय ही पीती हैं ,आज क्यों नहीं पी ?

उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, ऐश्वर्या ! वहां कहानी सुनने के लिए गई थी ,किंतु वापस आ गई , वह त्यौहार के दिन अपने मन को परेशान नहीं करना चाहती थी। मन परेशान होने से शारीरिक शक्ति भी घटती है, आज उसका उपवास भी है और घर के सभी कार्य भी उसे स्वयं ही करने होंगे। वहां तो दोनों सास -बहु हैं ,मैं अकेली !यही सोचकर वह, अपने मन को समझाने का प्रयास कर रही थी किंतु रह -रहकर उसके मन में यही विचार आ रहा था कि आखिर चंदा देवी का व्यवहार इतना क्यों बदल गया ? जब भी उन लोगों पर विश्वास करना चाहती है ,तभी उसका विश्वास टूटता है। क्यों ?उन्होंने मुझे वहां कहानी कहने के लिए बुलाया और फिर न जाने क्या-क्या कहने लगीं ?प्रवीण भी अभी तक नहीं आया था। शाम के 4:00 गए। तब उसने दरवाजे पर आहट सुनी , तब वह प्रवीण से बोली -आज आपने सारा दिन कहाँ लगा दिया ,कहां रह गए थे ? क्या आप जानते नहीं ?कि आज 'करवा चौथ 'है। 

प्रवीण ने बेरुखी से उसकी तरफ देखा, और बोला- तुझे क्या लेना ?' करवा चौथ 'से ,

क्या मतलब ? मैं कुछ समझी नहीं। 

व्यंग में बोला-''तेरा करवा चौथ तो मैं मनवाऊंगा ''

 वह जानती थी ,जब भी प्रवीण झगड़े के मूड में होता है, तब वह तू -तड़ाक  पर आ जाता है। तब उसने प्रश्न किया कि आखिर हुआ क्या है ?

तुझे हमारी जिंदगी से क्या लेना ? तू कौन होती है  ?मुझसे यह पूछने वाली कि कहां गए थे और कहां नहीं। 

ऐश्वर्या तो मन ही मन सोच रही थी -अब मेरे दिन शायद ,बदल गए, शायद आज ''करवा चौथ ''है सोच कर प्रवीण मेरे लिए कुछ उपहार लेने गया होगा आज तक उसने मुझे कोई उपहार नहीं दिया। उस समय हम परेशानी में थे। किंतु अब तो वह छोटा-मोटा ही सही ,कुछ उपहार तो दे ही सकता है आज मैंने उसकी लंबी उम्र के लिए उपवास जो रखा है। किंतु बदले में उसे क्या सुनने को मिल रहा है ?उसका व्यवहार ऐश्वर्या की समझ में नहीं आ रहा था। आखिर वह ऐसा क्यों कह रहा है ? तभी उसने पूछा - आज क्या हुआ है ? आज आपकी मम्मी भी, कुछ ऐसा ही व्यवहार कर रही थीं। 

तुम जैसी महिलाएं ,इस घर में आएंगीं, तो ऐसा ही होगा। स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बोला-शाम का समय था चांद भी निकलने का समय हो रहा था, और अभी तक पूजने के लिए, ऐश्वर्या ने कढ़ी -फुल्का नहीं बनाए थे इसलिए वह खाना बनाने में व्यस्त हो गई उसने सोचा-बाकी बातें बाद में, पूछ लूंगी। 

ऐश्वर्या ने खाना बनाया और करवा चौथ मैया का पूजन किया, और पुजा हुआ सामान ,चंदा देवी को देने चली गई। भले ही ,अलग हो गए किन्तु रिश्ते तो नहीं बदले ,सास तो सास ही रहेंगी। यही सोचकर बायना देने चली गयी और वापस आकर चांद की प्रतीक्षा में बैठ गई। प्रवीण छत पर टहलने लगा ,ऐश्वर्या ने सोचा शायद यह चांद की प्रतीक्षा में होगा इसलिए ऊपर टहल रहा है। सोचा , वहीं  जाकर बात भी हो जाएगी और, चांद की प्रतिक्षा भी पूर्ण हो जाएगी। यही सोचकर वह भी छत पर आ गई किंतु प्रवीण उसे देखकर कुछ नहीं बोला। 

तब ऐश्वर्या ने ही बातचीत आरंभ की, बोली -क्या आपको यह बात मालूम है ?

कौन सी बात ! 

कल छवि का छोटा भइया , अपने चाचा के घर की तरफ चला गया था , उसके चाचा वहां पर, बूट पॉलिश कर रहे थे, छोटे  ने बालपन में, उनके जूते को छेड़ा तो उन्होंने, उसके हाथ पर जूता पॉलिश करने वाला ब्रश मारा, उस को दर्द हुआ, तो रोने लगा । कुछ देर पश्चात ,शांत होकर फिर से छेड़ने लगा , उसके चाचा ने उसे डाटा नहीं बल्कि चुपचाप उसके हाथ में वह ब्रश मार देते ,जब मैंने उसके रोने की आवाज सुनी, तो मैंने  खिड़की में से देखा कि क्या हरकतें हो रही है? मैं क्रोधित होकर, उसको  वहां से उठाकर ले आई। क्या प्रतीक को इतनी भी तमीज नहीं है कि  बच्चे से कैसा व्यवहार करते हैं ? अरे बच्चा  था , यदि वह सामान छेड़  भी रहा  था , या तो वहां से हटा देते, या उसे घर से बाहर कर  देते किंतु उसे ,इस तरह से मारने की क्या आवश्यकता थी ?

यह तुम क्या कह रही हो ? वह भला एक छोटे बच्चे के साथ ऐसा क्यों करेगा ?उसे ऐश्वर्या की बातों पर विश्वास नहीं कर पा रहा था। उसे लगता था ,शायद दो भाइयों के बीच मतभेद करवाने के लिए ऐसा कह रही होगी।

 ऐश्वर्या समझ रही थी कि प्रवीण को उसकी बातों पर विश्वास नहीं है ,तब भी बोली -आज मेरा उपवास है ,मैं झूठ क्यों बोलूंगी ?सही तो कह रही हूँ , जो मैंने देखा ,वही बतला रही हूं, अब आप प्यार से अपने बेटे से ही पूछ लीजिये।  इतना बड़ा है ,वह भी बता सकता है कि चाचा ने उसके साथ कैसा व्यवहार किया ?

प्रवीण को, ऐश्वर्या पर विश्वास नहीं हुआ तब उसने, अपने बेटे को एक तरफ ले जाकर उससे पूछा ,तब उसे विश्वास हुआ। ऐश्वर्या को इसी बात का तो दुख होता, इसको मुझ पर आज तक यकीन नहीं हुआ, किंतु ऐश्वर्या ने जैसा सोचा था, वही बात निकली , यह बात प्रवीण के कानों में पहले से ही पहुंचा दी गई थी। 

किंतु दूसरे तरीके से,'' तेरी बहू इतनी चालाक है , एक छोटी से बच्चे को, यहां से उठाकर ले गई। अरे ,बच्चा था ,खेल रहा था ,क्या हमारा उस पर कोई अधिकार नहीं बनता और इसीलिए ही चंदा देवी ने, अपनी बात को महत्व देने के लिए , सुबह भी ड्रामा किया था, जिसका असर प्रवीण पर हुआ, और उसने आते ही अपनी पत्नी से कहा-'' तुम्हारी करवा चौथ तो मैं मनवाऊंगा। '' अब बात स्पष्ट हो चुकी थी , कि उसके बदले व्यवहार का क्या कारण था ?हालांकि वह लोग अलग रह रहे थे ,किंतु अभी भी उसके विरुद्ध प्रवीण के ''कान भरे जा रहे थे।'' किंतु दुख यह भी नहीं था, दुख इस बात का था कि प्रवीण को अभी भी उन लोगों पर विश्वास है, ऐश्वर्या पर नहीं। उनके इतने धोखे भरे व्यवहार के पश्चात भी, वह उसका विश्वास नहीं जीत सकी। ''करवा चौथ ''साल में एक बार आती है। ऐश्वर्या ने कभी किसी चीज की मांग नहीं की, किंतु प्रवीण ने भी, कभी उसका महत्व नहीं समझा। यह बात ऐश्वर्या के लिए जिंदगी भर की कहानी बन गई थी।

 ऐश्वर्या रुंआसी हो उठी अपने छलक आये आंसुओं को लेकर नीचे आ गयी। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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