पूजा का पत्र पढ़कर ,चंपक को दुःख तो अवश्य हुआ किन्तु उसे इस बात की भी शांति मिली ,चलो !अच्छा ही है ,वह अपनी ज़िंदगी जिए और मैं अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ जाऊंगा। कम से कम उसके सामने होने का या मेरे माता -पिता से मिलने का ड़र तो नहीं रहेगा। दुबारा उसने वे लाइनें पढ़ीं ,जिनमें लिखा था -'मुझे ढूंढने का प्रयास भी मत करना ,'ये लाइन पढ़कर मुस्कुराया ,और मन ही मन बुदबुदाया -मैं क्या मूर्ख हूँ ? जो उसे ढूंढने निकलूंगा। इस समय तो उस पर छाया के रूप का जादू असर कर रहा था। वह पूजा के दर्द को न ही समझ सका ,न ही ,उसकी परेशानियों को महसूस कर पा रहा था। न जाने पूजा ,अकेली कैसे और क्या करेगी ? उसकी पढ़ाई ,वो बच्चा !सब कैसे संभालेगी ?जब दिक्क़तें आएँगी ,बच्चे को अपने आप गिरवा देगी।
घर में जोरों -शोरों से विवाह की तैयारी होने लगीं , हालांकि अभी वह अपनी स्नातक भी पूरी नहीं कर पाया था , इससे पहले कि वह किसी अन्य लड़की के चक्कर में पड़ जाए। परिवार वालों ने उसका विवाह करना उचित समझा। मन की प्रसन्नता चेहरे पर बिखर रही थी, चेहरे पर अलग ही चमक थी। जिसको तस्वीर में देखा अब वो मेरी होने जा रही है , कुछ दिनों पश्चात ही, उसे अपने सामने देखेगा। हां ,विवाह से पहले एक झलक उसे देखा था, सोचा था ,इससे बात करूंगा किंतु उसके परिवार वालों ने ,विवाह से पहले बात करवाने से इनकार करवा दिया। परिवार अच्छा था, खानदानी लोग थे। नियत समय पर विवाह हो गया। जिस रात्रि वह लड़की के करीब गया ,उसे देखकर वह उछल पड़ी और उससे कहने लगी -दूर हटो !भागो यहाँ से। तब उसी रात्रि चंपक को एहसास हो गया कि वह तो ठगा गया। छाया मंदबुद्धि थी, बच्चों की तरह हरकतें कर रही थी। डॉक्टर ने उसके परिवार वालों को सलाह दी थी -'इसका विवाह करा दें, अपने पति के प्यार और अपनेपन से यह ठीक हो जाएगी और धीरे-धीरे, इसके व्यवहार में भी सुधार आएगा।
प्रातःकाल उठकर जब चंपक ने ,छाया की मनःस्थिति घरवालों को बताई ,तो सभी आश्चर्य चकित रह गए ,हम लोगों के साथ इतना बड़ा धोखा !उसके परिवारवालों को बुलाया गया। उन्होंने ही बताया -यह विवाह डॉक्टर की सलाह पर ही किया गया है। इसी कारण उसके परिवार वालों ने सोचा जब इसका विवाह हो जाएगा, और इसका पति इससे प्यारभरी बातें करेगा तो वह ठीक हो जाएगी।
आप लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं थी ,इसकी हालत के विषय में हमें बताना तो चाहिए था ये सब छुपाकर ,आप लोगों ने हमसे धोखा किया है । हमारे बेटे की ज़िंदगी बर्बाद कर दी। ले जाइये ,इसे...... हमने क्या यहाँ सुधारगृह खोला हुआ है ?
छाया के पिता गिड़गिड़ाने लगे और बोले -बहनजी !मैं मानता हूँ ,हमने आपसे बात छुपाई किन्तु यह बीमारी सदा नहीं रहेगी ,ये ठीक हो जाएगी। अब तो विवाह हो ही गया है ,कुछ दिन यहाँ रखकर देख लीजिये। यदि इसकी हालत में सुधार आता है तो ठीक....... वरना हम अपनी बेटी को वापस ले जायेंगे।
सुंदरता के पीछे ,इतना बड़ा छल उसे मिला, तभी उसे पूजा का स्मरण हो आया, पूजा भी तो कम सुंदर नहीं थी। मुझ पर जान छिड़कती थी। डॉक्टर बन जाती ,मेरी मति मारी गई थी, मैं उसकी कदर न कर सका। अब जो हो गया सो हो गया। चंपक अब उदास रहने लगा ,सोच रहा था ,इंसान के कर्मों की सजा उसे इसी जीवन में मिल जाती है। मैंने पूजा के प्यार और उसके बच्चे को ठुकराया ,मुझे भी छाया के रूप में इतना बड़ा छल मिला।
एक दिन चंपक ऐसे ही उदास बैठा था ,माँ समझती थी ,सोचता होगा ,कब तक इस मंदबुद्धि को अपने साथ रखेगा ?माँ ने चंपक के सिर पर हाथ फेरा ,उसका ध्यान भंग हुआ और उसने पलटकर अपनी माँ की तरफ देखा। उन्हें देखकर एक गहरी श्वांस ली और बोला -बैठिये !
चंपक के कहने पर बैठ तो गयीं ,बोलीं -जो हो गया ,उसे बदला तो नहीं जा सकता ,हो सकता है ,ईश्वर ,तेरे धैर्य की परीक्षा ले रहा हो।
धैर्य की परीक्षा नहीं ,मेरे बुरे कर्मों का परिणाम है।
न....न तूने ऐसे कौन से बुरे कर्म कर दिए ,जो ये परिणाम मिला है ,अभी तेरी उम्र ही क्या है ?देखते हैं ,जैसे इसके पिता कहकर गए हैं ,इसके व्यवहार में थोड़ा परिवर्तन आता है या नहीं। नहीं आएगा तो, इसे इसके घर भिजवा देंगे। मैं तुम्हारा दूसरा विवाह करवाउंगी।
दूसरे विवाह के नाम से। चंपक को पूजा का स्मरण हो आया। उसने अपनी आँखें बंद की और कुर्सी से सिर टिकाकर बैठ गया। अच्छा तू आराम कर...... मैं चलती हूँ ,कहकर वो उठीं और चल दीं ,तभी न जाने क्या सोचकर वापिस आईं और बोलीं -अच्छा !एक बात सच -सच बताना।
माँ के इस अंदाज को सुनकर चंपक ने अपनी आँखें खोलीं ,और पूछा -कैसी बात ?
तेरे साथ उस दिन मंदिर में कौन थी ?माँ का सवाल सुनकर वो चौंक उठा ,क्या माँ मेरे और पूजा के विषय में जानती हैं ?चंपक ने अपनी माँ की तरफ देखा ,जैसे पूछ रहा हो ,उन्हें कैसे मालूम ? मैं भी उसी मंदिर में थी ,जब मैंने उस लड़की को पूजा करते देखा ,मुझे बड़ी प्यारी बच्ची लगी वरना आजकल की लड़कियां कहाँ पूजा -पाठ करती हैं ,किन्तु उस समय तुझे उसके साथ देखकर क्रोध आ गया था क्योंकि तूने मेरे साथ मंदिर जाने से इंकार कर दिया था।
आज अपनी मम्मी के मुँह से पूजा की प्रशंसा उसे अच्छी लग रही थी।
