Tadap [part 101]

ऐश्वर्या ने दृढ़ शब्दों में, चंदा देवी से घर छोड़कर नहीं जाने के लिए मना कर दिया। क्योंकि वह जानती थी घर छोड़कर जाने का अर्थ है, अपनी परेशानियों को और बढ़ा लेना। शहर में रहना इतना आसान नहीं है। हर वस्तु पैसे से मिलती है , और यहां तो रिश्ते भी अपने नहीं हैं ,दो बच्चों के साथ, वह बिना किसी की सहायता के, नौकरी भी नहीं कर सकती ,घर के भी कार्य हैं। कैसे इतना सब संभाल पाएगी ? यही सब सोचकर , उसने जाने से इनकार कर दिया। जिसका परिणाम हुआ, वे दोनों एक हो गईं , जिसको जैसे भी मौका मिलता परेशान करने में कमी नहीं छोड़ता। जब करुणा , अपने मायके से आई थी, तब चंदा देवी एक बार उसके पास आई थीं और बोली - तू मेरे मुझे करुणा की खबरें दिया कर...... 

मैं कुछ समझी नहीं , 

वह क्या काम करती है, क्या हरकतें करती है ?वह सब मुझे बताया करना ..... ऐश्वर्या समझ गई कि यह इसको परेशान करने के उद्देश्य से ऐसा कह रही हैं, इसलिए उसने स्पष्ट तौर से उनसे, यह काम करने के लिए मना कर दिया, और बोली-आप दोनों की ही सास हैं, मैं चुगली नहीं करूंगी , आपको जिसकी भी गलती लगती है आप स्वयम देखिए और उसे डांटिए !


 अब ऐश्वर्या सोच रही है -शायद यह इसके पास गई होंगी , और उसने उनकी बातों को स्वीकार कर लिया होगा। अब तो वे दोनों एक होकर ,ओछी  हरकतों पर उतर आई थीं , प्याज , टमाटर छुपा लेती थीं , घर की छोटी-छोटी जरूरत की चीजें  छुपा लेती थीं। कपड़े सुखाने की जगह ,ख़ाली नहीं करती थीं ,अनेक ऐसी छोटी -छोटी चीजें थीं ,जिनके कारण ,आदमी को परेशानी होती और ऐश्वर्या परेशान हो रही थी, उनका उद्देश्य भी यही था कि यह परेशान होकर यहां से निकल जाए। तब ऐश्वर्या ने दूसरा तरीक़ा अपनाया और बोली -मैं इस घर को छोड़कर चली जाऊंगी , किंतु उससे पहले मुझे मेरे पति द्वारा कमाए गए ,सभी पैसे सूद समेत चाहिए।उन पर तो हमारा अधिकार है।  

ऐ ....... यह ज्यादा मत बोल ! चंदा देवी उसको घूरते हुए,मारने के लिए उसकी तरफ लपकीं , तेरी हिम्मत कैसे हुई ?मुझसे पैसे मांगने की.......  वह मेरा बेटा है ,क्या मेरा इतना अधिकार नहीं बनता कि मैं वह मुझे कमाकर पैसे लाकर दे ,उसे पालकर इतना बड़ा किया है।  

अच्छा आपका अधिकार तो पता है किंतु आपका कर्तव्य कुछ नहीं है ,  क्या उनके बच्चे ,आपके कुछ नहीं लगते ? ऐश्वर्या स्पष्ट रूप से मैदान में आ चुकी थी। पहले बोलते हुए ,उसका दिल धड़कता था किंतु अब उसने अपने दिल को नियंत्रित करना सीख लिया था। जब आपको मालूम था, कि आपका बेटा कुछ नहीं करता है तब आपने उनसे मेरा विवाह क्यों करवाया ?

उसी को तेरी आग लगी थी, हमें कोई जरूरत नहीं थी। तेरे जैसी को तो,'' मैं पिछवाड़े पर लात मारकर भगा देती।''  

तेरे जैसी के ,शब्द सुनकर ऐश्वर्या के दिल में तीर की तरह चुभे ,बोली -कैसी हूँ मैं ! क्यों ?मुझमें क्या कमी है ?मेरा परिवार अच्छा नहीं ,मैं पढ़ी -लिखी नहीं हूँ ,क्या किसी काम को मैंने मना किया ?क्या घर के बाहर खड़ी हो ,मौहल्ले में घूमकर समय बर्बाद करती हूँ ,या मैं अपने पति के संग फिल्में देखती या बाहर घूमती रहती हूँ। मुझमें एक कमी तो बताइये ?

उसकी बातें सुनकर एक पल के लिए ,चंदा देवी शांत हो गयीं कुछ नहीं बोलीं। आप तो मां हैं , उन्हें समझा  सकती थीं , या तो आप मुझे इस घर में मेरा हिस्सा अलग से दे दीजिए और या फिर मुझे प्रवीण के कमाई पैसे लौटा दीजिए। आप चाहे कुछ भी कर लें  मैं यह घर छोड़कर नहीं जाऊंगी। 

क्लेश हो जाता ,तू -तू , मैं- मैं हो जाती मानसिक रूप से ऐश्वर्या बहुत परेशान थी। अपने आप को मजबूत दिखला रही थी किंतु अंदर से वह टूट रही थी। कभी-कभी उसे लगता, इन लोगों के साथ लड़ते-लड़ते, कहीं मैं पागल न हो जाऊं, मेरी यह लड़ाई अपने अधिकार की है। मेरे बच्चों के अधिकार की है, मैं इसे यूं ही नहीं छोड़ सकती। कभी-कभी उसे घबराहट होती ,उसे लगता न जाने ,कितनी बीमारियों ने उसे घेर लिया है ? कमजोरी महसूस होती, उसे लगता -शायद वह शीघ्र ही ,इस दुनिया को छोड़कर चली जाएगी। अपने कमरे में आकर रो लेती, किंतु बाहर निकलकर अपने चेहरे को कठोर कर लेती, अपने को मजबूत दिखाने का प्रयास करती। वह रात -दिन कभी बच्चों में और कभी घर के कार्यों में व्यस्त रहती। 

चंदा देवी का रूप अत्यंत विकराल हो चुका था, उन्होंने दो-तीन बहाने ढूंढ लिए थे, बात भी ,कुछ नहीं थी ,हुआ यूँ था ,ऐश्वर्या के थप्पड़ लगाने थे और लगा भी दिए थे, ऐश्वर्या ने उन्हें बड़ी समझकर सब सहन किया किंतु जब वह तीसरी बार उस हद को  पार करने के लिए, उस पर झपटीं, तब ऐश्वर्या ने ,सख्ताई  से उनके हाथों को पकड़ लिया और बोली -अब और नहीं, जिस  ससुर से वह पर्दा करती थी , उस ससुर के सामने, बिना पर्दे के वह, उन लोगों की हरकतों के लिए उनसे कहने और पूछने गई कि मेरी क्या गलती है, क्यों यह लोग मेरे पीछे पड़े हैं ? ससुर के पास कोई जवाब नहीं था, वह स्वयं ही उनसे त्रस्त थे। अब ऐश्वर्या को अपनी सास के वह शब्द स्मरण होते, जब उन्होंने कहा था -कि आने दे ,उसे तब तुझे मैं दिखलाती  हूं ,मैं क्या चीज हूं ? 

अचानक ही न जाने प्रवीण के मन में क्या आया और उसने, खाली जगह पर कमरे  डलवाने आरंभ कर दिए और कुछ ही दिनों में दो कमरों का घर बनकर तैयार हो गया। चंदा देवी को बहुत क्रोध आया, इसके लिए अलग से महल बनवाया है , इसमें प्रतीक और उसकी बहू रहेंगे ! किंतु ऐश्वर्या ने चुपचाप अपना सामान उठाया और उसे स्थान को छोड़ दिया। अब उस घर के दो हिस्से हो चुके थे , लग रहा था ,अब कुछ दिन सुकून से व्यतित होंगे। 

जाने से पहले ,ऐश्वर्या बोली -कम से कम मेरे प्रति ऐसा व्यवहार तो करती, जिसके लिए आप मुझसे लड़ रही हैं, यदि कल को बढ़ती उम्र में ,उसने आपका कुछ नहीं किया तो मेरे मन में रहम आ जाता। मैं आपकी सेवा के लिए तत्पर रहती। 

तब भी चंदा देवी ने, बड़े अहंकार में जवाब दिया -मुझे , किसी की जरूरत नहीं है , मेरा तो भगवान है। 

यदि आप जैसी औरत का भगवान है तो मेरे बच्चों का भी भगवान है, और वही ईश्वर मुझे भी शक्ति दे रहा है कहकर वह अपने हिस्से के मकान में चली आई। ज्यादा दूर नहीं गई है, पड़ोस में ही है , क्या वह पड़ोस में रहकर भी उस रिश्ते को निभा पायेंगे या नहीं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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