Tadap [part 100]

प्रवीण बहुत परेशान था, उससे पैसों का इंतजाम नहीं हो पा रहा था, क्या करें ? ऐश्वर्या ने उससे एक दो बार पूछा भी था -कि क्या कोई परेशानी है किंतु प्रवीण ने उसे अपनी परेशानी बताने से इनकार कर दिया। वह सोच रहा था ,स्वयं ही सब संभाल लेगा, यह मेरी परेशानी क्या दूर करेगी ? उसकी परेशानी देखकर , उसके न बताने पर भी ,ऐश्वर्या इतना तो समझ ही गई थी, कि प्रवीण पैसों का इंतजाम नहीं कर पाया है। ऐश्वर्या को ,कुछ भी कहने से पहले चार बार सोचना पड़ता ,न जाने किस बात का प्रवीण को बुरा लग जाये ?इसीलिए उसे कुछ कहना न पड़े ,यही प्रयास करती , उसे प्रवीण की परेशानी देखकर अच्छा नहीं लग रहा था। वह भी इसी प्रयास में रहती ,उसे कोई अच्छा सा सुझाव दे सके। 

एक दिन उसने प्रवीण पूछा -क्या आपकी रिश्तेदारी में भी कोई ऐसा नहीं है ,जो आपको उधार पैसे दे सके। सोच तो रही थी ,क्यों न... पापा से मांगकर देख ले किन्तु उनके व्यवहार और उनके हालात देखते हुए ,साहस ही न कर सकी ,अभी तो उन्होंने चारु का विवाह किया है ,उससे पहले व्यापार को सम्भालने में भी पैसा लगा है। 


पैसे देने वाले तो बहुत हैं, किन्तु आज तक ,कभी ऐसा मौका नहीं पड़ा और वे लोग पूछेंगे ,कि तू तो बाहर से कमाकर लाया था ,उनका क्या किया ?किस -किस को अपने घर की समस्याएं बताता या समझाता रहूंगा ?कोई विश्वास भी नहीं करेगा कि मैं ऐसी स्थिति से गुजर रहा हूँ। सुनने वाले भी यही कहेंगे -जब तेरे घरवाले ही, तेरा साथ नहीं दे रहे हैं ,तो हमारा क्या लगता है ?कोई साथ नहीं देता ,कहने वाले तो ये भी कह देंगे ,क्या छोटे की बहु और छोटा बेटा साथ में नहीं रह रहे हैं ? तुम्हारे साथ ही क्यों समस्या आ रही है ? तुममें ही कोई कमी होगी ,उन्हें क्या मालूम ?हमारे साथ किस तरह का भेदभाव किया जा रहा है ? लोग तुम्हें दोष देंगे ,बहु ही परिवार में रहना नहीं चाहती होगी। आजकल बड़े -बूढ़ों की कोई सेवा करना नहीं चाहता।  मम्मी के पास एक प्लस पॉइंट है ,उनकी उम्र का बढ़ना ,उन्हें कोई नहीं कहेगा, कि बच्चों के साथ गलत व्यवहार कर रहीं हैं ,न ही, उन्हें कोई समझाने आएगा कि इस तरह का भेदभाव ठीक नहीं।अब तुम्हीं बताओ !किसी से क्या कहें ? 

ऐश्वर्या बहुत देर तक सोचती रही ,तब उसने अपने मायके का  सोने का सेट लाकर प्रवीण के सामने लाकर रख दिया ,उसे देखकर प्रवीण हैरान रह गया। उसे लगा ,यह सेट हमारे ही घर का दिया हुआ होगा,क्योंकि कभी उसने ध्यान ही नहीं दिया कि मम्मी क्या कर रहीं हैं ,क्या नहीं ? सोचता ,बड़ी हैं ,जो भी कर रही होंगी ,या करेंगी अच्छा ही करेंगीं।  किंतु उसकी यह गलतफहमी भी ऐश्वर्या ने शीघ्र दूर कर दी उसने बताया -कि उनके घर से जो उसे सेट चढ़ाया हुआ था वह उसकी मम्मी ने लॉकर में रखने के बहाने से, वापस ले लिया था। 

ऐश्वर्या अपने सोने के गहने प्रवीण को देकर कहती है- कि अब इन्हें आप गिरवी रखकर पैसे ला सकते हैं। प्रवीण को इस बात की प्रसन्नता तो हुई ,कि अब वह पैसों का इंतजाम कर सकता है किंतु साथ ही यह भी डर हुआ कि कहीं  मैं ,इसके गहने छुड़ा न सका तो क्या होगा ?

मुझे आपके विश्वास पर विश्वास है, और आप यह गहने गिरवी रखकर, पैसों का इंतजाम कर लीजिए और उस कारोबार को अच्छे से बढ़ाइए और मैं उम्मीद करती हूं ,कि आप मेरा यह सेट वापस लाकर मुझे देंगे। ऐश्वर्या के इन शब्दों ने, प्रवीण के मन में कुछ तो हलचल पैदा कर दी  किंतु कुछ कह न सका। उसे लगा शायद मैं इसे गलत समझता था।

 ऐसा हृदय में और विचारों में परिवर्तन होना स्वाभाविक है ,जब कोई व्यक्ति बुरे समय में, किसी के काम आ जाता है तो विचारों में परिवर्तन हो ही जाता है चाहे, कुछ समय के लिए ही क्यों ना हो !  प्रवीण का व्यापार चल निकला, अब तक करुणा भी घर पर आ गई थी ,उसने भी घर गृहस्थी में सहयोग देना आरंभ कर दिया था। वहीं घरेलू राजनीति ! उद्देश्य ,विरोधी पार्टी को परेशान करना। बहुत दिन हो गए थे, ऐश्वर्या परेशान तो थी किंतु कुछ कह भी नहीं सकती थी क्योंकि प्रवीण अपने कार्य में व्यस्त था। उसे घरेलू परेशानियाँ  बतलाकर , परेशान नहीं करना चाहती थी। अब तो वह इस बात से प्रसन्न थी कि कम से कम, प्रवीण को कोई काम तो मिल गया और वह आत्मनिर्भर हो गया। बात-बात में घर वालों का मुँह नहीं देखना होगा। ऐश्वर्या अकेली ,दोनों बच्चों को संभालती , कभी-कभी थक भी जाती किंतु उसे भी न जाने, कैसी जिद चढ़ी थी , जो भी उसके साथ हो रहा है , उसमें उसे जीतना भी है। 

एक दिन, किसी बात पर चंदा देवी ने दोनों पति-पत्नी से स्पष्ट रूप से कह दिया, तुम यह घर छोड़कर चले जाओ ! अपना कहीं ओर जगह इंतजाम कर लो ! यह बात सुनते ही प्रवीण के'' पैरों तले जमीन खिसक गई। '' अभी वह संभलने लगा ही था ,ऐसे में घर छोड़कर कहां जाएगा ? ऐश्वर्या भी समझती थी, कि  व्यापार अभी आरंभ हुआ है ,लाभ तो हो रहा है लेकिन यदि व्यय अधिक हुआ तो हानी में जा सकता है क्योंकि उसने मायके में , अपने पिता का कारोबार भी देखा है, किस तरह हानि हुई थी ? दोनों पति-पत्नी ने बहुत सोचा और उसके पश्चात प्रवीण ने निर्णय लिया ,कि मैं घर छोड़कर ,कहीं किराए के मकान में रहने लगूंगा।

 अब तक ऐश्वर्या, बहुत सी बातें समझने लगी थी, बहुत कुछ सीख गई थी और उन लोगों की तरह ही सोचने  भी लगी थी। उसने अपनी सोच का विस्तार किया, और उनके दृष्टिकोण को लेकर ही सोचने लगी थी कि मुझे किस तरह से इन लोगों से अपनी बात रखनी है। वह समझती थी, किराए के मकान में दो बच्चों को लेकर कहां धक्के खाऊंगी। अभी तो, प्रवीण के कारोबार की जगह भी ,किराए पर ही है , कैसे सब होगा ? यही सब सोचकर, उसने एक निर्णय लिया और चंदा देवी से बोली -माना कि यह मकान आपका है, जैसे प्रतीक आपका बेटा है, वैसे ही ये  भी आपके ही बेटे हैं , जितना अधिकार इसका है ,उतना ही अधिकार इनका भी बनता है। मैं इस तरह घर छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी ?

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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