Tadap [ 103]

 ऐश्वर्या, को परिवार से अलग कर दिया गया था और अब वह नजदीक में, अपनी सास चंदा देवी और प्रतीक के परिवार से अलग रह रही थी। वह सोच रही थी, कि जिंदगी में जो हो चुका, अब उसको दोबारा संभाला तो नहीं जा सकता , न ही ,उसमें कोई परिवर्तन किया जा सकता है , तो क्यों न, जिंदगी को आगे बढ़ने का मौका दिया जाए ? अपनी जिंदगी को ठीक से संवारा जाए। अपने बच्चे हैं, उनको सही शिक्षा दी जाए। एक अच्छी सोच के साथ, ऐश्वर्या आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत थी। किंतु प्रवीण ने तो ,शायद ऐसा कुछ सोचा ही नहीं है , वह आजाद तो हुआ है किंतु परिवार से ,अपनी व्यर्थ की सोच से नहीं , उसके लिए तो परिवार से अलग होना, मस्ती-, मजा करना ही है। शराब पीना यही सब उसने सोच लिया था। किंतु ऐसे समय में,गलत दिशा में जा रहे , उसके बढ़ते कदमों को, ऐश्वर्या ने रोकने का प्रयास किया। जिसके कारण वह ऐश्वर्या से क्रोधित हो गया।


 पहले तो ऐश्वर्या रो रही थी, उसे लग रहा था -वह  यह सब कैसे संभाल पाएगी? किंतु तुरंत ही , उसकी एक अच्छी सोच ने ,उसे संभालने का साहस दिया।  उसने अपने आपको संभाला , मन ही मन सोचा -यह तो जिंदगी है , इसमें नित्य ,नए टास्क मिलेंगे , जो मुझे जीतने हैं। अपने पति और परिवार के लिए तो यह सब मुझे करना ही होगा, सोच कर उसने अपने मान- सम्मान, और अपने अहंकार को एक तरफ रख और अपने परिवार को बनाए ,रखने का प्रयास करने लगी। जिस तरह प्रवीण और ऐश्वर्या इस परिवार के दो पहिए हैं , यदि इनमें से एक भी, नहीं चलेगा तो एक के सहारे गाड़ी ज्यादा दूर तक नहीं जा पाएगी।  यही सोचते हुए, उसने प्रवीण से बात करने का निर्णय लिया -जब वह और प्रवीण घर में अकेले थे। तब प्रभा ने उसे समझाने का प्रयास किया , मैं समझती हूं, आपकी भी अपनी इच्छाएं हैं, भावनाएं हैं , सभी की अपने तरीके से जीने की इच्छा होती है , लेकिन कुछ इच्छाएं हमें अपने परिवार के लिए ,अपनों के लिए, छोड़नी  भी पड़ जाती हैं और इसमें तो आपकी सेहत का भी प्रश्न है , शराब पीकर कोई भी, आज तक स्वस्थ नहीं रहा। किडनी ,लीवर सब फेल हो जाते हैं। देखा आपने,आपके दोस्त का क्या हाल हुआ था ? ज्यादा शराब पीकर, सरकारी अस्पताल में किस तरह उसने दम तोड़ा ? उस समय उसके पास और उसके साथ कोई नहीं था। 

प्रवीण ने इस बात को समझा या नहीं किंतु ऐश्वर्या की बातों से झुँझला अवश्य गया। तुम क्या मुझे बच्चों की तरह समझाने  बैठ गई ,मैं कोई बच्चा नहीं हूं , मैं जानता हूं ,मैं क्या कर रहा हूं ? तू क्या मुझे यह बताना चाहती है ? कि मेरे दोस्त रवि के साथ कोई नहीं था , तो अभी कौन साथ है ?[अपने परिवार के विषय में सोचकर बोला ] तू मुझे डराना चाहती है , कि मेरे बुरे वक्त में , मेरे साथ भी कोई नहीं होगा। 

तुम मेरी बात को अन्यथा ले जा रही हो , ऐश्वर्या ने कहा -मैं यह कहना चाह रही थी, कि बच्चे जब देखेंगे कि हमारे पापा पीकर आते हैं, तो उन पर कितना बुरा असर होगा ?

कोई ऐसा नहीं होगा , मैं तो चुपचाप पीकर अंदर आ जाता हूं , तेरे शोर मचाने से ही, उन्हें पता चल पाएगा, वरना किसी को कुछ नहीं पता चलेगा। 

तुम्हारे कहने का तात्पर्य यह है, कि तुम शराब नहीं छोड़ोगे। 

तेरे कहे से छोड़ दूंगा अपनी अकड़ दिखाते हुए ,जैसे मैं उन मर्दों में से नहीं जो औरतों के पीछे घूमते हैं ,या दुम हिलाते हैं ,तब बोला -जैसे तेरे भाई ! जिनकी तेरी भाभियों के सामने चूं तक नहीं निकलती। 

'चूं ' करना भी क्यों है ? कोई गलत कह रहा हो या गलत शिक्षा दे रहा हो तो बात भी है , कहना मान रहे हैं तो अपना घर -परिवार भी तो ठीक से चला रहे हैं , उनकी बीवियों को इस तरह कहने की आवश्यकता नहीं पड़ती।आपस में एक -दूसरे का सम्मान करते हैं। एक -दूसरे की बात का मान रखते हैं ,इसमें बुराई ही क्या है ?मन ही मन सोचा - तुमने तो पत्नी का आदर कहाँ देखा है ?या तो अपनी माँ से डरे या फिर माँ के कहने पर भाभियों को पिटते देखा।   प्रत्यक्ष बोली -देखो, इसका असर , अभी तुम कह कर बात कर रहे थे, और तू पर आ गए। हमने कितनी मेहनत से और कितनी परेशानी उठाकर, अपने को संभाला है, मैं नहीं चाहती कि कल हमारी, किसी भी प्रकार की नादानी से ,हमें फिर से वही देखना पड़ जाएं , आपने देखा नहीं आपके घर वालों में भी कोई हमारे साथ नहीं है। अपने घरवालों से भी मुझे कोई उम्मीद नहीं है तब आप क्या समझते हैं ? यदि मुझे या आपको कुछ हो जाता है तो हमारे बच्चों के साथ और उनके पास कौन होगा ? यह कह कर मैं वहां से उठ कर चली गई। 

क्योंकि जिसे कहना मानना होता है वह एक बार में मान लेता है और जिसे नहीं मानना होता है, उसे  समय सिखला देता है ऐश्वर्या के सफ़र की यह शायद दूसरी पारी है। 

प्रवीण को कहना नहीं मानना था, तो उसने कहना नहीं माना, ऐश्वर्या ने भी, शोर नहीं मचाया किंतु हां उसे दुख आवश्यक होता कि इसने जितना भी, प्यार करने का दावा किया था , उसमें से प्यार की एक रीत भी नहीं निभाई। उसने कभी ऐश्वर्या का कहना नहीं माना। रोज-रोज , चिक चिक तो नहीं कर सकती थी। किंतु हां जब कभी उसे प्रवीण के कारण परेशानी महसूस होती, तब कह देती और तभी उन दोनों में झगड़ा हो जाता। 

आज करवा चौथ है, ऐश्वर्या ने अपने घर की सफाई की है, बच्चों को स्कूल भेजा है, छोटे को भी स्कूल भेजने  लगी है। प्रवीण के व्यवहार में कोई ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है। जिंदगी अपने ढ़र्रे पर चल रही है। न ही  इतनी प्रसन्नता महसूस होती है और न ही मन में, कोई दुख का भाव है। अन्य महिलाओं की तरह ऐश्वर्या ने भी आज उपवास रखा है। अब उसकी देवरानी और सास उससे पड़ोसी की तरह व्यवहार करती हैं। ऐश्वर्या यह जानती है-कि  चंदा देवी, कभी-कभी प्रवीण को रोककर उससे बातें करती हैं किंतु ऐश्वर्या को इसमें कोई बुराई नजर नहीं आई। उसकी मां है, बात करने से नहीं रोक सकती। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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