Sirf tumhare liye

तुमने इस झील से शांत मन पर ,

न जाने कैसे ,शब्दों का वार किया ?

शांत रहकर भी ,अन्तस् भिगो दिया। 

मरहम की तलाश में ,बैठे इंतज़ार में ,

सिर्फ़ तुम्हारे लिए ...... 


गलती तुम्हारी भी नहीं ,

दिल ऐसा ही कुछ नाजुक़ मेरा ,

तुम्हारे दिए ज़ख्मों को दिल पर ले लिया। 

तुमसे बात करने को ,तरसाते ये नयन तेरे ,

इन्होने न जाने ,ऐसा क्या जादू सा किया ?

भीगी पलकें सिर्फ़ तुम्हारे लिए....... 


तेरी अल्फाजों की तरह ही ढूंढती हैं ,ये निगाहें तुझे,

              तुझसे एक बात पूछती  हूं , 

क्या तू भी कहीं ,मेरी ही तरह दर्दे जाम पिए बैठा है। 


दर्द के साये में ,इक -इक दर्द तराशकर उभरा है,

तेरे लफ्जों से ,अब वह दर्द ए कोहिनूर बन गया। 


तेरे अल्फाजों में ,मैं अपने आप को ढूंढती हूं ,

तेरी ख़्वाहिश , तेरी वो रिवायत ढूंढती हूँ। 

तू खो गया है कहीं ,पास है, दूर नजर आता है। 

तुझमेंअपनी मोहब्बत औ तेरा सुकून ढूंढती हूँ। 



माना कि ,हम वह नहीं ,जो तुमने समझा,

काश !! कुछ पल साथ बैठ बातें तो करते। 

आरजुएं ,कभी किसी की ,पूरी नहीं होती,

जब तक जिंदगी है, कुछ कदम तो साथ चलते। 

''हमसाया'' नहीं ,''हमकदम ''ही समझते। 


तेरे दर्द ओ गम बांट लूँ , तेरे लिए दिलों में सुकून ढूंढते हैं। 

जहां तक भी जाती हैं,ये निग़ाहें ! हम तेरी तस्वीर ढूंढते हैं। 


 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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