तुमने इस झील से शांत मन पर ,
न जाने कैसे ,शब्दों का वार किया ?
शांत रहकर भी ,अन्तस् भिगो दिया।
मरहम की तलाश में ,बैठे इंतज़ार में ,
सिर्फ़ तुम्हारे लिए ......
गलती तुम्हारी भी नहीं ,
दिल ऐसा ही कुछ नाजुक़ मेरा ,
तुम्हारे दिए ज़ख्मों को दिल पर ले लिया।
तुमसे बात करने को ,तरसाते ये नयन तेरे ,
इन्होने न जाने ,ऐसा क्या जादू सा किया ?
भीगी पलकें सिर्फ़ तुम्हारे लिए.......
तेरी अल्फाजों की तरह ही ढूंढती हैं ,ये निगाहें तुझे,
तुझसे एक बात पूछती हूं ,
क्या तू भी कहीं ,मेरी ही तरह दर्दे जाम पिए बैठा है।
दर्द के साये में ,इक -इक दर्द तराशकर उभरा है,
तेरे लफ्जों से ,अब वह दर्द ए कोहिनूर बन गया।
तेरे अल्फाजों में ,मैं अपने आप को ढूंढती हूं ,
तेरी ख़्वाहिश , तेरी वो रिवायत ढूंढती हूँ।
तू खो गया है कहीं ,पास है, दूर नजर आता है।
तुझमेंअपनी मोहब्बत औ तेरा सुकून ढूंढती हूँ।
माना कि ,हम वह नहीं ,जो तुमने समझा,
काश !! कुछ पल साथ बैठ बातें तो करते।
आरजुएं ,कभी किसी की ,पूरी नहीं होती,
जब तक जिंदगी है, कुछ कदम तो साथ चलते।
''हमसाया'' नहीं ,''हमकदम ''ही समझते।
तेरे दर्द ओ गम बांट लूँ , तेरे लिए दिलों में सुकून ढूंढते हैं।
जहां तक भी जाती हैं,ये निग़ाहें ! हम तेरी तस्वीर ढूंढते हैं।
