कल्पना इस बात से उबर नहीं पा रही थी ,कि उसके डिजाइनों को चीफ गेस्ट ने यानी कि श्रीमती चांदनी ने कोई महत्व नहीं दिया , जबकि उसके कॉलेज के ही जज उसके डिजाइन सबसे अच्छे बता रहे थे। फैसला लिया जा चुका था, अब क्या किया जा सकता है ? वह अपनी परेशानी में इधर-उधर टहल रही थी तभी उसे स्मरण हो आया। मम्मा कहां गई ? वह नीलिमा को इधर -उधर तलाशने लगी किन्तु कहीं भी दिखलाई नहीं दी। तब उसने एक -दो लड़कियों से पूछा ,जिनसे वह नीलिमा को पहले ही मिलवा चुकी थी। उन्होंने अनभिग्यता जाहिर की ,तब एक अन्य लड़की ने बताया ,तुम्हारी मम्मी को मैंने बाहर जाते हुए देखा।
उसकी बार सुनकर कल्पना और अधिक परेशान हो गयी ,इतने बड़े शहर में, न जाने कहां चली गई ? अपनी परेशानी भूल कर वह अपनी मां को के विषय में सोचने लगी। अब तो ,उसकी मम्मी के पास फोन था। उसने अपनी मम्मी को फोन लगाया,विचारों में खोई नीलिमा का ध्यान टूटा ,उसने फोन उठाया ,उधर से आवाज आई - मम्मा आप कहां हैं ?
बेटा ! मैं किसी कार्य से बाहर आई थी।
क्या आप जानती हैं ,इस समय आप कहाँ पर हैं ? इतने बड़े शहर में आप किसी को जानती भी नहीं हैं । गुम हो गईं तो मिलोगी भी नहीं।
अपनी बेटी की बात सुनकर नीलिमा को हंसी आ गयी ,बोली -मैं कोई छोटी बच्ची नहीं हूँ ,गुम नहीं होऊँगी, अपनी मां को इतना कमजोर समझ रही है ,अभी भी इतनी जान है ,दो -चार को तो अभी भी'' छठी का दूध'' याद दिला सकती हूँ। मेरी माँ ,तू मेरी फ़िक्र करना बंद कर नीलिमा,ने उसे समझाते हुए कहा।
अब तुम कैसी हो ,तुम तो ठीक हो ?नीलिमा ने कल्पना से पूछा।
हां, मैं तो ठीक हूं, किंतु आज कल्पना का इरादा नीलिमा से तुषार को मिलवाना भी था किंतु तुषार भी न जाने आज कहां चला गया ?मेरी ऐसी परेशानी में ,उसे मेरे साथ खड़ा होना चाहिए किन्तु वह तो कहीं दिखलाई ही नहीं दे रहा है।उसने वहीँ से खड़े -खड़े अपने आस -पास नजर दौड़ाई ,शायद ,वो यहीं -कहीं दिख जाये। अभी वह बात ही कर रही थी तभी उसे बाहर से आता हुआ तुषार दिखलाइ दिया। अच्छा मम्मी !आप जल्दी आइये ! मैं आपकी प्रतीक्षा कर रही हूँ ,दोनों साथ ही घर जायेंगे ,कहते हुए ,उसने आपसे बात करती हूं, कहकर फोन काट दिया और तुषार की तरफ दौड़ चली ,मन ही मन सोच रही थी ,जिसे देखो ,आज के दिन बाहर ही जा रहे हैं ,पहले मम्मा गायब हो गयीं और अब ये महाशय बाहर से आ रहे हैं। आज उससे रुका नहीं गया और तुषार को देखते ही ,उसके गले लगकर, रोने लगी।
क्या हुआ ?
अब पूछ रहे हो क्या हुआ ? सब बर्बाद हो गया, जो ''चीफ गेस्ट'' आई थीं ,उन्हें मेरे डिजाइन पसंद ही नहीं आये ।
तुम्हारे डिजाइन तो बहुत अच्छे थे, मुझे लग रहा था कि तुम्हें ही वह नौकरी और ट्रॉफी मिलेगी। तुषारके इस तरह समर्थन करने से नीलिमा का दुख और बढ़ गया और वह फिर से रोने लगी। अच्छा ,ये बताओ !वो कौन थी ?
''चांदनी ''
क्या ?चौंकते हुए ,तुषार बोला -तुरंत ही अपने को संभाल लिया ,अच्छा !तुम अब रो नहीं, हमारे लिए एक रास्ता बंद होता है तो दूसरा खुल जाता है। मैं तुम्हारे डिजाइन किसी और कंपनी में दिखाऊंगा ,उन लोगों से बातें करूंगा ,देखता हूं ,क्या परिणाम निकलता है ?
मेरे लिए एक सुनहरा मौका था जो मेरे हाथ से निकल गया। सभी मेरी डिजाइन की प्रशंसा कर रहे थे किंतु चांदनी देवी को पता नहीं क्यों ?मेरे डिजाइन पसंद नहीं आए। वह छोटी बच्ची की तरह बैठकर सोचने लगी ,तुषार ने उसकी तरफ देखा ,कल्पना पर उसे लाड़ आया उसने कल्पना को अपने कंधे से लगा लिया। मम्मा भी न जाने कहां चली गई ?
क्या तुम्हारी मम्मा भी आई थीं ?
यस, और मैं तुम्हें उनसे मिलवाना भी चाहती थी , न जाने कहां चली गई ? बाहर निकली और जिधर से लोग आ जा रहे थे ,उस द्वार की तरफ देखने लगी। इस तरह वह तीन -चार बार चक्कर लगा चुकी थी किंतु नीलिमा उसे आती दिखलाई नहीं दी।
तब कल्पना ने तुषार से पूछा -तुम अचानक कहां चले गए थे ? तुम्हें यह कार्यक्रम देखना चाहिए था , ताकि तुम भी अच्छे से निर्णय ले सकते कि किसके डिजाइन ज्यादा अच्छे थे अपने डिजाइन तो ,सभी को अच्छे लगते हैं इसलिए तुम एक जज की तरह से देखकर ,यह निर्णय ले सकते थे कि मेरे डिजाइन अच्छे हैं या फिर सुनैना के......
तुषार को आश्चर्य हुआ,और उसने पूछा - क्या सुनैना जीती है ?
हां,
