Sazishen [part 71]

नीलिमा इस समय, ''बंगला नंबर त्रेसठ ''के सामने खड़ी थी। आसपास देखती है, वहां बहुत बड़े -बड़े घर थे। इसका अर्थ है ,यह जगह ही ऐसी है ,यहाँ पैसेवाले लोग रहते होंगे। यह व्यक्ति जो भी। इस घर का मालिक है , बहुत ही अमीर है ,इतना बड़ा घर....... वो भी मुंबई जैसे शहर में ,और जब उस कोठी के बाहर लगी '' नाम की प्लेट ''पर उसकी दृष्टि गयी , तो वह आश्चर्यचकित रह गई। नीलिमा जिस गाड़ी का पीछा कर रही थी ,उस गाड़ी के माध्यम से ही वह ''बंगलो नंबर 63'' में पहुंच गई। यह कितने बड़े संयोग की बात रही है , बंगलो नंबर 63 ''जावेरी प्रसाद ''का ही बंग्ला था। अभी नीलिमा को  मुंबई में आए हुए ,एक माह  ही हुआ था। यहां आने का उसका उद्देश्य ''जावेरी प्रसाद ''को ढूंढना ही था।जिसके कारण ,वो आज अपनी बनी बनाई पहचान पर ''गद्दारी ''का दाग़ लगवाकर भी ,वहां न रह सकी ,उसे वहाँ से ,अपने बेटे को लेकर भागना  पड़ा। जिस' जावेरी प्रसाद 'को जानती भी नहीं ,उसने उसकी शांति भंग की ,शांत जल में ,बलात ही हलचल मचा दी। आखिर उसका दुश्मन क्यों बना बैठा है ?मैंने उसका आख़िर क्या बिगाड़ा है ? जो इस तरह से मेरी शांति को भंग करने चला आया। इससे तो मिलना ही पड़ेगा। 


इसके विषय में जानना तो होगा ,आखिर ये क्या बला है ?उसकी हस्ती तो अब नीलिमा को दिख रही थी। जब मुंबई में आई थी ,अक्सर लोगों से मिलती और उनसे 'जावेरी प्रसाद 'के विषय में पूछती थी किंतु उस नाम के सिवा ,उसे ,उसके विषय में कोई जानकारी नहीं थी ,इसीलिए वह किसी से क्या बताती ? किंतु आज जिस गाड़ी का पीछा करते-करते वह बंगलो नंबर 63 में पहुंच गई। वह बंग्ला किसी और का नहीं ''जावेरी प्रसाद'' का ही था और जिस गाड़ी का वह पीछा कर रही थी ,उस गाड़ी में ''श्रीमती चांदनी देवी'' थी। वह जानना चाहती थी -यह चांदनी देवी आखिर है ,कौन ? वह गाड़ी तो कोठी के अंदर चली गई, किंतु नीलिमा के मन में अनेक प्रश्न  छोड़ गई। इस चांदनी देवी का  'जावेरी प्रसाद 'से क्या रिश्ता हो सकता है ? इसका पता तो लगाना ही पड़ेगा। आखिर ये चांदनी कौन हो सकती है ?क्या ये वही है ,ये मेरा भ्र्म !

इस जगह की जानकारी नीलिमा को नहीं थी, उस स्थान के विषय में किसी से पूछा , किसी से क्या ,उस बंगलो के चौकीदार से ही पूछ लिया -आप यह सब जानकारी क्यों मांग रही हैं ?उसने प्रश्न किया। 

अभी जो मैडम ,की गाड़ी अंदर गई है , उन्होंने कल मेरी बेटी के साथ ,मुझे यहां आने के लिए बुलाया है इसलिए उन्होंने मुझे अपना यह घर दिखाया। मैं इस शहर में नई हूं, इसलिए जानकारी तो लेनी ही होगी।  तभी तो बेटी को लेकर यहां आऊंगी। 

नीलिमा को देखकर ,चौकीदार मुस्कुराया ,और सोचा -भला ,मैडम इन्हें क्यों बुलायेंगीं ?फिर सोचा ,हो सकता है ,कोई काम हो ,मुझे क्या ?सोचकर उसने अपने कंधे उचका दिए। 

बेटी का नाम आते  ही, नीलिमा को, अपनी बेटी की परेशानी स्मरण हो आई और तब उसने  वापस चलने के लिए, अपने उसी टैक्सी ड्राइवर से ही कहा -जहां से आए हैं ,वहीं ले चलो !

मन ही मन सोच रही थी -इस गाड़ी का पीछा करने के लिए, मैंने ऐसे समय में ,अपनी बेटी को अकेला छोड़ दिया जबकि उसे मेरी बहुत जरूरत थी। न जाने क्या कर रही होगी और न जाने क्या सोच रही होगी ?मम्मी न जाने कहाँ चली गयीं ? यह चांदनी देवी भी ,मुझे कुछ रहस्यमई सी लग रही है ? मेरी बेटी के कितने प्यारे डिजाइन थे ,उसने कितनी मेहनत की थी ? किंतु इसने उन पर ''पानी फेर दिया'' जो भी है, मेरे बेटी की हानि तो हुई है। समझ नहीं आ रहा ,जो हो रहा है ,अच्छे के लिए या बुरे के लिए हो रहा है। एक तरफ चांदनी का मिलना ,दूसरी तरफ 'जावेरी प्रसाद 'के घर का पता चलना। कुछ समझ नहीं आ रहा आखिर यह' जावेरी 'हमारी ज़िंदगी में ,क्यों आया है ?जिससे हम पहले कभी मिले नहीं। विचारों का सिलसिला बनता जा रहा था।

कहीं ऐसा तो नहीं ,ये जावेरी और चांदनी दोनों ही मिले हुए हों ,वहां मुझे अपमानित करवाकर मेरे स्थान से निकलवा दिया। और यहाँ मेरी बेटी के डिजाइन नहीं चुने गए ,जबकि उसके हाथ में सब कुछ था। ये मुझे,इन लोगों की  सोची -समझी साज़िश लग रही है। विचारों का सैलाब बढ़ता जा रहा था ,कुछ समझ नहीं आ रहा था। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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