Sazishen [part 52 ]

पूजा के मन में कोई पाप नहीं था, वह तो अपने चंपक को दिलो जान से प्यार करती थी इसलिए वह किसी से डरती भी नहीं थी। डरेगा वह , जिसके मन में पाप होगा, वह तो चाहती थी -कि चंपक उसका रिश्ता बना   रहे और दोनों का विवाह हो जाए , इसीलिए उसने अपनी ओर चंपक के बढ़ते कदमों को रोका नहीं , किंतु चंपक के मन में खोट आ  गया था और वह अब पूजा से कतराने लगा था, उसे छाया से प्यार जो हो गया था।

जो तस्वीर चंपक की मम्मी ने, चंपक के मन को टटोलने  के लिए ,उसके कमरे में रख दी थी। जब से उन्होंने चंपक और पूजा को मंदिर में साथ देखा था तब से उन्हें परेशानी हो रही थी। उन्हें लग रहा था ,कि उनका बेटा शायद, किसी और लड़की के चक्कर में आ गया है,उनके हाथों से निकलता जा रहा है।  उन्हें तो अपने बेटे का विवाह ,किसी अमीर परिवार की लड़की होने के साथ -साथ उनकी अपनी मनपसंद की लड़की से करना था। हालाँकि पूजा के परिवारवाले भी पैसे में ,उनसे किसी भी तरह से कम नहीं थे किन्तु जब तक किसी के विषय में जानकारी न हो तो ,वह उस इंसान को महत्व नहीं देते।


 आजकल की दुनिया ही ऐसी है ,किसी के पहनावे को देखकर ,या उसकी  आर्थिक स्थिति को देखकर ,उसे महत्व देते  हैं ,हालाँकि अभी तक वो पूजा के विषय में कुछ नहीं जानती हैं किन्तु अपने बेटे के साथ देखकर उन्होंने उसके प्रति गलत भ्रान्ति बना ली है। न ही एक बार भी ,चंपक से पूछने का प्रयास किया। उनके जानने वालों में ही ,''छाया ''भी एक ऐसी ही लड़की थी जिसका रिश्ता चंपक  के लिए आया था अब तक वे  चंपक की पढ़ाई के कारण, शांत थीं  किंतु जब उन्होंने पूजा को चंपक के साथ देखा तो उन्होंने वह तस्वीर चंपक के कमरे में रखवा दीं इसका परिणाम भी अच्छा हुआ या यह भी कह सकते हैं, कि उनका यह षड्यंत्र कामयाब हुआ क्योंकि चंपक ने  जब उस लड़की की  तस्वीर को देखा तो देखता ही रह गया, और मन ही मन उसकी तस्वीर को अपना दिल दे बैठा। 

पूजा गर्भवती हो गई थी, और वह चाहती थी ,शीघ्र अति  शीघ्र हम दोनों का विवाह हो जाए इसके लिए चंपक पर दबाव बना रही थी कि वह अपने घरवालों से उसके विवाह की बात करें किंतु चंपक उसकी इन हरकतों के कारण घबरा गया था और शाम को उससे मिलने आता है और उसे समझाने का प्रयास भी करता है। किंतु पूजा तो अपनी ही धुन में मस्त थी, उसके लिए तो जीवन बहुत ही आसान था, मुश्किल बनाना भी क्यों है ?'' जब दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं ,तो विवाह करने में क्या जाता है ?'' यही उसका कथन था। 

उसकी बातों को सुनकर चंपक शांत रहता है और उससे कहता है, कि तुम डॉक्टरी पढ़ रही हो तुम्हारी पढ़ाई में हरजा होगा, अभी हम इस बच्चे को संभाल नहीं पाएंगे ,उसकी परवरिश नहीं कर पाएंगे क्योंकि अभी तो हमारे माता-पिता ही हमारी परवरिश कर रहे हैं। हम स्वयं आत्मनिर्भर नहीं हैं , बच्चे तो बाद में भी होते रहेंगे, फिलहाल तुम इस बच्चे को गिरा दो !

चंपक की बातें सुनकर, पूजा को लगा- जैसे वह'' आसमान से नीचे जमीन पर आ गिरी है।'' यह तुम क्या कह रहे हो? उसे आश्चर्य होता है, ''यह तो हमारे प्रेम की निशानी है। '' क्या तुम उन क्षणों  को भूल गए ? जब हम एक दूसरे की बाहों में, समाये हुए थे ,क्या वह हमारा प्यार नहीं था ? जब तुम मेरे करीब आते थे और मैं दुनिया जहां को भूल जाती थी ,क्या वह प्यार नहीं था ? मैं पढ़ाई तो करती थी, किंतु तुम्हारे ख्यालों में खोई रहती थी ,क्या वह प्यार नहीं था ? हम दोनों घंटों एक -दूसरे के बाहों में सिमटे रहते थे , क्या वह प्यार नहीं था ?

पूजा की बातें सुनकर, चंपक परेशान हो उठा और बोला -नहीं ,वह प्यार नहीं था , वह' हवस' थी , जो तुम्हें मुझसे पूरी करनी थी, और मुझे तुमसे , क्या कभी मैंने तुमसे कहा है ,कि मैंने  तुमसे प्यार किया है,? फिर तुम इस भ्र्म में कैसे जी सकती हो ?

तुम यह क्या कह रहे हो ? होश में तो हो, हम 6 महीने से एक दूसरे से मिल रहे हैं, प्यार भरी बातें कर रहे हैं , और अब तुम कहते हो कि हमें प्यार ही नहीं था , मैंने तो तुमसे कितनी बार कहा था -कि मैं तुमसे प्यार करती हूं। 

तुम करती हो ,मैं नहीं करता, उत्तेजित होते हुए चंपक बोला। 

जब तुम मुझसे प्यार नहीं करते थे, तो मेरे करीब ही क्यों आए ? जब तुम मुझसे प्यार ही नहीं करते थे तो मेरी परवाह क्यों करने लगे ?'' हवस'' तुममें होगी ,मुझ में नहीं, मैंने तो तुम्हें ही अपना सब कुछ मान लिया था, कहते हुए पूजा रोने लगी। 

तुम्हारे आंसुओं से मुझ पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा, चंपक दृढ़ निश्चय से बोला। 

यह आंसू मैं तुम्हारे लिए नहीं, बहा रही हूं , बल्कि अपनी मूर्खता पर बहा  रही हूं। मैं तो कब से तुम्हारी हो चुकी हूं, और तुम कह रहे हो कि तुम्हें मुझसे प्यार ही नहीं था। मैं तो प्यार करती थी, मैं तो तुम्हारे प्यार में 'बावरी' हो गई थी किंतु तुम तो प्यार नहीं करते थे , तब तुम क्यों मेरे करीब आए ?

जब किसी भूखे को भोजन मिलेगा ,तो वह क्या छोड़ देगा ?

मैं क्या भोजन हूं , मेरी अपनी भी भावनाएं हैं ,मेरे बिना सहयोग के तुम कैसे उस भोजन को ग्रहण कर  सकते थे। तुमने मेरी भावनाओं को आहत किया है। तुमने अभी तक मेरा प्यार ही देखा है, जिस प्यार के  मैं,  दिन -रात सपने सजाती रही, तुमने उस प्यार को ही झुठला दिया। अब मैं कहां जाऊंगी ? पूजा के शब्दों में बेबसी थी , मैंने हमेशा तुम्हारा साथ दिया और तुमने हमारी दोस्ती का और मेरे प्यार का यह लाभ उठाया। वाह रे ,स्वार्थी मानव ! मैं इतनी सरलता से तो तुम्हें नहीं छोडूंगी। मैं तुम्हारे घर जाऊंगी, और तुम्हारे घरवालों की सारी बातें बताऊंगी। देखती हूं ,कैसे ?तुम्हारे परिवार वाले मुझे नहीं स्वीकार करते हैं। 

तुम्हारी इतनी हिम्मत ! यह कहते हुए चंपक कुर्सी से उठ खड़ा हुआ , खबरदार ! जो मेरे घर जाने का प्रयास भी किया। तुमसे मेरी मम्मी ने पहले ही बता दिया होगा, मेरे लड़के से दूर रहना , उसके इन कठोर शब्दों को सुनकर पूजा अंदर तक हिल गई थी। उसका मन- विचार जो हवा में थे, ऊंचाइयां छू रहे थे ,आज उसे लग रहा था जैसे वह धूलधूरिस्त हो चुकी है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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