जब से चंपक को पूजा की गर्भवती होने का पता चला है ,वह परेशान हो उठा है। उसे लग रहा था, बैठे-बिठाये मैंने न जाने क्या आफत मोैल ले ली है। अब उसे पूजा के प्रति जो आकर्षण था ,वह भी समाप्त हो गया था। पूजा से प्यार तो उसे उसे पहले से ही नहीं था किंतु जब सामने, से आकर कोई उसकी झोली में गिर रहा था ,तो उस फल को चखने उसे कोई बुराई नजर नहीं आई , इसीलिए उसने, पूजा से संपर्क बनाए। किंतु पूजा तो उसके प्यार में थी,उसके मन में कोई छल नहीं था इसीलिए उसने अपना सर्वस्व चंपक को सौंप दिया। यदि वह चाहता, तो पीछे भी हो सकता था , किंतु पूजा के सौंदर्य का आकर्षण,उसका यौवन उसे पूजा के समीप खींच लाया। अब वह जरूरत के हिसाब से पूजा के क़रीब जाता ,थोड़ा बहुत जो आकर्षण रह गया था ,वह छाया के कारण समाप्त हो गया। छाया की तस्वीर ने ही उसका दिल, अपनी ओर कर लिया था।
शाम को उसे पूजा से मिलने जाना था, उसने पूजा से वायदा जो किया था ,किंतु वह जाना नहीं चाहता था। अब मजबूरी हो गई है, जाकर उसे समझाना तो पड़ेगा ही, कि किसी भी तरह से इस बच्चे को गिरा दे। जब वह डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है तो क्या उसे इतनी भी अक्ल नहीं है , ऐसा रिस्क उसने लिया ही क्यों ?
तभी उसके मन में एक नकारात्मक विचार आता है, कहीं उसने यह सब मुझे फँसाने के लिए तो नहीं किया। आदमी जब उस परेशानी से छूटना चाहता है ,तो उसे अनेक विचार मन में आते हैं। इसी तरह चंपक को भी विचार आ रहे थे। पूजा उसकी प्रतीक्षा में थी, शाम होने को आई ,किंतु चंपक नहीं आया था। वह बेचैन हो उठी थी, यदि अब भी वह नहीं आया तो मैं अपने अधिकार के लिए, उसके घर तक भी पहुंच जाऊंगी क्योंकि वह जानती थी ,यदि उसके परिवार वालों को उसके गर्भवती होने का पता चल गया तो घर में बहुत ही, हड़कंप मच जाएगा इसीलिए वह चाह रही थी, कि चंपक यदि विवाह के लिए मान जाता है तो यहीं दोनों विवाह करके, खुशी-खुशी अपने मायके में जाएगी । परिवार वालों को बुरा तो लगेगा, किंतु इस बात से आहत तो नहीं होंगे कि वह'' बिन ब्याही ''मां बनने की तैयारी कर रही है।उसका सोचना भी सही था। जब दोनों एक -दूसरे से प्रेम करते हैं ,तब विवाह करने में क्या बुराई है ?
जो हमेशा सकारात्मक सोचती थी, आज उसे बहुत से ,नकारात्मक विचार आ रहे हैं। मन ही मन घबरा भी रही है , एक तो उसकी स्थिति ऐसी नहीं है, थोड़ा अस्वस्थ भी रहने लगी है, कमजोरी भी महसूस कर रही है। जैसे-जैसे शाम होने लगी है ,उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही है , वह घर से बाहर आकर टहलने लगती है, और उस रास्ते को बार-बार देखती है जिससे उसे, चंपक के आने की उम्मीद है। कुछ देर पश्चात ही , अब तो शाम का धुंधलका भी बढ़ गया है ,उसे एक परछाई अपनी ओर आती दिखाई देती है। जब मन में चोर होता है, तो इंसान अपने को छुपाने का प्रयास करता है। इससे पहले चंपक के मन में,कोई ड़र नहीं था इसी लिए वह, दिन में भी बिंदास उसके घर चला आता था किंतु आज वह अंधेरे की प्रतीक्षा में था।
उसे देखकर, पूजा को थोड़ा सुकून मिला , और उसकी तरफ बढ़कर , बोली - आने में, इतनी देर क्यों लगा दी ?मैं कितनी देर से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही थी , किंतु चंपक ने कोई जवाब नहीं दिया, वह घर के दरवाजे की ओर बढ़ गया। शायद वह नहीं चाहता था, कि कोई उसे यहां आते हुए या उससे बातें करते हुए देख ले।
पूजा भी उसके पीछे -पीछे आई और बोली -तुम ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हो ? तुम क्यों ?अपने प्यार को छुपाना चाहते हो ?'' जब प्यार किया तो डरना क्या ?'
चुप रहो ! चुपचाप अंदर चलो ! चंपक ने उससे झुंझलाते हुए कहा -क्या तुम नहीं जानती हो ,तुम्हारी क्या हालत है ? किसी आस -पड़ोस वाले को पता चल गया तो...... क्या होगा ?
क्या होगा ? हमने कोई पाप नहीं किया है , हम एक दूसरे से प्यार करते हैं , पूजा भी स्पष्ट रूप से बोली।
''ये पाप ही है , मेरा - तुम्हारा विवाह नहीं हुआ है ,जब तक हम किसी रिश्ते में नहीं बंध जाते हैं ,तब तक ये पाप ही माना जायेगा उसके पेट की तरफ देखते हुए बोला -क्या तुम्हें पूर्ण विश्वास है कि तुम गर्भवती हो ?''
हाँ ,हाँ इसमें अविश्वास की कोई बात ही नहीं है
