ताउम्र लड़ते -झगड़ते रहे ,
लगता , जिंदगी बेजार है।
ना कभी करीब बैठे ......
न ही इस रिश्ते में कोई बात है।
समझ नहीं आता ,ये चक्र भी,
रिश्ता यह कैसा? निभाना बेकार है।
विवाह हुआ ,जब से.......
लगता...... जीवन अपना बेकार है।
''लव'' कहां ? इस जीवन में ,
इसे ढूंढना बेकार है।
उत्तरदायित्वों के बोझ तले,
ढूंढते थे........ '' लव ''!
हमारे मध्य '' इंपॉसिबल लव ''है।
यही सोच🤔🤔🤔 जी रहे थे।
परिवार बढा ,'' लव ''न बढा ,
जिंदगी भी भागती रही ,
हम भी दो किनारे साथ चलते रहे।
दो पल ठहर ,देखा जो घड़ी भर !
क्यों ,एक -दूजे को नकारते रहे ?
''इंपॉसिबल लव ''को सोच !!!
उसी के साये में जीते रहे।
कुछ तो था 🤔🤔🤔🤔🤔
जो हम ,आज तक साथ रहे।
