Sazishen [part 50]

अब साहब ! मैंने क्या कर दिया ?घबराते हुए रामफल ने पूछा। 

 वह तो थाने चलकर ही ,तुम्हें पता चलेगा प्यारेलाल ने रामफल से कहा- बैठो !जीप में  

जोरावर और प्यारेलाल रामफल को लेकर थाने में आते हैं, उस समय इंस्पेक्टर विकास खन्ना चाय पी रहे थे। रामफल घबराया हुआ था , उसे देखकर इंस्पेक्टर साहब बोले -इतना क्यों घबराए हुए हो ?तुमने क्या कोई जुर्म किया है ? कुछ पूछताछ करने के लिए ही तो तुम्हें बुलाया गया है।चाय पियोगे !

नहीं साहब !पुलिसवालों की चाय कभी -कभी बहुत महंगी पड़ जाती है। साहब ! आपने मुझे इस तरह बुला लिया, मुझे लगा, मैंने  न जाने कौन सा जुर्म कर दिया ?एक तो मेरी बच्ची गायब हो गयी और मुझे ही उठा लाये। 


जुर्म तो नहीं किया ,किंतु गलतियां तो तुम बहुत कर रहे हो , झूठ भी बोल रहे हो , क्या तुम्हारी बेटी अभी भी तुम्हें नहीं मिली ?

नहीं ,साहब !वह नहीं आई है,मैं सच कह रहा हूँ ,अपनी बात पर दबाब देते हुए कहता है।  

कहीं, तुमने ही तो उसका विवाह नहीं करा दिया, या उसे किसी अमीर को बेच दिया हो। 

यह कैसी बातें कर रहे हैं ?साहब ! भला मैं ऐसा क्यों करूंगा ?

पैसे का लालच सब कुछ करवा देता है, विकास खन्ना थोड़े कठोर शब्दों में बोले -मैंने  तुम्हारी बेटी को नैनीताल में देखा था। 

क्या कह रहे हैं ? साहब ! उसके चेहरे पर थोड़ी मुस्कुराहट आई। 

किंतु तुम तो कह रहे हो कि उसका विवाह ही नहीं हुआ है और वह लड़की तो विवाहित थी। 

फिर तो कोई और होगी ,लापरवाही से बोला। 

नहीं ,वो चम्पा ही थी,मैंने उसे एक बार नहीं कई बार देखा है ,मैं धोखा नहीं खा सकता इंस्पेक्टर पूरे विश्वास के साथ बोला। 

 न जाने ,यह लड़की क्या करके छोड़ेगी ? कुछ समझ नहीं आता अपने माथे को पीटते हुए रामफल बोला। 

उसने तुमसे या तुम्हारी पत्नी से कभी कुछ कहा था, या जाने से पहले ,कुछ अंदाजा लगा हो कि वह क्या सोच रही है ? अस्पताल में तो कोई भी नहीं आया था फिर अस्पताल में से वह कैसे गायब हुई? वह महिला कौन थी  जो नर्स के वेश में आयी थी । सीसीटीवी कैमरे में वह आते हुए तो दिख रही है, किंतु जाते हुए नहीं देखी गयी। जाते समय तुम्हारी बेटी उन कपड़ों में थी तब वह महिला कहां गई ?अनेक प्रश्न विकास को परेशान कर रहे थे। 

अब साहब ! यह तो पुलिस वालों का काम है, मैं क्या बता सकता हूं ?

हाँ ,ये हमारा कार्य है, ये बात हम बखूबी जानते हैं , किन्तु तुम्हारा भी कुछ फ़र्ज बनता है या नहीं ,तुम तो उसके पिता हो देखो !तुम्हें जो भी थोड़ी बहुत जानकारी है ,वह तुम हमें दे दो ! वरना तुम जानते हो ,हम जितने आराम से बात कर रहे हैं , उतने ही कठोरता से भी काम लेते हैं ,चेतावनी देते हुए विकास बोला - कानून का समय बर्बाद मत करना , जो भी जानकारी तुम्हें मिले वह हमें देते रहना ,अब तुम जा सकते हो। 

रामफल वहां से उठकर चल दिया और बाहर की तरफ, चलते-चलते वापस आया और बोला -साहब ! एक बात कहनी थी, वह कुछ दिनों से बहुत परेशान थी और कहती थी -मैं उसे छोडूंगी नहीं !

रामफल की बातों से विकास अचानक चौंक गया, यह बात तुम मुझे अब बता रहे हो। 

 पहले ही बताकर क्या हो जाता ?अब वह तो चली गई, न जाने कहां गई है ? लेकिन आप पूछ रहे थे, इसलिए मुझे ध्यान आ गया। 

वह किसको न छोड़ने की बात कह रही थी ?आँखों को सिकोड़ते हुए विकास ने पूछा। 

 यह तो मुझे नहीं मालूम ! किंतु मैं इतना जानता हूं ,साहब ! मेरी बेटी तो बहुत ही सीधी -सादी थी किंतु जब से,'' नीलिमा सक्सेना ''उन मेमसाहब के घर में रहने लगी थी ,उसके तेवर ही बदल गए थे।  किसी की सुनती ही नहीं थी ,बड़े-बड़े सपने सजाने लगी थी। अमीरों की तरह रहना चाहती थी, शायद  उसके ये  सपने ही, उसको पतन  की ओर ले गए। न जाने ,मेरी बच्ची कहां भटकती होगी ? 

अच्छा ठीक है, अब तुम जा सकते हो ! रामफल के जाने के पश्चात ,इंस्पेक्टर विकास सोच रहा था - वह तो शुरू से ही'' धीरेंद्र सक्सेना'' के घर में कार्य करती आई है और वहीं पर उसका हृदय परिवर्तन हुआ ,वहीं पर, उसके मन में, स्वार्थ पूर्ण विचारपनपे ,यह साला..... धीरेंद्र सक्सेना भी बड़ी कुत्ती चीज था। उसका कोई चरित्र ही नहीं था, अपनी पत्नी को भी धोखा दे रहा था और उस बेचारी बच्ची का भविष्य भी उसने बर्बाद कर दिया किंतु मुझे लगता है,'' नीलिमा सक्सेना ''की सम्पूर्ण कहानी ,शायद उसने  सुन ली होगी , इसीलिए तो अपने पिता से कह रही थी -मैं उसे छोडूंगी नहीं ! किंतु यहां प्रश्न  बनता है, कि वह स्वयं कहां है ? कहीं ''नीलिमा सक्सेना ''का ही तो इसमें कोई हाथ नहीं है। एक बार इस ''नीलिमा सक्सेना ''से भी मिलना होगा। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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