इंस्पेक्टर विकास खन्ना हैरान -परेशान चम्पा को चहुँ ओर ढूंढता है, किन्तु चम्पा भी न जाने ,उससे क्या खेल ,खेल रही है। एक पल को दिखती है और गायब हो जाती है। न जाने ,इतनी जल्दी कहाँ चली जाती है ?सोचते हुए जा रहा था ,तभी प्रभा की आवाज से उसका ध्यान भंग हुआ ,मिल गयी ,वो लड़की !
नहीं ,निराशा से विकास बोला - न जाने, इतनी जल्दी कहाँ खो गयी ?
अच्छा चलो ! कहीं बैठकर अच्छी सी कॉफी पीते हैं ,आपके मन को थोड़ी शांति मिलेगी।
ये शांति की बात नहीं है ,मैं सोच रहा था ,एक गरीब लड़की जो 'नीलिमा सक्सैना 'के घर में नौकरानी बनकर रह रही थी ,अचानक गायब हो जाती है। एक दिन मेरी गाड़ी के सामने आती है ,और अस्पताल से ही गायब हो जाती है ,अभी मुझे दो बार यहाँ नैनीताल में दिखी वो भी विवाहिता के रूप में, किन्तु दोनों बार दो अलग आदमियों के संग।
क्या बार कर रहे हैं ?दो आदमी !
हाँ ,उस दिन नाव में किसी लड़के के साथ थी और आज एक अधेड़ उम्र व्यक्ति के साथ थी।
हो सकता है ,उसका पिता हो या वो व्यक्ति उसके साथ ऐसे ही खड़ा हो और आपने समझ लिया उसके साथ है ,हो सकता है ,अकेली ही आई हो !
मैंने भी यही सोचा था किन्तु मैंने उसके पिता को देखा है ,और कोई अपने पिता के संग फ़िल्म देखने थोड़े ही आता है।तुम्हारे दूसरे सवाल का जबाब ,इतनी अक़्ल मुझमें है कि मैं ये समझ सकूँ ,वो इंसान उसके साथ है या नहीं ,वाह !श्रीमती जी आपने तो एक पुलिस वाले के देखने और सोचने पर ही ,प्रश्नचिह्न लगा दिया।
आप तो बुरा मान गए ,मेरे ये अंदाजे लगाने का उद्देश्य ,आपकी सहायता करना ही था कहते हुए मुस्कुराकर बोली -आपकी बातें सुनकर ,तो मुझे लगता है ,अवश्य ही ये लड़की आपके लिए एक पहेली बन गयी है। अब आप क्या करेंगे ?तब तक कॉफी भी आ गयी थी ,कॉफी पीते हुए प्रभा बोली -लीजिये !हमारे हनीमून पर भी आपकी भाग -दौड़ हो गयी ,आपको आराम नहीं मिला और अब ये लड़की !
हम पुलिसवालों के साथ तो, भागदौड़ लगी ही रहती है ,हम इस सबके आदि होते हैं ,पता नहीं ,कब ,किससे पाला पड़ जाये ?अब आगे क्या करना है ?यहाँ से जाकर उसके माता -पिता से मिलूंगा ,मुझे लगता है ,शायद वही मुझसे कुछ छिपा रहे हैं।कॉफी का सिप लेते हुए ,विकास बोला -कॉफी तो अच्छी बनी है।
अब तो प्रभा के दिमाग़ के घोड़े भी दौड़ने लगे,वो बोली -कहीं ऐसा तो नहीं ,उसकी कोई जुड़वाँ बहन हो या फिर उसकी हमशक़्ल कोई दूसरी लड़की हो।
हाँ ,मैंने भी ऐसा ही कुछ सोचा था किन्तु किसी भी बात पर निर्णय तभी लिया जा सकता है जब तक वो नहीं मिल जाती।
वापस आकर, विकास थाने में अपना चार्ज संभालता है ,प्रभा अपनी नौकरी पर जाती है किन्तु अब वह अपनी मम्मी के पास नहीं रहती है ।विकास को जो सरकारी घर मिला है ,उसमें रहती है। उसने कई बार अपनी मम्मी से कहा भी ....... मम्मी आपका अकेली का मन नहीं लगेगा ,हमारे साथ चलकर रहिये ! किन्तु उन्होंने जाने से इंकार कर दिया ,बोलीं -तुम्हारा नया -नया विवाह हुआ है ,दोनों के बीच मैं क्या करूंगी ?तुम दोनों आराम से रहो ! एक दूसरे को समय दो ,ताकि दोनों में प्रेम बढ़े और परिवार भी बढ़े ,हँसते हुए बोलीं -तब अपने बच्चों के संग अपनी मम्मी के घर गर्मियों की छुट्टियां मनाने आना।
उसमें तो अभी बहुत समय है ,तब प्रभा ने ,अपनी मम्मी को,घर में , एक किरायेदार रखने के लिए मना लिया ताकि उस घर में अकेलापन महसूस न हो।
रामफ़ल !ओ ....... रामफ़ल !बाहर आओ !
रामफल घबराते हुए बाहर आता है ,जी साहब ! क्या हुआ ?
क्या तुम्हारी बेटी का अभी कुछ पता चला या नहीं मेरा मतलब है ,उसका कोई फोन या कोई सूचना या वापस आ गयी।
नहीं, साहब !ऐसा कुछ भी नहीं हुआ ,हम तो स्वयं रात -दिन उसकी प्रतीक्षा में हैं।
यह कुछ भी ठीक से नहीं बोलेगा ,उठाओ इसे थाने ले चलो !साहब ने इसे वहीं बुलाया है ,सिपाही प्यारेलाल अपने साथी चेतराम से बोला।
साहब ! मैंने क्या किया है ?गिड़गिड़ाते हुए रामफल ने पूछा।
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