Sazishen [part 43]

आज घूमने कहाँ चलते हैं ?प्रभा ने विकास से पूछा। 

हमने बहुत सारी जगहें देख लीं ,नैनीताल ,तो बहुत सुंदर जगह है , कहीं  भी निकल  पड़ेंगे। नहाने के लिए जाते हुए विकास बोला। 

अच्छा सुनो ! मैं क्या कह रही हूँ ? क्यों न आज हम कोई नई पिक्चर देखने चलें ? यहाँ के थियेटर भी तो नहीं देखे ,उन्हें भी देख लेते हैं। 

तुम शायद भूल रही हो ,यहाँ हमारे रुकने का क्या उद्देश्य है ? हम सिनेमा हॉल में जाकर बैठ जायेंगे तो चम्पा की तलाश कैसे होगी ?


हम सारा दिन घूँमेंगे तो भी ,उससे नहीं मिल पाएंगे क्योंकि यदि वो जिस स्थान पर होगी ,वहाँ हमें पहुंचना होगा ,जो कि हमें मालूम ही नहीं है। और यदि उसको मिलना होगा ,तो हम जहाँ भी पहुंचेंगे वो मिल ही जाएगी। वैसे आपको इतना परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हमारी भी ,अपनी ज़िंदगी है। 

मैं तुम्हारी बात समझ रहा हूँ ,अरे...... ! ये क्या हो गया ?

 विकास का स्वर सुनकर प्रभा परेशान हो उठी ,उसने सोचा ,न जाने क्या हुआ ? किन्तु विकास ने कोई जबाब नहीं दिया। प्रभा  स्नानागार के समीप आकर खड़ी हो गयी और विकास से पूछने लगी ,क्या हुआ - तुम ठीक तो हो न..... कुछ बोल क्यों नहीं रहे ? बेचैन सी वहीँ खड़ी हो गयी ,तभी दरवाजा खुला और एक हाथ बाहर आया ,इससे पहले की प्रभा कुछ समझ पाती ,उसने प्रभा को अंदर खींच लिया। अरे ये क्या कर रहे हो ? कहती ही रह गयी। 

चलो !तुम्हें चलचित्र दिखाते हैं ,जिसमें अभिनेता और अभिनेत्री प्रेम से आलिंगनबद्ध होकर ,नहा रहे हैं। 

देखो !तुमने मेरे सभी कपड़े भिगो दिए ,मैं नहा चुकी  थी ,अब मुझे दुबारा कपड़े बदलने पड़ेंगे कहते हुए उसने विकास की तरफ देखा और शर्माकर नजरें झुकाकर ,उसके सीने से लिपट गयी। 

पति पुलिसवाला ,ऊपर से ''हैंडसम '' वो भी प्यार करने वाला फिर भला कौन चलचित्र जाना चाहेगा,फिर भी इठलाते हुए बोली - मुझे ठंड लग जाएगी। 

ओहो !ठंड का अब ख्याल आ रहा है ,वैसे मैडम !कोई और बहाना बनाइये ,मैंने पहले ही गीज़र चलाया हुआ है। अब तक वे शॉवर के नीचे थे किन्तु अचानक विकास ने ,प्रभा को अपने से अलग किया और स्वयं वहां से हट गया। प्रभा के सम्पूर्ण बाल पूरी तरह भीग गए ,और कपड़े बदन से चिपक गए थे। तब बोला -अब तुम्हारा नहाना पूरा हुआ तुमने सिर नहीं भिगोया था। तुम्हारी ये रेशमी जुल्फें किसी नागिन की तरह तुमसे लिपटी नजर आ रहीं हैं। उसे भीगती देख न जाने क्या अनुभूति उसे हो रही थी ?उसे देखे जा रहा था प्रभा उसकी नजरों का सामना नहीं कर पा रही थी। वह वहां से हट जाना चाहती थी किन्तु जब भी वो ऐसा करती ,वह वापस उसे  पानी के नीचे खेंच लेता। 

ये तुम्हें क्या हो रहा है ? मुझे बाहर क्यों नहीं आने दे रहे ? देखो !मुझे सर्दी लग जाएगी नाराज होते हुए प्रभा बोली। तभी विकास भी ,प्रभा के करीब गया और उसे कसकर अपनी भुजाओं में भर लिया। प्रभा को उसका ये व्यवहार समझ नहीं आ रहा था। कुछ देर इसी तरह खड़े होकर, दोनों भीगते रहे ,एक -दूजे की धड़कनों को महसूस करते रहे। मुझे कभी भी ,छोड़कर मत जाना ,मुझे कभी धोखा मत देना कहकर ,उसका चेहरा अपने हाथों में ले लिया। प्रभा के चेहरे पर पड़ी बूंदों को चूमने लगा।

 प्रभा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। तब वह बोली -हमें पानी से बाहर आना चाहिए वरना तबियत बिगड़ जाएगी।

अभी जो अरमान जगें हैं ,वो भी तो पूरे करने हैं ,कहते हुए उसने प्रभा के अधरों पर अपने अधर रख दिए और उसे निर्वस्त्र कर दिया। जब दोनों बाहर आये ,विकास के चेहरे पर मुस्कराहट थी ,प्रभा से बोला -आज मैंने महसूस किया ,''पानी में भी आग लगती है। '' 

तौलिये में  लिपटी ,प्रभा क्या कहती ?कुछ देर पश्चात बोली -मुझे लगता है ,विवाह के पश्चात ,तुम कुछ ज्यादा ही शरारती नहीं हो गए हो। 

मेरी प्रिय पत्नी जी !विवाह होता ही इसीलिए है ,कि आदमी अपनी उलझनों से हटकर कुछ देर के लिए ,शरारती बन जाये। अब मैं तो ठहरा पुलिसवाला ,फिर से वही थाना ,भागदौड़ ,चोर -उच्चके देखना। ये सौंदर्य कहाँ  दिखेगा ?कहते हुए प्रभा के करीब आया।प्रभा ने ,

प्रभा ,अपना मेकअप न खराब हो जाये ,इसलिए पीछे हटते हुए कहती है -अब चलो भी !या फिर से.... 

उसकी घबराहट देख विकास हंसने लगा,बताओ !अब कहाँ चलना है ?

जहाँ तुम ले चलो !कहते हुए उसके गालों पर अंगुली फिराकर बाहर आ गई। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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