"ऐसी भी जिंदगी ''एक ऐसी लड़की के 'संघर्ष 'की कहानी है ,जो मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर एक अलग ही दुनिया में चली जाती है ,क्या वह दुनिया उसे रास आती है ? जी हां, यह कहानी ''नीलिमा सक्सेना ''की है जिसके पिता एक अभियंता रहे हैं ,किंतु परिवार के प्रति उनका हमेशा ही कठोर रवैया रहा है। उन्होंने भी अपने जीवन में संघर्ष किया है ,एक मुकाम हासिल किया है ,किंतु उनके काले रंग के कारण उन्हें कोई भी ,अपनी लड़की देने को लिए तैयार नहीं था। तब वह ''नीलिमा सक्सेना ''की मां को, अलग ही प्रांत से लेकर आते हैं। जहां पर गरीबी के कारण, लड़कियों को कुछ पैसों के लिए बेच देते हैं। 'नीलिमा सक्सेना 'के पिता वहीं से एक ऐसी लड़की लेकर आए ,जो उनकी '' जीवन संगिनी'' बन सके किंतु इस परिवार में एक दुविधा यह भी थी। यहाँ भी ,लड़कियों का होना शुभ नहीं मानते थे। एक लड़के की चाहत में पहले ही ,दो लड़कियां हो चुकी थीं ''नीलिमा सक्सैना और उसकी बड़ी बहन'' चंद्रिका'' समय रहते ,उसका विवाह कर देते हैं किंतु जब नीलिमा सक्सेना ने 12वीं कक्षा ही उत्तीर्ण की थी। तभी उसके विवाह की बात चलने लगी। अभी वह आगे पढ़ना चाहती थी, किंतु अपने पिता के सख्त रवैया को देखते हुए वह इंकार न कर सकी।
जीवनसाथी के रूप में , उसकी ज़िंदगी में , धीरेंद्र जैसा एक अच्छा साथी नजर आया। उसने बातों ही बातों में ''नीलिमा सक्सेना'' का मन मोह लिया।' नीलिमा सक्सेना 'को उससे विवाह करने में ,कोई आपत्ति महसूस नहीं हुई बल्कि उसे लगा ,कि वह जीवन में आगे बढ़ने के लिए ,उसे प्रोत्साहित ही करेगा। उसकी लच्छेदार बातों से वह बहुत प्रभावित हुई। जो चीजें नीलिमा ने कभी अपने मायके में भी नहीं देखी थी। वह धीरेंद्र के साथ रहकर, सीख और देख रही थी। वह उम्र कम थी, किंतु एक अलग ही वातावरण उसको लुभावना लगा। हालांकि धीरेंद्र की आदत अधिक व्यय करने की थी। धीरेन्द्र ने ,अपने मन की बात उसने कभी किसी को नहीं बताई विशेषकर नीलिमा को भी नहीं बताइ। ऐसा नहीं ,कि धीरेंद्र, सिर्फ नीलिमा को ही अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करता है बल्कि उससे पहले भी उसकी एक दोस्त रही है , सच कहें तो ,वह उससे ही विवाह करना चाहता था किंतु उसने धीरेंद्र से विवाह करने से इनकार कर दिया। ऐसा क्या कारण रहा? कि दोनों में इतना प्यार था , तब भी विवाह क्यों नहीं हुआ ?
नीलिमा को लग रहा था, जैसे उसका आसमान बहुत विस्तृत हो गया है।हो भी क्यों न ? अपने परिवार में सबसे पहले ''हवाई जहाज 'की यात्रा उसने ही की। विदेश में हनीमून मनाने भी वही गई। उसके इस तरह के रहन-सहन को देखकर, रिश्तेदारों में वह ईर्ष्या का कारण भी बन गई। ससुराल में आकर ,उसे पता चला कि वह उसकी सास की पसंद नहीं है किंतु इन सब बातों से बेपरवाह वह धीरेन्द्र के रंग में रंगते हुए ,अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रही थी। उसने गाड़ी चलाना भी सीखा। वह समय के साथ चलना चाहती थी ,और अपने सपनों को एक उड़ान देना चाहती थी। किंतु उसे परिवार से अलग कर दिया गया , जिस कोठी के कारण उसके पिता ने नीलिमा का विवाह किया था। वह कोठी भी उससे छिन गई ? उसके जीवन में अनेक परेशानियां बढ़ गईं किंतु उन पर उसने कभी ध्यान ही नहीं दिया। जब उसे पता चला ,धीरेन्द्र उससे दस -पंद्रह वर्ष बड़ा है ,तब भी उसके मन में कोई ऐसा विचार नहीं आया।
धीरेंद्र के संपर्क में रहकर उसने बहुत सी चीजें सीखीं, जो लड़की घर से , पैदल स्कूल के लिए निकलती थी उसके पास एक साइकिल भी नहीं थी आज वह हवाई जहाज की यात्रा करती है। फोन पर ,स्वयं ही टिकट बुक कर लेती है। उसके पहनावे में भी बहुत अंतर आया है। अब वह सूट सलवार की जगह, डिजाइनर ड्रेस पहनती है, जींस पहनती है। धीरे-धीरे इंग्लिश बोलना भी सीख गई। ऐसी हालत में उसका रहन-सहन बहुत ही बदल गया। उसके दो बेटियां हुई किंतु उसे, यहां आकर, पता चला। कि धीरेंद्र चाहे कितना भी आधुनिक हो जाये किन्तु उसकी सोच भी उसके पिता की तरह ही है। जैसे उन्हें लड़कियां पसंद नहीं थीं धीरेन्द्र को भी बेटियों की चाहत नहीं है। ये लोग पढ़े -लिखे हैं किन्तु सोच वही संकीर्ण !इसे भी एक बेटे की चाहत है। उसके बेटा भी होता है किंतु वह बेटा एक ऐसी बीमारी लेकर पैदा हुआ। जिसके कारण मानसिक रूप से धीरेंद्र अत्यंत परेशान रहने लगा। उसे यह बर्दाश्त ही नहीं हुआ कि उसका इकलौता बेटा ऐसी स्थिति में रहे।
तब उसके संपर्क में, एक पूजा नाम की लड़की आती है , जो उसी के घर में नौकरानी का कार्य करती है , किंतु नीलिमा को उनके इरादे कुछ अच्छे नहीं लगे। एक बार वह बिना बताए घर छोड़कर भी चली जाती है किंतु वापस भी आ जाती है, वह घर छोड़कर क्यों जाती है, और वापस क्यों आती है इस बात की। किसी को जानकारी नहीं थी? तब उसने '' नीलिमा से एक और बेटे की चाहत की किंतु नीलिमा ने इस बात से इनकार कर दिया क्योंकि वह चाहती थी, यदि और बेटा या बेटी हो जाते हैं, तो इस बच्चे पर ध्यान नहीं दिया जाएगा वह अपने बेटे की अच्छी परवरिश के लिए ,अन्य कोई भी संतान के लिए तैयार नहीं होती। इस बात की भी कोई गारंटी नहीं की अगली बार लड़का ही होगा उसने धीरेंद्र को समझाना चाहा किंतु धीरेंद्र समझना ही नहीं चाहता था।
एक दिन अचानक ही धीरेंद्र अपने, घर अपने मम्मी -पापा से मिलने गया किंतु वापस न लौटा। कोई कह रहा था -उसने आत्महत्या की है ,तो कोई कह रहा था -कि वह बेटे के कारण परेशान था किंतु एक शख्स ऐसा था जिसे लगता था कि उसने आत्महत्या नहीं की वरन उसकी हत्या हुई है। धीरेंद्र सक्सेना की मृत्यु के पश्चात ,नीलिमा सक्सेना ने बहुत कष्ट सहे। तब उसने जिंदगी के ''कठोर धरातल '' का एहसास किया। उसे पता चला कि बिना पति ,इस सभ्य समाज में एक महिला की स्थिती क्या है ?किन्तु उसने हार नहीं मानी और शराफ़त के भेष में उन इंसानी भेड़ियों से लड़ी और जीती भी....... धीरे-धीरे वह मीडिया में एक नाम बन गई। ऐसा उसने क्या किया ? जो लोग उसे जानने लगे। आखिर धीरेंद्र सक्सेना की हत्या हुई थी या उसने आत्महत्या की थी यह एक सवाल बन गया ??और उसकी हत्या हुई भी है, तो किसने की है ? इंस्पेक्टर विकास खन्ना के लिए यह एक पेचीदा केस बन गया। इंस्पेक्टर विकास खन्ना उस पहेली को सुलझाने का प्रयास करता है , जो एक अनजान फोन उसके पास आता है और धीरेंद्र सक्सेना के हत्यारे को सजा देने के लिए उसे प्रोत्साहित करता है।
आखिर नीलिमा सक्सेना ने ऐसा क्या किया? जो उसके परिवार की उन्नति भी हुई, और वह एक प्रसिद्ध महिला बनकर सशक्त महिला बनकर उभर कर आई। आखिर धीरेंद्र सक्सेना की, हत्या का कारण क्या उसका बेटा ही था या फिर कोई और रहस्य था, जो उसकी हत्या का कारण बन गया।यह रचना ''साज़िशें ''से पहले'' ऐसी भी ज़िंदगी की है ''उसका दूसरा भाग ''साज़िशें ''भी पढ़िए -यह जानने के लिए आखिर इंस्पेक्टर विकास खन्ना और प्रभा की ज़िंदगी में क्या चल रहा है ?ऐसा क्या हुआ ?जो चंपकलाल ने ''अनाथआश्रम ''खोला। क्या कोई ऐसा शख्स है ? जो नीलिमा की ऊंचाइयों से जलता है ,या फिर बदले की भावना से उसके विरुद्ध रच रहा है -''साज़िशें ''क्या वो सफल होगा ,आख़िर वो कौन है ?
