Pichhla janma

हम कौन थे, क्या थे ? कि किसने जाना , 'पिछला जन्म 'किसने देखा ? हो सकता है ,उसमें भी हम अपने उससे पिछले , कर्मों का हिसाब -किताब कर रहे हों। ऐसा क्या बुरा किया ? जो पिछले जन्म में भी पूरा ना हुआ। इस जन्म में कर रहे हैं , पिछले जन्म को किसने देखा ? अच्छे कर्म भी किए हों, तो कौन जानता है ? क्या कोई आज तक किसी को खुश रख पाया है ? इस जन्म में भी कहां रख पाता है ?जब दुखी होता है परेशान होता है, तब ''पिछले जन्म ''को रोता है, कि कोई बुरा कर्म किया होगा। भविष्य के लिए ,अच्छा करना है, भविष्य [आने वाला जन्म ]किसने देखा ?जब वर्तमान ही ठीक नहीं है। वर्तमान में तरस रहे हैं, भटक रहे हैं। क्या यह पिछले जन्मों के कर्मों का फ़ल है, जो इस जन्म में कर रहे हैं। इस तरह तो यह यात्रा कभी पूर्ण नहीं होगी। भविष्य के लिए चिंतित रहेंगे, और भूत को रोते रहेंगे। वर्तमान कभी सुखमय नहीं हो पाएगा। 


किसी की नजर में ,अच्छे कर्म और बुरे कर्म में क्या फर्क है ? हो सकता है, जो तुम अच्छा सोचकर कर रहे हो ,दूसरे के लिए बुरा हो। इसकी कोई परिभाषा नहीं ,न ही कोई मापदंड है। तब हम कैसे कह सकते हैं? कि हमारा कर्म अच्छा था या बुरा क्योंकि यदि बुरा है, उसका परिणाम तुरंत ही मिल जाता है ,यदि चोरी की है, हत्या की है, या कोई भी बुरा कर्म किया होता है ,उसका परिणाम, वर्तमान में ही मिल जाता है। फिर वह आगे आने वाले भविष्य में ,उसका उधार कहां रहा ? फिर हम कौन सा हिसाब -किताब पूरा कर रहे  हैं ? कोई अधूरी इच्छा पूर्ण कर रहे हैं ,यह हम कैसे कह सकते हैं ?अभी भी हम ,न जाने कितनी इच्छाएं लिए घूमते हैं ? उनका हिसाब -किताब कब  पूर्ण होगा ?

लोगों को कहते सुना है -कि भूत की चिंता छोड़ दो !और वर्तमान में जिओ ! भविष्य को मत देखो !वर्तमान सही है, तो सब सही है। ''तो फिर क्या अगला जन्म और क्या ''पिछला जन्म।'' पिछला हमने देखा नहीं, वर्तमान अच्छा जा रहा है या बुरा यह भी हम पर निर्भर नहीं करता ,यह भी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अपने लिए तो हर इंसान अच्छा ही सोचता है। तब क्यों कहा जाता है ?'' कि इस जन्म के कर्म, इंसान इस जन्म में ही भोगकर जाता है।'' तब वह कौन से जन्म की बात करता है ? आने वाले जन्म की , या फिर पिछले बीते हुए जन्म की। सब कल्पना मात्र है, जो कुछ है ,अभी है ,वर्तमान में है। वह उसको रोकर जी रहा है ,या  हंसकर, प्रयास तो यही रहेगा ,कि वह  हंसी - खुशी से रहे, तो क्या दुनिया उसे खुश होने देती है ? परिस्थितियाँ उसे हंसने देती हैं। पिछले जन्म के कर्म अब भोग रहा है या ''पिछले जन्मों ''का हिसाब -किताब ही कर रहा है ,तब इस जन्म में फिर वह कैसे अच्छे कर्म कर सकता है ?

मान लीजिये ,यदि वह पिछले कर्मों के आधार पर ,गरीबी में पैदा हुआ है ,यह जन्म उसे ''पिछले जन्म ''के आधार पर मिला। अब गरीबी में उससे ,कोई कार्य कैसे अच्छा हो सकता है ? अपने को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत भी करेगा ,झूठ भी बोलेगा ,कई बार चोरी भी कर सकता है। उसकी नजर हमेशा पैसे पर रहेगी। जिसे आगे बढ़ने की ललक होगी ,तब वह' साम ,दाम ,दंड ,भेद 'कुछ भी अपनाएगा या तो फिर वह सन्यासी हो जाए ,या दुनिया की परवाह ही ना करें ,जो उसे करना है कर डाले। तब आने वाले जन्म के लिए उसे फिर से तैयार रहना होगा क्योंकि इस जन्म में भी उसका 'प्रदर्शन 'कुछ खास नहीं रहा। 

एक व्यक्ति ठंड में गर्मी में अपना कर्म कर रहा है ,उसने ऐसा क्या बुरा कर्म किया ?''पिछले जन्म ''में या फिर इसी जन्म का कर्म भोग रहा है। जब पढ़ने की उम्र थी ,ठीक से अध्ययन नहीं किया। गरीब घर में उसका जन्म हुआ ,क्या ये उसकी गलती थी ?उसके किस कर्म के कारण ,धोखेबाज रिश्तेदार निकले ?हो सकता है ,ये पिछले जन्म के साथी हों। इसका अर्थ तो यही हुआ ,पिछले जन्म में भी अच्छा नहीं हुआ और अभी भी अच्छा होने देना नहीं चाहते। 

कहते हैं गरीबों में ईश्वर का वास है, एक इंसान चोरी करता है और गरीबों की सेवा भी करता है, या चोरी का माल गरीबों में बांट देता है तो क्या उसकी चोरी ,चोरी नहीं कहलाएगी ?एक तरफ अच्छा कर्म कर रहा है और वह किसके लिए गरीबों के लिए , दूसरी तरफ 'सेवा भाव 'भी है। तब वह, कौन से कर्म का फल भोगेगा ? दिनभर, व्यक्ति झूठ बोलता है, चोरी करता है, कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है, न चाहते हुए भी ,उसे वह कार्य करना होता है।'' गरीब में यदि ईश्वर का वास है , ईश्वर गरीब के साथ है। तब गरीब, मजदूरी के लिए भीख मांगने के लिए, किसी के आगे गिड़गिड़ाने के लिए मजबूर क्यों है ? क्यों नहीं अपने इस ईश्वर से मांगता है। ईश्वर स्वयं आकर उसकी सहायता क्यों नहीं करता है ? क्यों उसे दूसरे के सामने हाथ फैलाना पड़ता है ,'गरीब प्रिय है,' फिर भी कष्ट भोग रहा है। इस जन्म के कष्ट, काटकर क्या उसका 'अगला जन्म' सुनिश्चित हो जाएगा ? क्या भविष्य किसी ने देखा है ? और यदि वह गरीब इंसान अपने कर्म भोगने यहां आया है? तो फिर उसकी सहायता क्यों ? जो भोग उसे भोगना है ,वह तो भोगेगा ही। 

यदि कोई राजा है ,तो क्या उसे कष्ट नहीं होता , कई बार राजा की स्थिति, गरीबों से भी ज्यादा दयनीय हो जाती है। रात -दिन मौत का खतरा, मंडराता रहता है। तब वह राजा होकर भी क्यों कष्ट झेल रहा है ? क्या यह उपाधि उसे सिर्फ मन बहलाने के लिए मिली है। मानव दिन में न जाने, कितने कार्य करता है ?अच्छे भी होते हैं और बुरे भी, तो उन कर्मों का लेखा-जोखा क्या मंदिर -मस्जिद या चर्च में जाने से पूर्ण हो जाता है ? दिन भर में इतने भार अपने ऊपर चढ़ा लेता है उसके पश्चात, क्या एक लोटा जल से ,उसकी शुद्धि हो जाती है ? या भविष्य के लिए, अपने को तैयार करने का प्रयास करता है। इस आधार पर देखा जाये तो ,इंसान की मुक्ति इतनी आसान नहीं ,ये मृत्यु का चक्र भी यूँ ही चलता रहेगा। जब इस संसार में आया है ,तो बिना कर्म किये तो उसे कुछ मिलनेवाला नहीं। कर्म करेगा तो परिणाम भी मिलेगा ,जब कष्ट ही झेलना है तो क्या ''पिछले जन्म  ''या ''अगला जन्म ''ये सिर्फ मन को बहलाने और समय बिताने की बातें नजर आती हैं। इससे ये ''मानव जीवन ''कट जाता है। यह बहुत ही विस्तृत विषय है ,अब इतना ही...... अपने सुझाव द्वारा समझाइये। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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