मेरी दुनिया -
मैं अपनी दुनिया में रमता रहा,
अपने आप को, खोजता रहा।
सतरंगी सपनों में खोया रहा।
मेरी दुनिया का अस्तित्व,अलग रहा।
मेरी एक न्यारी सी दुनिया, प्यार भरी,
मेरे अस्तित्व को भिगो ,ले आती है।
जो मेरे हृदय तल में अथाह गहराई में,
मुझे डुबो..... ,सराबोर कर जाती है।
रहता हूं ,इस जहां में ,कैसा यह दस्तूर है ?
मेरी दुनिया अलग ही,जीता हूँ जिसमें मैं।
रमण करता हूं, अपने सपने ,विचारों संग ,
ना कोई छल है ,विस्तृत विशाल गगन है।
मेरी अनुभूतियां , मेरे संग कलम हैं।
न बंधन न कोई पास,है कुछ ख़ास !
जीवन का एक सुकून भरा एहसास !
ऐसा वह मेरा , प्रेम भरा गगन है।
उस दुनिया के सखा ,मेरे अपने,
सिर्फ ज्ञान का विस्तृत भंडार है,
जहाँ प्रेम अद्भुत और अपार है।
छलक आये अश्रु भी, वहां प्रेम अपार है।
