Meri duniya

 मेरी दुनिया -

मैं अपनी दुनिया में रमता रहा,

अपने आप को, खोजता रहा। 

सतरंगी सपनों में खोया रहा। 

मेरी दुनिया का अस्तित्व,अलग रहा। 



मेरी एक न्यारी सी दुनिया, प्यार भरी,

 मेरे अस्तित्व को भिगो ,ले आती है। 

जो मेरे हृदय तल में अथाह गहराई में,

मुझे डुबो.....  ,सराबोर कर जाती है। 


रहता हूं ,इस जहां में ,कैसा यह दस्तूर है ?

मेरी दुनिया अलग ही,जीता हूँ जिसमें मैं।

रमण करता हूं, अपने सपने ,विचारों संग ,

ना कोई छल है ,विस्तृत विशाल गगन है। 


मेरी अनुभूतियां , मेरे संग कलम हैं। 

न  बंधन न कोई पास,है कुछ ख़ास !

जीवन का एक सुकून भरा एहसास !

ऐसा वह मेरा , प्रेम भरा गगन  है। 


उस दुनिया के सखा ,मेरे अपने,

सिर्फ ज्ञान का विस्तृत भंडार है, 

जहाँ प्रेम अद्भुत और अपार है। 

छलक आये अश्रु भी, वहां प्रेम अपार है।

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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