Apani apani duniya

सही कहा, सबकी ''अपनी-अपनी दुनिया ''होती है ,सभी की अपनी अलग सोच होती है, एक ऐसी दुनिया जिसमें वह शांत, मग्न होकर ठहर  जाना चाहता है, उस दुनिया में खो जाना चाहता है। इस दुनिया में रहकर भी उस दुनिया का होकर रह जाना चाहता है। यह दुनिया उसके सपनों की ,कल्पनाओं की ,अलग ही दुनिया होती है। यह दुनिया रंगीन भी हो सकती है और यह वैराग्य की तरफ भी ले जा सकती है। जहाँ अनंत शांति है। यह तो उसकी सोच पर ,उसके विचारों पर ही निर्भर करता है कि वह कैसी दुनिया में व्यस्त रहना चाहता है ? किसी -किसी की  दुनिया, प्यार की दुनिया होती है , वह प्यार की दुनिया में खोया रहता है। हर जगह उसे प्यार ही प्यार नजर आता है, ख्वाबों में ख्यालों में , अपनी संगिनी संग ,वह गगन तक विचरण कर आता है। चांद में घूम आता है, अपनी महबूबा के लिए तारे तोड़ कर ले आता है। यह उसकी 'प्यार की दुनिया' है जो उसे इस दुनिया से अलग कर एक अलग ही संतोष प्रदान करती है। 


इसी तरह एक कलाकार की दुनिया कला के रंगों में होती है , वह उन रंगों में , उन सप्तरंगी रंगों में खो  जाना चाहता है। अपने आप को ढूंढता है ,तलाशता है, अपनी एक अलग ही रंगीन दुनिया ! कल्पनाओं की सपनों की दुनिया ! अब उसे दुनिया में ,यह उस पर निर्भर करता है कि वह किसे  ले जाना चाहता है ? किसे उसे दुनिया का राजदार बनाना चाहता है ?

इसी तरह से, वह उस दुनिया में न जाने कितनी दुनिया जी जाता है ?कितना जीवन जी  जाता है ,उसे स्वयं ही नहीं पता चल पाता है। यह भी उसके विचारों की , सपनों की ,कल्पनाओं की  एक अलग ही दुनिया होती है ,जिसमें वह तल्लीन रहता है और आनंद का अनुभव करता है। इससे उसे सुखानुभूति मिलती है, ऐसी सुखानुभूति उसे अन्य लोगों से, विशिष्ट बना देती है। वह अपनी उस दुनिया में ,नए जीवन का विस्तार करता है ,अनंत तक घूमता है, धरा पर विचरण करता है किंतु गगन को चूम लेता है। उसकी दुनिया उसके अस्तित्व से कहीं अधिक बड़ी होती है। और वह उस दुनिया में रमा रहता है ,रमा रह जाना भी चाहता है। जिसमें उसे सुकून का अनुभव होता है। 

एक ग्रहणी अपने उस जीवन में ,एक परिवार का विस्तार देखती  है , उसमें इतनी क्षमता आ जाती है कि वह उस परिवार का भविष्य भी आँकने लगती है। और उस परिवार को सुदृढ़ और  सुंदर भविष्य को बनाने के लिए , अपनी एक अलग ही दुनिया बसा लेती है, जिसमें उसका अपना परिवार होता है ,उसके अपने सपने होते हैं। उन्हीं में वह अपनी संपूर्ण दुनिया को जी लेती है। इसी तरीके से एक राजनेता की दुनिया अलग होती है ,एक नृत्यकार ,या फिर अदाकारा की दुनिया अलग होती है। वे सभी  अपनी अपनी दुनिया में अपनी रुचि के अनुसार टहलते हैं ,विचरण करते हैं और सुखानंद लेते हैं।

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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