Homepoem Jeet or haar bylaxmi -June 07, 2024 0 जीत और हार ! सही है, जीत ,पहनाती हार है। वह फूलों का है , या फिर रिश्तों से हार है। जीतकर भी, हार जाते कभी,हार सिखलाती कुछ बात है। भले ही ,गले में हार है। जीत का यह अंजाम है। दोनों पहलू जीते हम ! हार में भी, हार है। और जीत में भी हार है। Tags: poem Facebook Twitter