बालपन की वो सखियां !
बीत रहीं होगी न जाने, किस अंगना में उनकी रतियाँ !
शोभा होगीं , न जाने किस घर की ?
महकाती होंगी ,उनकी बगिया।
चहकती होंगी चिरैया !अपने बाबुल की ,
न जाने ,अब किस गलियन में ?
करती होगीं , क्या याद ?अपने बालपन की वो सखियां !
कोई जिंदगी से जूझती होगी ,
कोई लड़ती होगी ,भर आते जब नेत्र अखियन से ,
कोई देखती होगी, दिवा स्वप्न ! मिलाती ताल जीवन से,
कोई होगी , पिया की प्यारी ,होगी,उसके बच्चों की महतारी।
किसी के बंगला ,किसी के गाड़ी सब होगा,
पर अपनों का ,दीखता कहीं न प्यार होगा।
अपने-अपने अंगना की चिरैया ,
बन अपने घर की पुरवइया, इठलाती होगीं, अंगना में ,
बचपन की वो सखियां ! याद आती आज भी वो प्यारी बतियाँ !
