Heeron ka haar

हीरों  की चमक ,सभी को लुभाती। 

नारी को इसकी चमक, दीवाना बनाती। 

हीरा तपता है ,कटता है, तब निखरता है। 

उसका वही दर्द उसकी कीमत बढ़ाता है। 



हीरा मिलता ,कोयले की खान में,

 खिलता है, कमल भी , कीचड़ में,

दोनों की पैदाइश ,  निम्न स्तर में ,

निखरकर आते ,अपने स्वरूप में।


रास आती नहीं ,सभी को उसकी संगत।

 मूल्य, उड़ा देगी, तुम्हारे चेहरे की रंगत। 

उसकी चमक में न खो जाना ,इस कदर,

किसी की राशि के लिए नहीं, ये तर्कसंगत। 


निखरो !तुम भी तपो ! इस जीवन में,

हीरे से तुम भी कम नहीं, चमको !इस जहां में,

भूलो ! न कभी यह बात ,तुममें भी है ,हीरे सी बात। 

जोेहरी तुम्हें पहचान ही लेगा, रहो !चाहे किसी खान में। 


कभी चाहत न रही, हीरों के हार की,

जरूरत क्या हीरे को, हीरों  के हार की। 

लुभाती बहुत बातें ,लोगों को संसार की। 

तमन्ना नहीं  कोई, जब कीमत ही नहीं जानी यार ने अपने यार की। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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