ये दुनिया कितनी विशाल है ?इसमें एक से एक अद्भुत नजारे देखने को मिलेंगे। ईश्वर ने न जाने क्या सोचकर यह दुनिया बनाई। दुनिया बनाई तो बनाई ,किन्तु उससे अद्भुत ,मानव बनाया। जो सोचता है ,कार्य करता है ,सुनता है,उसकी अपनी भावनाएं हैं जिन्हे व्यक्त करता है। और ईश्वर की बनाई इस दुनिया की पहेलियों को सुलझाने का प्रयास करता है। इंसान भूल जाता है कि वो कोई परिंदा नहीं ,जो उड़ सके और कहीं भी पहुंच जाये किन्तु मानव की इच्छा शक्ति तो देखिये !वो भी न...... घोड़ो से,या हाथी द्वारा इधर -उधर चला जाता था किन्तु तब भी उसने न जाने कितने अविष्कार कर डाले और वो ईश्वर प्रदत्त पहेलियों को सुलझाने में कोई कसर नहीं छोड़ता। बल्कि उसका निश्चय और दृढ़ हो जाता है। कभी -कभी तो लगता है ,इंसान को परखने के लिए ही ,ईश्वर ने ऐसी दुनिया की संरचना की। ताकि उसकी इच्छा शक्ति बढ़े और वो नवीन -नवीन रहस्यों को खोजने का प्रयास करे।
''कैलाश पर्वत ''एक रहस्य बना हुआ है ?आमजन तो वहाँ ,आजतक कोई पहुंचा ही नहीं। ऐसी गुफाएं हैं ,जिनकी लोगों ने खोज की भी है ,और बहुत सी गुफाएं तो आज भी रहस्य बनी हुई हैं। पता ही नहीं चलेगा ,किस गुफा में मौत बैठी है ?ये भी है ,भगवान ने इंसान के लिए कुछ सीमाएं भी बना दी है ,वरना वो तो ईश्वर के अस्तित्व पर ही सवाल उठ देता। जिन गुफाओं की जानकारी है ,वे अद्भुत ,अद्वितीय हैं। कला और सौंदर्य का कोई सानी नहीं। लोग उन्हें देखने ,दर्शन करने जाते भी रहते हैं।
किन्तु आज मैं एक ऐसी गुफा से परिचय करा रही हूँ। जिसे सब जानते हैं ,महसूस भी करते हैं।जिससे इंसान की उत्तपत्ति होती है। न जाने ,नौ माह तक मानव का वो भ्रूण न जाने कैसे रहता है ?बल्कि ये कहिये उसमें कैद होकर रह जाता है और उस जीव का उस गुफा से बाहर आने का समय भी निश्चित है। इसमें कितने आश्चर्य की बात है ?जो माँ खाती है ,वही उसके तन को लगता है। इस बात को जानते सभी हैं ,किन्तु यह भी कितने आश्चर्य की बात है ?मानव उत्तपत्ति एक नारी के माध्यम से तय है। 'कोख ''नामक ऐसी गुफा है ,उसका रहस्य आश्चर्यचकित कर देने वाला है। कैसे उस बालक का उसमें निर्माण होता है। जैसे आवा पकता है ,कहते है ,उसी प्रकार उस नारी के अंदर भी उसकी गर्माहट में वो शिशु पलता है ,बढ़ता ,बनता है और तीन माह के पश्चात ,उस मांस के लोथड़े में न जाने कहाँ से ,जान पड़ जाती है ?वही जान जिससे इंसान चलता -बोलता ,महसूस करता है ,यदि वह न हो तो वो एक बेजान पुतला बनकर रह जाये। मौत भी इसका एक उदाहरण है। जब ईश्वर समय पूर्ण होने पर उस जान को वापस ले लेता है। एक मानव तन में ,दूसरा मानव जन्म लेता है ,स्वाँसे लेता है। यह अनुभूति उस नारी को होती है ,जो उसकी जननी बनने वाली होती है। उसके अंदर खेलता है ,लात मारता है और कभी आड़ा -तिरछा हो जाता है।
अब तो वैसे बहुत आधुनिक मशीनें आ गयीं और उस भ्रूण की पल -पल की खबर औरउसके लिंग की जानकारी भी हो जाती है किन्तु कभी प्रभु की इस गुफा के विषय में किसी ने सोचा भी होगा कि कैसे मानव जीवन की उत्तपत्ति होती होगी ? इंसान कितनी भी उन्नति कर ले ?किन्तु उसे चुनौती नहीं दे सकता। हालाँकि इस पर भी लोग प्रयासरत हैं। सुनने में तो आया है ,अब जापान में नकली बच्चे बन रहे हैं। देखने में हूबहू इंसान के बच्चे जैसे ,दिखते हैं ,किन्तु उनकी त्वचा इतनी लचीली है कि उसे कितना भी रबर की तरह खींचों और पुनः वहीं आ जाती है। ''रोबोट ''भी ऐसा ही एक प्रयास है।
कुल मिलाकर इतना ही कह सकते हैं, कि ईश्वर ने एक से एक अद्भुत और नायब चीजें बनाई हैं । जिसका कोई सानी नहीं है। मानव, समय-समय पर ईश्वर को चुनौती देने का प्रयास तो करता है किंतु उसकी बराबरी कभी नहीं कर पाएगा। यह मानव भी तो उसी का बनाया हुआ है, जो हिम्मत हारना नहीं जानता , वह भी प्रयासरत रहेगा। उसकी बनाई सृष्टि में एक से एक अद्भुत नजारे हैं। गुफाएं ही नहीं, न जाने कितने दैविक रहस्य ,हमारे मंदिरों में ,जल और थल में भरे पड़े हैं।
