टप !से एक बूंद ने.......
मन को ,हर्षित किया।
टप -टप की झड़ी लगी।
जब धरा के तन को छुआ।
इठलाई ,कुंभलाई सी धरा......
गगन ने ,कैसा मदहोश किया ?
तप्त धरा ,को गगन ने.......
अमृत से भिगो ,सराबोर किया।
नहाई प्रकृति ,पवन आंचल ओढ़ ,
आज प्रकृति ने ,अद्भुत श्रंगार किया।
सब कुछ धुला -धुला सा स्वच्छ निर्मल !
बरसात के उन बुलबुलों ने,
कोमलता से धरा का श्रृंगार किया।
नवजीवन पा...... धरा पर,
कोयल औ बुलबुलों ने गुणगान किया।
'आम्र मंजरी ',महकी है ,
बुलबुलों ने ताल मिला ,जल के बुलबुलों का आभार किया।
