तुम भी न आते ही, क्या बातें लेकर बैठ गयीं ,न ही ,चैन से जीना चाहती हो ,न ही, जीने देती हो ,आखिर ऐश्वर्या की बातों से परेशान होकर प्रवीण ने उससे कह ही दिया। उसके झुंझलाहट भरे ये शब्द सुनकर ,ऐश्वर्या एकदम से चुप हो गयी। दिल तो किया, इससे बहुत कुछ कहे -कि तुमने मुझसे विवाह करके मुझे कौन सा सुख दिया ? सिवाय मानसिक और शारीरिक परेशानी के ,और जीवन में ,असुरक्षा की भावना। न ही स्वयं कुछ करने का प्रयास करते हैं ,न ही मुझे कुछ करने दिया। यदि इसे ही प्यार का अंजाम कहते हैं ,तो मैं ,ईश्वर से प्रार्थना करूंगी ,ऐसा प्रेम किसी को न मिले ,कम से कम यही अफसोस रहेगा कि हम मिल न सके। हमारे विवाह को ,छठी साल लग रही है ,किन्तु अभी भी सुरक्षा की भावना महसूस नहीं होती। ये तो बाहर घूमने चला जाता है ,सारा दिन मुझे ही तो करना और झेलना पड़ता है। इसे तनिक भी एहसास नहीं होता ,मेरी भी कुछ इच्छाएं होंगी ,मेरे भी कुछ अरमान होंगे। कम से कम जीवन भर की 'तड़प 'तो न होगी। मिलकर भी ,आज तक हमने एक- दूजे को जाना नहीं, समझे नहीं ,ऐसे मिलाप से क्या लाभ ?
ऐश्वर्या को शांत देखकर, प्रवीण और परेशान हो उठा , तुम भी ना बेवजह की बातें सोचती रहती हो , कभी सुकून से जी लिया करो ! क्या हो गया? जो पैसा मैंने कमाया है , उसे मां को दे दिया तो क्या हुआ ? उनका भी अधिकार बनता है , आखिर मां हैं, जो कुछ भी करेंगीं , हमारे लिए ही तो करेंगी।
कब तक आप इस तरह उन पर निर्भर रहेंगे , कब तक अपनी जिम्मेदारियां को नहीं समझेंगे ? कल को दूसरी भी आ जाएगी, जब आप कुछ नहीं करते हैं तो वह यह नहीं कहेगी कि आपका दिया पैसा उसके विवाह में लगा था बल्कि यह कहेगी -कि यह लोग बैठकर खा रहे हैं। सहायता ही करनी थी, तो कमाते और तब पैसा देते। एक उम्मीद बनी थी, वह भी तुमने तोड़ दी। कभी सोचा है, इन बच्चों का क्या होगा ? यह तो घूम रही है, अभी छोटे स्कूल में जाती है किंतु जो यह आने वाला है। इसके खर्चे कैसे होंगे ? आगे परिवार बढ़ता है तो खर्च भी बढ़ते हैं , ऐश्वर्या गंभीरता से अपनी परेशानी में बोले जा रही थी।
ऐश्वर्या के शब्दों को सुनकर अचानक से प्रवीण चौक गया और बोला -अभी अभी तुमने क्या बोला ?
यही, कि खर्च कैसे पूरे होंगे ?
नहीं- नहीं ,उससे पहले......
बच्चों की जिम्मेदारियां कैसे पूर्ण होगी ?
यानी कि तुम दोबारा से मां बनने वाली हो , यह बात तुमने अभी तक मुझे क्यों नहीं बताई ?
बताने का समय ही कहां मिला ?और बताकर भी क्या हो जाता ?मन ही मन बुदबुदाई। पहले तो मैं परिवार के इन बदले हुए चेहरों को देखकर हैरान परेशान रह गई , अब तुम्हारी बातें सुनकर, परेशान हो गई। मैं खुद ही नहीं समझ पाई, कि मेरे लिए खुशखबरी है या दुख की खबर है। कैसे बताऊं ? बहुत पहले,बता देना चाहती थी , तुम्हारे काम की बात सुनकर उत्साहित भी थी, किंतु अब सब सारा उत्साह ठंडा पड़ गया।
तुम व्यर्थ की बातें मत सोचो ! न ही ,परेशान होने की आवश्यकता है, मैं सब संभाल लूंगा , कितने दिन हुए ?
दूसरा महीना चल रहा है ,सुनकर प्रवीण प्रसन्न होता है और कहता है -क्यों परेशान होती हो ?स्वयं भी प्रसन्न रहा करो ,और मुझे भी रहने दिया करो !
ऐसे में ,ऐश्वर्या उससे क्या कहे ? जब वो समझना ही नहीं चाहता।
घर में ,नई बहु के लिए जेवर खरीदे जा रहा थे ,कपड़े इत्यादि ,ऐश्वर्या का कार्य घर के कार्य निपटाना था और सास अपनी सहेली को ले बाहर घूमती और खरीददारी करती । एक बार भी ऐश्वर्या से नहीं पूछा -अपने देवर की शादी में तुझे भी कुछ चाहिए या नहीं। ऐश्वर्या सिर्फ महसूस करती किन्तु अब उसने प्रवीण से भी कहना छोड़ दिया। जब उसे मेरी बात न ही माननी है ,न ही ,मेरा कहा कुछ करना है।विवाह की तैयारी जोरों पर थीं ,ऐसे में उसे यह बताने का समय भी नहीं मिला कि देर तक खड़े रहने के कारण ,अब उसके पैर सूज जाते हैं। चंदा देवी को बताने से पहले तो प्रवीण ने ही इंकार कर दिया था ,बोला -मम्मी ,अभी विवाह के कार्यों में व्यस्त हैं ,बाद में ,बता देंगे। किन्तु जब ऐश्वर्या के पैर सूजे हुए देखे तो ,उसने स्वयं ही,बताने का प्रयास किया।
नई बहु को कितनी साड़ियां चढ़ानी हैं ?उसके शृंगार का सामान सबकी तैयारी कर रहीं थीं किन्तु ऐश्वर्या को न ही दिखाईं और न ही उसे कुछ बताया। प्रवीण चंदा देवी के पास गया और बोला -मम्मी !आपको पता है।
मुझे क्या पता करना है ?
वो ही तो ,कह रहा हूँ ,ऐश्वर्या के पैर सूज रहे हैं।
क्यों सूज रहे हैं ?
काम की अधिकता से........
उसके इतना कहते ही ,वो बुरी तरह बिफ़र गयीं और बोलीं -वो ऐसा क्या नया कर रही है ? दुनिया की बहुएं ऐसा ही करती हैं। तू ,उसका ज़्यादा हिमायती हो रहा है। मुझे लगता है ,उसने अपने नाटक दिखाकर तेरी बुद्धि खराब कर दी।मैंने कितनी बार समझाया ?इसके बहकाये में मत आना। ये घर ही तोड़ती हैं।
ऐसा कुछ भी नहीं है ,पहले आप मेरी पूरी बात तो सुन लीजिये ,वो'' गर्भवती ''है।
उसकी बात सुनकर वो एकदम से चुप हो गयीं ,कुछ सोचते हुए बोलीं - देख ले !कितनी हरामजादी है ?तेरे कान भर दिए किन्तु हमसे तो एक बार भी नहीं बताया कि ' वो पेट से है। ''
मम्मी आप भी न..... बेवज़ह परेशान हो रही हैं, मैंने ही उससे मना किया था, क्यों मम्मी को परेशान करती हो ? अभी वह विवाह के कार्यों में व्यस्त हैं। बाद में आराम से बता देंगे , इतने कार्यों में हाथ बटाने के लिए छोटी भी आ जाएगी।
हां ,वह क्या आते ही काम में लग जाएगी, चंदा देवी तो तुनककर बोलीं। तू भी अब उसी की भाषा बोलने लगा है। मुझे मत चला, मैंने दुनिया देखी है ,यह तेरे सामने ड्रामा करती है।
इसमें ड्रामा कैसा ? उसने अपने पैरों में सूजन क्या स्वयं ही बना ली ?
चंदा देवी को बहू के पर भारी होने की खुशी तो हुई नहीं , बल्कि नई-नई बातें सोच रही थी स्वयं प्रवीण सोच रहा था -कि सुनकर मम्मी प्रसन्न होंगी किंतु वे तो उससे नाराजगी जतलाने लगीं।

