Sazishen [part 42]

नाव अपने स्थान पर आकर ठहर जाती है , धीरे-धीरे उसमें से यात्री उतरने लगते हैं। किंतु उन सब से पहले विकास को जल्दी थी और वह उनके बीच से होता हुआ, शीघ्र ही  नाव से उतरकर, बाहर आता है और प्रभा की परवाह किये  बगैर , तीव्र गति से एक तरफ को जाता है। प्रभा उसे जाते हुए देख रही थी ,और सोच रही थी- आज न  जाने  इसे  अचानक क्या हो गया है ?वह भी नाव से उतरकर ,वहीं खड़ी होकर उसकी प्रतीक्षा करती है। कुछ देर बाद विकास आता है। ओह ! तुम यहीं  हों , मैं तो घबरा ही गया था ,कहीं तुम नाराज होकर कहीं और तो नहीं चली गई होगीं। 

मैं तुमसे नाराज नहीं हूं, किंतु मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है ,आखिर तुम्हें हुआ क्या है ,तुम्हारी परेशानी क्या है ? तुम किसे ढूंढ रहे हो ? क्या जानना चाहते हो ? आज तक तुमने ऐसा व्यवहार कभी नहीं किया इसलिए मैंने सोचा अवश्य ही कोई बात होगी। 

हां ,बात तो अवश्य है, तुम विश्वास नहीं करोगी , मैंने चंपा को देखा था , किसी के साथ ,नाव में बैठी थी ,इतना ही नहीं, उसने एक विवाहिता की तरह वस्त्र पहने हुए थे। वही मैं सोच रहा था ,आखिर यह कौन हो सकती है ? यह वही है या कोई ओर ,या फिर उसकी हमशक़्ल ! 



चंपा, कौन? मैं  समझ नहीं पाई। 

अरे चंपा !वही, जो'' नीलिमा सक्सेना'' के घर में नौकरानी का कार्य कर रही थी और अचानक ही गायब हो गई थी ।

हाँ, मैंने उसका नाम तो सुना है किंतु उसे कभी देखा नहीं। क्या वह शादीशुदा थी ?

वही तो आश्चर्य मुझे हो रहा है ,वह शादीशुदा भी नहीं थी, और अचानक हमारी शादी वाले दिन, मेरी गाड़ी के सामने  आ गई थी, वह तो अच्छा हुआ ,हमारे ड्राइवर ने गाड़ी को तेज ब्रेक लगाकर रोक दिया हालांकि उसे बहुत हल्की चोटें आई थीं इसलिए मैंने सोचा ,कि इसको अस्पताल में भर्ती कर देता हूं और शादी के पश्चात ,उससे , उसके विषय में जान लूंगा आखिर वह कहां गायब हुई थी ? उसे दिन भी मैं, इसीलिए तो थाने में था कि आखिर वह कहां गई थी ?किन्तु वह अस्पताल से भी गायब  हो गयी  थी। 

प्रभा विकास से क्रोधित होते हुए बोली-आपने मुझे ,पहले क्यों नहीं बताया , मुझे क्यों नहीं दिखाया ? हमें एक दूसरे से सभी बातें, बताते हैं। तब यह बात क्यों नहीं बताइ ?हो सकता है, मुझे कोई नई कहानी मिल जाती।

 कहानी तो तुम्हारी अवश्य बनेगी, उसे एक बार हाथ तो लगने दो ! उसे ही ढूंढने गया था। 

वही तो मैं सोचूं, अपनी नई नवेली दुल्हन को छोड़कर ,कौन ऐसे ,किसी के पीछे भागता है ? कौन चुड़ैल ऐसी है ,जो मेरे पति को अपने पीछे भाग रही है ,कहते हुए हंसने लगी। तब वह गंभीर होते हुए बोली -ऐसा होता तो नहीं है, लेकिन प्रयास करने में क्या जाता है ? हम कल जाने वाले थे, अब कल ने जाकर, हम परसों चले जाएंगे। यदि वह यहां है ? तो वह भी , हमारी तरह ही घूमने आई होगी।  हो सकता है ,वह फिर से हमें  कहीं मिल जाए। 

मेरा मन तो नहीं कह रहा है, किंतु यदि तुम कहती हो ,तो एक दिन और घूम लेते हैं, किंतु अब तो हमें होटल वापस ही चलना होगा ,भूख भी लगी है और थोड़ा आराम भी करना है , कहते हुए विकास आगे बढ़ गया। होटल में आकर दोनों भोजन करके अपने कमरे में चले जाते हैं किन्तु ऐसे में प्रभा को अभी भी लग रहा था कि विकास अभी भी थोड़ा परेशान है। 

कपड़े बदलकर प्रभा उसके करीब आकर लेटती है ,और बोली -आप क्यों इतना परेशान हो रहें हैं ? मिल जाएगी ,नहीं मिलेगी तो हम इसमें क्या कर सकते हैं ?दुनिया में इतने लोग हैं ,इस भीड़ में ,कोई अपने आप से भाग रहा है ,कोई अपनों से भाग रहा है। न जाने कितने लोग हैं ?जो न जाने अपनों के साथ रहकर भी, न जाने कहाँ खोये रहते हैं ? सामने होकर भी ,अपनी हीर से दूर रहते हैं ,कहते हुए ,उसके सीने पर हाथ रखकर उसके करीब आती है। एक पल के लिए विकास प्रभा की इस हरकत पर मुस्कुरा उठता है और अपना हाथ आगे बढ़ाकर ,प्रभा को अपने और क़रीब खींच लेता है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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