जब चंपक ने अपने कमरे में प्रवेश किया तो आश्चर्य चकित रह गया। उसका कमरा अत्यंत ही व्यवस्थित, और सुचारू रूप से रखा गया था। आज शायद मम्मी ने , रामदीन से कमरे की सफाई करवाई होगी। चंपक का सोचना सही था, किंतु उसके पीछे अरुंधती जी का, एक मंतव्य और भी था। वह जानना चाहती थी आखिर वह लड़की कौन है ? उसकी कोई पहचान शायद उन्हें चंपक के कमरे में मिल जाए किंतु ऐसा नहीं हो पाया। तब उन्होंने कुछ तस्वीरें, चंपक के कमरे में रखी पढ़ाई की मेज पर, रख दीं। यह वही तस्वीरें थीं। जिनके रिश्ते आजकल चंपक के लिए आ रहे थे। किंतु चंपक के माता-पिता का सोचना था, पहले बेटा अपनी शिक्षा पूर्ण कर ले, उसके पश्चात उसके विवाह के विषय में सोचेंगे। किंतु जब से अरुंधति जी ने बेटे के व्यवहार में बदलाव पाया है । तब से उन्हें लग रहा था , इससे पहले की लड़का, न जाने किस लड़की को उठाकर ,इस घर की बहू बनाकर ले आए। उससे पहले ही, उसे हमें विवाह के बंधन में बांध देना चाहिए। ताकि वह इधर-उधर न भटके।
चंपक ने उन तस्वीरों को उठाकर देखा, बारी-बारी से उन तस्वीरों को देख रहा था, और एक तस्वीर ऐसी थी, जिसे वह देखता का देखता ही रह गया। इतनी सुंदर, हसीन लड़की उसने आज से पहले कभी नहीं देखी थी। वह आश्चर्यचकित था, मैंने इसे पहले क्यों नहीं देखा ? उसे देखते ही ,चंपक को जैसे उससे प्यार हो गया, उसमें वह खिंचाव ,आकर्षण, चंपक को लग रहा था जैसे वह उसकी और खिंचा चला जा रहा है। ऐसे समय में उसे, पूजा का भी स्मरण नहीं रहा. पूजा के साथ,उसे अपने रिश्ते का भी स्मरण नहीं रहा। कैसे वह उस रिश्ते को भूला सकता है? जिसके साथ वह छह महीने से,प्यार भरे दिन व्यतीत कर रहा है। इस लड़की की आँखों में कुछ तो है। कजरारी भूरी बड़ी -बड़ी आँखें ,बाल एकदम रेशमी सुनहरे ,उसका वो देखने का अंदाज सीधे दिल में उतर गयी।पूजा भी कम सुंदर नहीं ,उस पर भी लड़के जान छिड़कते थे किन्तु वो तो अपने चंपक पर जान छिड़कती है। किन्तु आज तक चंपक ने ,पूजा के प्रति वो खिंचाव ,आकर्षण महसूस नहीं किया जो इस लड़की की तस्वीर देखकर ही वो महसूस कर रहा था। बनावटी क्रोध लिए कमरे से बाहर आया और बोला -मेरा कमरा किसने छेड़ा।
क्यों क्या हुआ ? क्या कोई कमी रह गयी ?मैंने ही ,रामदीन से कहकर तुम्हारा कमरा ठीक करवाया था। अरुंधति ने भी अनजान बनकर पूछा।
बात यहीं पर समाप्त हो गयी किन्तु चंपक तो उस लड़की के विषय में जानना चाहता था। तब वापस मुड़ा और बोला -मेरे कमरे में ,मेज पर किसकी तस्वीरें पड़ी हैं ?
कौन सी और कैसी तस्वीरें ?ओह !हाँ याद आया ,वो तुम्हारे कमरे में रह गयीं और मैं उन्हें इधर -उधर ढूँढ रही थी। चलो ,अच्छा हुआ तुमने बता दिया वरना मैं न जाने कहाँ -कहाँ ढूंढती ?क्या तुम लाये हो ?या तुम्हारे कमरे में ही हैं।
अभी तो वहीं हैं।
तब मैं रामदीन से कहकर उन्हें मंगवा लूंगी।
वो तो ठीक है , किन्तु वे तस्वीरें किसकी हैं ? इतनी सारी लड़कियों की तस्वीरें आपके पास कहाँ से आई ?
आईं नहीं ,लाई गयीं हैं।
मतलब !
मतलब ,क्या ?पंडित जी, तुम्हारे रिश्ते के लिए लाये थे ,अब लड़की वालों को पता चल गया कि ठाकुर साहब का एक जवान लड़का भी है ,इसीलिए विवाह के लिए पंडितजी को अपनी बेटी की तस्वीरें दे देते हैं।
तब आपने क्या सोचा ?मेरा मतलब है ,आपने पंडित जी को क्या जबाब दिया ?
अभी जबाब क्या देना था ?अभी तो तुम पढ़ ही रहे हो ,हमने सोचा अभी तुम्हारी पढ़ाई में समय है। पढ़ाई के पश्चात ही सोचेंगे। वैसे अब तुमने उन तस्वीरों को देख ही लिया है ,तब इसमें तुम्हारी क्या राय है ?या तुम अभी विवाह के लिए तैयार हो।
जैसी, आप लोगों की इच्छा !वैसे विवाह देर से हो या शीघ्र , क्या फ़र्क पड़ता है ?
उसकी तरफ देखते हुए ,अरुंधति जी बोलीं -क्या इनमें से तुम्हें कोई लड़की पसंद है ?या फिर तुमने कोई और लड़की पसंद की हुई है।
मैंने ,ऐसा तो कुछ भी नहीं है ,मैंने किसी लड़की को पसंद नहीं किया, हकलाते हुए चंपक बोला।