लक्ष्य ,अभी साधा कहां ?
उद्देश्य अभी जाना कहां ?
जहाँ में, आए तुम किसलिए ?
यह तुमने अभी ,माना कहां ?
झूठ और दम्भ में भटके रहे,
जीवन को परिपूर्ण जाना कहां ?
हकीकत जिंदगी की जानी नहीं,
चले, जीवन के सफर में,
खोया,तुम्हारा हमसफर कहां ?
ढूंढते ,भटकते रहे, यहां -वहां,
इस जहां में आ......न कर सके ,
पूछे कोई ,तुम्हारा पड़ाव कहाँ ?
मन ही मन में भरा दम्भ में रहा ,
विदा हुआ, इस जहाँ से'गुमनाम '
बनकर रह गया ' गुमनाम यात्री !
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