जब दीपशिखा ,तांत्रिक मतंग से मिलती है -तब उसे पता चलता है ,कि वह तो पहले से ही ,पिछले जन्म में काली शक्तियों की महारानी' चंडालिका' थी। अब तो वह काली शक्तियों के माध्यम से ,अपनी इच्छा पूर्ति करना चाहती है , उसकी ईर्ष्या का कारण' स्वर्ण लता' है , उसको शक है, सुबोध और दीपशिखा के प्रेम के मध्य में' स्वर्ण लता 'आ रही है। तांत्रिक उसे यह भी बताता है कि पिछले जन्म में जो लड़की थी वह आज भी कुंभर्क के श्राप से मुक्त होने के लिए ,उसके इर्द-गिर्द ही है किंतु उसे' शेफाली 'का नाम नहीं बताता है। दीपशिखा अपने पिछले जन्म की दुश्मन' स्वर्ण लता' को ही समझ लेती है और उसे अपनी काली शक्तियों के माध्यम से पीड़ित करती है। और एक दिन स्वर्ण लता , न जाने कहां गायब हो जाती है ?
दीपशिखा की खुशी, शेफाली से छिपी नहीं थी, शेफाली को उस पर शक होता है , शेफाली समझना चाहती है, कि किसी के गायब होने पर ,किसी को कैसे इतनी प्रसन्नता हो सकती है ? तब शेफाली ने एक लड़की को दीपशिखा से डरते देखा। दीपशिखा अब अपनी काली शक्तियों को जागृत करने में लगी हुई थी , उसे अपनी शक्तियों पर अहंकार हो गया था। तब शेफाली उस 'रमा 'नाम की लड़की से उसके स्वप्न में जाकर उससे कुछ प्रश्न करना चाहती है , किंतु वह इतनी डरी हुई थी कि वह स्वप्न में भी रो रही थी , जिसके कारण ,उसकी मां ने उसे डरते देख ,उठा दिया , और उससे पूछने लगी -तुम क्यों डर रही थीं ? शेफाली को उसके प्रश्नों का जवाब नहीं मिल पाया , किंतु इतना तो वह समझ गई थी, कि यह लड़की बहुत डरी हुई है और इसने ऐसा कुछ देख लिया है, जो इसे नहीं देखना चाहिए था। अब शेफाली का उद्देश्य सुबोध और दीपशिखा को मिलाना नहीं वरन सच्चाई को जानना था। हर किसी की नजरों में ,वह आना नहीं चाहती थी , हालांकि उसको ''बाबा ब्रह्मानंद ''जी की तरफ से आशीर्वाद मिला हुआ था , वह जिसको भी दिखना चाहे दिख सकती है, यह उसकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता है। यदि शेफाली की इच्छा नहीं है ,तो दीपशिखा भी उसे नहीं देख सकती।
अगली रात्रि को शेफाली फिर से रमा के सपने में जाती है ,और बड़े हौले से ,बड़े प्यार से ,उससे अपने प्रश्नों का जवाब चाहती है , आज रमा ने जो बताया , वह शेफाली को आश्चर्यचकित कर देने वाला था। शेफाली ने दृढ़ निश्चय के साथ रमा को आश्वस्त किया और उससे कहा - यह बात किसी को पता नहीं चलेगी , और ना ही उस पर कोई आंच आएगी। रमा अपने दिल की बात, शेफाली से स्वप्न में कह कर भी निश्चिंत हो गई उसके मन को सुकून मिला, किंतु अब शेफाली , दीपशिखा की सच्चाई जानने के लिए उसकी जासूसी करने लगी। एक दिन छुपते -छुपाते उसके घर तक पहुंच गई। आज वह महसूस कर रही थी ,कि' कुंभर्क ' का श्राप उसके लिए' वरदान 'ही साबित हुआ। तब शेफाली ने उसके घर जाकर देखा ,एक कमरे में उसने अपनी तांत्रिक यंत्र क्रियाएं की हुई हैं। जिसको वह एक अच्छी लड़की समझ रही थी ,वह तो काली शक्तियों की पूजारिन निकली। दीपशिखा , अभी सुबोध के लिए ''वशीकरण विद्या ''का प्रयोग कर रही थी , तब शेफाली समझ गई ,कि सुबोध उससे प्रेम नहीं करता वरन उसके'' वशीकरण मंत्र ''के कारण ,उसकी ओर सम्मोहित हुआ है।
अब शेफाली दीपशिखा का पीछा करने लगी , वह जहां भी जाती उसके पीछे जाती तभी उसे उस तांत्रिक मतंग का पता चला। तांत्रिक मतंग कई काली शक्तियों को सिद्ध किए हुए था। पहली बार जब दीपशिखा उसे मिली थी तब उसने अपनी शक्तियों से उसके विषय में भी जान लिया था। अब वह उसका साथ दे रहा था। पहले तो दीपशिखा ने स्वर्ण लता को उसकी गुड़िया बनाकर उस के माध्यम से उस को आहत किया उसे कष्ट दिए। अब रमा के शब्द उसे स्मरण हो रहे थे -
यह क्या ?उसे धीरे-धीरे मार रही हो ,एक बार में ही क्यों नहीं मार देतीं , तांत्रिक मतंग बोला।
नहीं ,उसके कारण मुझे बहुत ही ,मानसिक कष्ट पहुंचा है , मैं भी उसे तिल- तिल कर मारना चाहती हूं , दीपशिखा ने क्रोधित होते हुए कहा। काली शक्तियों के कारण दीपशिखा के मन की कोमलता नष्ट होती जा रही थी।
मैं'' मारण विद्या ''द्वारा उसका एक बार में ही काम तमाम कर दूंगा , मतंग बोला।
नहीं, मैं उसकी बलि देकर ,अपनी शक्तियों को और बढ़ाउंगी और अपनी देवी मां को और प्रसन्न करूंगी , कहते हुए, वह अपने भयानक इरादों पर हंसी। एक दिन वशीकरण मंत्र द्वारा वो स्वर्ण लता को अपने वश में करके तांत्रिक मतंग के स्थान पर ले आई थी ,रमा भी उसका पीछा कर रही थी ,कि ये लड़की स्वर्णलता दीदी को किधर ले जा रही है ?क्योंकि कई दिनों से ,दीपशिखा का व्यवहार उसे संदेहास्पद लग रहा था। तब रमा ने जो देखा उसके कारण वो आज भी दहशत में जी रही है ,दीपशिखा ने वहां स्वर्णलता की पूजा की ,उसको लाल सिंदूर लगाया और कुछ मंत्र उच्चारण किए ,तब देवी मां को उसकी बलि दे दी ,एक ही झटके में उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती ,तब दीपशिखा ने उसका रक्तपान किया ,स्वर्णलता की मुंडी एक तरफ को लुढ़की पड़ी थी। यह सब रमा ने देख लिया था ,उसकी चीख निकल गई ,जिसके कारण तांत्रिक और दीपशिखा का ध्यान उस ओर गया ,किसी तरह से रमा वहाँ से बचकर तो आ गयी किन्तु तब से ही रमा की हालत भी ,खराब हो गई थी। डर के कारण, किसी से कुछ भी नहीं कह पा रही थी। जब कॉलेज में पुलिस आई ,तब भी वह बताना चाह कर भी नहीं बता पा रही थी, कि स्वर्ण लता अब इस दुनिया में नहीं रही। 'दीपशिखा 'नाम की लड़की ने उसे 'काली शक्तियों 'की कहो या अपनी ईर्ष्या की बलि चढ़ा दिया।
शेफाली सपने में भी नहीं सोच सकती थी, दीपशिखा इतनी क्रूर होगी। उसने बहुत सोचा, इसे किस तरह से सही राह पर लाया जाए ? और सुबोध को इसके चंगुल से छुड़ाया जाए।
अगले दिन दीपशिखा जब कॉलेज आई ,तब शेफाली उससे बोली -तुम्हारी और सुबोध की प्रेम कहानी कैसी चल रही है ?
दीपशिखा खुश होकर बोली -अब तो ,मेरे आगे पीछे डोलता है अब तुम देखना , मैं अपने कदमों पर लाकर रहूंगी, अपनी शक्तियों के अहंकार में बोली।
यह तुम क्या कह रही हो ?तुम तो ,उससे प्रेम करती हो , और करती थीं। शैफाली ने प्रश्न किया।
अब इसके जैसे न जाने कितनों को ,मैं अपना गुलाम बना सकती हूं। यह मेरा प्यार नहीं ,मेरी जिद था।उस स्वर्णलता के कारण ,मुझको ठुकरा दिया था , उसे तो उसके किए का दंड मैं दे चुकी ,अभी इसका हिसाब किताब बाकी है, कहकर वह हंसने लगी।

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