शेफाली, कुंभर्क के श्राप के कारण ,किसी को दिखती नहीं थी, किंतु उसका उद्देश्य, नौजवान प्रेमी जोड़ों को मिलाना था। वह अपने 'श्राप' को पूर्ण करके, शीघ्र अति शीघ्र उस से मुक्त होना चाहती थी। इसी योजना के तहत वह ,दीपशिखा से भी मिलती है। शेफाली को लगता है, दीपशिखा सुबोध से प्रेम करती है , इसी कारण ,गुप्त रूप से ,वह दीपशिखा की सहायता करती रहती है। इस बीच शेफाली यह भूल गई कि प्रेमी जोड़ों को तभी मिलाना होता है ,जब दोनों की ही रजामंदी हो। सुबोध , दीपशिखा से प्रेम नहीं करता है , यह बात शेफाली नहीं समझ पाई। सुबोध उसके , नाटक में अभिनय करने के लिए मना कर देता है , इससे दीपशिखा बहुत नाराज हो जाती है। दीपशिखा को लगता है, कि सुबोध ' स्वर्ण लता' की तरफ आकर्षित हो रहा है , इस कारण उसमें ईर्ष्या की भावना भर जाती है , सुबोध को पाना ,जैसे उसकी ज़िद बन जाती है। सुबोध को पाने के लिए, वह कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाती है , इसी कारण वह एक तांत्रिक से भी मिलती है।
तांत्रिक आंखें मूंदकर, दीपशिखा का भूतकाल देखता है , उसे देखकर ,वह प्रसन्न हो जाता है और उससे कहता है-तुम तो पहले से ही, इतनी शक्तियों की मालकिन हो , बस उन्हें जागृत करना बाकी है।
दीपशिखा कुछ समझी नहीं , उसने तांत्रिक से पूछा -यह आप क्या कह रहे हैं ? मैं किस तरह से 'काली शक्तियों' की मालकिन हूं।
तब तांत्रिक उसे बताता है, अपने पिछले जन्म में ,' काली शक्तियों 'की महारानी चंडालिका थी , जो अग्नि शक्ति से ओतप्रोत, काली शक्तियों के उपासक कामेश्वर की बहन थी और उससे यह भी बताता है , जो तुम्हारी दुश्मन शेफाली थी , वह भी यही इर्द-गिर्द है , उसे कुंभर्क का श्राप जो पूरा करना है। दीपशिखा चाहती है , ऐसी कौन लड़की है ? जो कुंभर्क के श्राप को पूरा कर रही है। अब दीपशिखा अपनी काली शक्तियों को जागृत करने के लिए ,उस तांत्रिक के साथ मिल जाती है। किंतु अभी भी वह परेशान है , क्योंकि वह जानना चाहती है , कुंभर्क , का श्राप पूरा करने के लिए , कहीं स्वर्ण लता ही तो नहीं है। दीपशिखा देखने में तो अच्छे परिवार की थी , किंतु अब वह तांत्रिक के कहे पर चल रही थी। उसका उद्देश्य सुबोध को पाना ही था। दीपशिखा ने अपने घर के एक कमरे में , गुप्त रूप से , वशीकरण मंत्र का जाप करना आरम्भ कर दिया ताकि सुबोध यानि मैं ,उसके वश में आ जाए। साथ ही , चुपके से स्वर्ण लता के कुछ बाल भी ले आई। स्वर्ण लता को प्रताड़ित करने के लिए ,उसने स्वर्णलता के नाम की एक गुड़िया बनाई और उस पर स्वर्ण लता के बाल लपेट दिए।
कहने को तो देखा जाए , कॉलेज के बच्चे हैं , पढ़े लिखे हैं, आजकल के बच्चे ,इन चीजों पर विश्वास नहीं करते किंतु यह , दीपशिखा के पिछले कर्मों का असर था। जिनके चलते वह इन तांत्रिक क्रियाओं में पड़ गई थी , धीरे-धीरे उसकी काली शक्तियां बढ़ रही थीं , जिनका असर , सुबोध और स्वर्णलता दोनों पर हो रहा था। सुबोध ,दीपशिखा के इर्द-गिर्द घूमने लगा। यह देखकर मन ही मन दीपशिखा खुश हो रही थी उधर स्वर्ण लता धीरे-धीरे बीमार पड़ रही थी। कभी उसे लगता, कोई उसे मार रहा है, कभी उसे लगता कोई उसके शरीर पर सुइयाँ चुभो रहा है। शेफाली अक्सर कॉलेज में, दीपशिखा के साथ ही रहती, किन्तु यह नहीं जान पाई थी कि दीपशिखा धीरे-धीरे काली शक्तियों का उपयोग कर रही है। वह तो बस यही समझ रही थी -कि वह सुबोध और दीपशिखा को मिलवाने में उनकी सहायता कर रही है। वह यह भी नहीं जानती थी ,कि यह वही पिछले जन्म की दुश्मन ''चंडालिका '' है।इसने अपना अगला जन्म यहाँ दीपशिखा के रूप में ले लिया है। रूप बदलने से क्या होता है ?अगला जन्म लेने पर भी ,दीपशिखा की फ़ितरत तो वही''चंडालिका 'वाली रही।
एक दिन ,कॉलिज से 'स्वर्णलता 'गायब हो गयी। उसके घरवाले उसे ढूँढ रहे थे ,कुछ समझ नहीं आ रहा था ,उनकी बच्ची अचानक बिमार रहने लगी और अब गायब हो गयी ,कॉलिज जाने के लिए घर से निकली थी किन्तु दो दिन हो गए घर नहीं पहुंची। शेफाली ने देखा ,'स्वर्ण लता' के गायब होने पर दीपशिखा बहुत खुश है उसे इस बात का दुख ही नहीं है, कि उसकी कॉलेज की एक लड़की गायब हो गई।
कहीं इस लड़की को इस दीपशिखा ने ही तो गायब नहीं कर दिया , प्रभा ने पूछा।
तुम सही हो, सुबोध बोला।
बड़ी ही खतरनाक लड़की थी , तब उसने तुमको कैसे छोड़ा ? कहीं स्वर्ण लता को गायब करने में उसी का हाथ तो नहीं।
तुम सही जा रही हो , स्वर्ण लता के घर वाले उसे ढूंढ रहे थे, पुलिस भी साथ में थी , पुलिस ने कॉलेज में भी चक्कर लगाया और सब से पूछताछ भी की किंतु कुछ सुराग नहीं मिल रहा था। आखिर लड़की गई तो गई कहां ? इस बात को एक सप्ताह हो गया। दीपशिखा को भी तब तक पता नहीं था यह शेफाली उसकी पुराने जन्म की दुश्मन है , तब वो शेफाली से आकर बोली -चलो, मेरे रास्ते का एक कांटा तो हट ही गया।
कुछ भी ना समझते हुए शेफाली ने, दीपशिखा से प्रश्न किया, तुम किसकी बात कर रही हो ?
अरे वही स्वर्ण लता ! वह मेरे और सुबोध के बीच में , कांटे की तरह चुभ रही थी। अब वह कांटा भी मैंने निकाल दिया।
शेफाली का माथा ठनका , कांटा निकाल दिया मैं कुछ समझी नहीं।
समय आने पर सब समझ जाओगी , कहते हुए वह खिलखिला कर हंसने लगी।
शेफाली को उसका यह व्यवहार पसंद नहीं आया , कुछ संदेहास्पद भी लगा। शेफाली को लगा ,अवश्य ही इसने कुछ किया है , पता लगाना होगा। वह तो अदृश्य थी , किसी को भी दिख नहीं सकती थी , संपूर्ण कॉलेज में घूमती थी , तब उसने एक लड़की को , डरे सहमे से देखा , जो दीपशिखा को देखकर और भी सहम जाती थी। शेफाली को दीपशिखा की सुंदरता का बनावटीपन ,अब अच्छा नहीं लग रहा था , जैसी वह दिखने में सुंदर थी , वैसी हो व्यवहार और सोच में नहीं थी , अब शेफाली सोचने लगी , कहीं मैं इसकी सहायता करके कोई गलती तो नहीं कर रही हूं। अब मैं इसकी सहायता तभी करूंगी ,जब पहले इसके बारे में संपूर्ण जानकारी ले लूंगी। स्वर्ण लता आखिर, गई कहां ? जीवित भी है या नहीं , उसके गायब होने में कहीं दीपशिखा का हाथ तो नहीं। सुबोध उससे सच में ही प्यार करता है या फिर दीपशिखा की जिद है , अनेक प्रश्नों ने शेफाली को घेर लिया। वह लड़की इसे देखकर सहम क्यों जाती है ?
सबसे पहले शुरुआत , शेफाली उस लड़की से ही करती है , वह उसके सामने नहीं आना चाहती थी ,इसीलिए उसके स्वप्न में आ जाती है और उससे बड़े प्यार से पूछती है -तुम इतनी डरी सहमी सी क्यों रहती हो ? जब शेफाली ने उससे इस तरह से प्रश्न किया , तब घबराहट के कारण रोने लगी , तुम क्यों रो रही हो ? अपना डर मुझे बता सकती हो , मैं किसी से भी ,कुछ भी नहीं कहूंगी।
तब उस लड़की ने रोते-रोते शेफाली को बताया , मेरा नाम रमा है , मैं उसी कॉलेज में , दीपशिखा की जूनियर हूं , एक दिन मैंने उसे , स्वर्ण लता को अपने साथ ले जाते देखा , स्वर्ण लता दीदी व्यवहार में बहुत ही अच्छी थीं , मेरी अक्सर उनसे बात होती रहती थी क्योंकि हम दोनों एक ही गली में रहते थे। किंतु एक दिन, एक दिन कहते हुए ,वह रोने लगी, सपने में ही नहीं वरन सच में ही ,जोर जोर से रो रही थी। तब रमा की मम्मी ने घबराकर उसे झिंझोड़ा , उठ रमा ,उठ जा ! क्यों रो रही है ?
उनके इस तरह उठाने से रमा की आंख खुल गई , और उसका सपना बीच में ही टूट गया , और शेफाली को भी उसके प्रश्नों का जवाब नहीं मिल पाया।

