Shrapit kahaniyan [part 75]

 देव और असुर संग्राम तो वर्षों से होता चला आ रहा है , असुर हमेशा देवों का पर ,आधिपत्य  जमाना चाहते थे। वह आज भी होता चला आ रहा है। इसका एक जीता जागता उदाहरण-'' अघोरी और उसका बदला'' ही है। उसने पुनः जन्म लिया किंतु अपना बदला नहीं भूला। अपना बदला लेने के लिए ,वह किसी को भी इसमें शामिल कर सकता है। कहते हैं ना ,''जब इंसान की सोच अच्छी हो ,उसके विचार अच्छे हों , कर्म अच्छे हों  वह स्वयं ही देवत्व को प्राप्त हो जाता है।'' स्वयं देवता भी उसकी सहायता  करने के लिए तत्पर  रहते हैं। आज भी तो यही हुआ , माना कि, शेफाली को कुंभर्क  ने ,अपने' वशीकरण मंत्र 'से वश में कर लिया था और निशाचर मुक्त भी हो गए थे किंतु अपने मंसूबों में सफल ना हो सके। बाबा ने शंख बजाकर उस युद्ध की उद्घोषणा की , किंतु उस शंख की ध्वनि निशाचरों के  ऊपर जैसे आफत बनकर , उनके कर्ण  पटल को भेद  रही थी। 


शेफाली में भी अद्भुत दैवीय शक्ति थी, उसके मंत्रों के  उच्चारण से , उसकी ऊर्जा बढ़ती जा रही थी, जिस गुफा में वह थी, उस गुफा में उसके मंत्रों का उसकी शक्ति का ऊर्जा स्रोत बढ़ता जा रहा था। धीरे-धीरे सभी नकारात्मक शक्तियां , नष्ट होने लगीं  और आपकी जान बचाकर भागीं। कुछ शक्तियां भागते भागते भी , शेफाली पर आक्रमण करने का प्रयास करती हैं किंतु सफल नहीं होतीं ,उसे छूना तो दूर ,वो  उसके करीब पहुंच भी नहीं  पाये। सभी शक्तियां गायब हो जाने के पश्चात ,भी शेफाली ने अपना मंत्र उच्चारण बंद नहीं किया , उसके मंत्रों की ध्वनि अघोरी के कान में घंटे की तरह बजने लगी। जिसे वह सहन नहीं कर पा रहा था। उसने कुंभर्क  से  कहा - इसे बंद करवा दो ! 

कुंभर्क ने  एक दो बार प्रयास भी किया -शेफाली से कहा -कि मंत्र उच्चारण को बंद कर दो ! किंतु उस समय शेफाली ,कुंभर्क  के सम्मोहन में नहीं थी। वह चाहती थी -कि अघोरी भी ना रहे। उन मंत्रों के शब्द गुफा के कण-कण में भरने लगे , हर ओर से उन मंत्रों की आवाज गूंज रही थी। अघोरी उसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था , तब उससे बाहर जाने का प्रयास किया यह भी कह सकते हैं ,तब उसने भागने का प्रयास किया। तब शेफाली ने अपनी करधनी  खोलकर , उसकी राह में फेंक दी , जैसे ही वह आगे बढ़ा, पवित्र तरंगों  ने उसे छू लिया , इसके कारण वो चीखकर पीछे हट गया। 

तब वह अघोरी चीखकर बोला - ऐ  लड़की मैं कहता हूं, तुम इसे तुरंत रोक दो ! तब उसे वो बात स्मरण हो आई ,जब वो इस गुफा में आई थी ,और उसे लगा था ,जैसे उसने अपनी मौत को बुला लिया हो ,तब उसने इस बात पर ध्यान नहीं दिया था किन्तु अब लग रहा था ,ये उसकी सोच नहीं ,वरन एक चेतावनी थी ,जो उसकी जीवात्मा ने उसे दी थी। 

यह मंत्र उच्चारण अब बढ़ते जाएंगे ,यह नहीं रुकेंगे और जब तक नहीं रुकेंगे ,जब तक तुम स्वयं इस नरक की अग्नि में नहीं पहुंच जाते , शेफाली क्रोधित होते हुए बोली। 

अघोरी की हालत बिगड़ती जा रही थी , वह बाहर भी नहीं जा पा रहा था , तब उसने एकाएक कुंभार्क  को पकड़ लिया , जो पहले से ही, इन पवित्र शब्दों के कारण , कुछ भी करने की  स्थिति में नहीं था। तब अघोरी क्रोधित होकर बोला -यदि तुम इस शक्ति हो नहीं रोकती हो और मुझे नहीं जाने दोगी ,तब मैं तुम्हारे इस प्रेमी को नहीं  छोड़ूंगा। इसे मार डालूंगा या फिर इसे अपनी साथ नर्क की अग्नि में जलाने के लिए ले जाऊंगा। 

शेफाली क्रोधित होते हुए बोली -तूने इसे छोड़ा ही कब ? तूने इसे शैतान बना दिया , वैसे भी यह साधारण जिंदगी नहीं जी सकता , मैं किसी शैतान से विवाह नहीं कर सकती ,इसके लिए फिर चाहे  मुझे दूसरा जन्म ही क्यों न लेना पड़े ? किंतु मैं इसके कारण तुम्हारी बातों में नहीं आऊंगी। 

शेफाली के शब्द , जब कुंभर्क  के कानों में पड़े , तब उसे बहुत दुख हुआ , और वह दुखी स्वर में बोला -तुमने मेरे प्रेम का अपमान किया है , उसका लाभ उठाया है , अब तुम्हें मेरा प्यार अगले जन्म में भी नहीं मिलेगा। मैं तुम्हें श्राप देता हूं - जब तक तुम दस प्रेमी जोड़े इस संसार में ना मिलवा दो , तब तक हमारा मिलन नहीं होगा  और तुम भी इस संसार में रहते हुए भी , किसी को दिखलाई नहीं दोगी। 

कुंभर्क  के श्राप के कारण, शेफाली की आंखों में नमी आ गई , किंतु यह प्रश्न उसकी अपनी जिंदगी का ही नहीं था ,न जाने कितने ?निर्दोषों की जान बचाने का उसका उद्देश्य पूर्ण होना था , उसने दुखी मन से उसका श्राप ग्रहण कर लिया किंतु अपना मंत्रोच्चारण नहीं छोड़ा , धीरे-धीरे अघोरी की चेहरा बदलने लगा , उसकी शक्ति इतनी क्षीण  हो चुकी थी , अपने को नियंत्रित भी नहीं कर पा रहा था , और काली  शक्तियों ने उसे अपने पास खींच लिया। अघोरी उस नर्क की अग्नि में जाने से बच रहा था, उसने अपना हाथ कुंभर्क , की ओर बढ़ा दिया और उसे भी अपने साथ खींच लिया , उन दोनों के अंदर जाते ही, दरवाजा स्वतः ही  बंद हो गया। शेफाली ने उस द्वार पर , उस त्रिशूल को उसी प्रकार लगा दिया। देखने से ऐसा लग रहा था ,जैसे यहाँ कुछ भी नहीं हुआ ,उसने अपने मंत्रों की शक्ति को वहीँ स्थापित कर दिया ,ताकि  उस गुफा का वातावरण पवित्र रहे ,और कोई भी नकारात्मक शक्ति अघोरी की तरह ,पुनः प्रयास न कर सके। 

जब वह उस गुफा से बाहर आई , तब एक नई सुबह थी , चिड़िया चहचहा रहीं  थीं  , सभी लोग अपने अपने कार्य में लग गए थे। किंतु आज एक नई बात हुई थी। वहां जो बर्फ, बर्फ से ढकी जो खाली  जगह थी , अब उस स्थान पर एक गांव बस गया था , वही गांव जो, 5000 साल पहले , चंडालिका  के श्राप के कारण ,पृथ्वी में समा गया था। 



शेफाली को कुंभर्क  के जाने का दुख था ,किंतु इस जन्म में तब भी, कुंभर्क  उसका नहीं हो पाता , क्योंकि वह शैतानी शक्तियों द्वारा जन्मा था उसके अंदर का शैतान इतनी  शीघ्रता से नहीं मर सकता था , न ही वह लोग इस जन्म में मिल सकते थे , किंतु कुंभर्क  का' श्राप ' उसे याद था। वह शीघ्र अति शीघ्र मंदिर पहुंच जाना चाहती है ,इससे पहले कि उसके श्राप का कुछ असर होना शुरू हो। जब वह मंदिर में जाती है तब बाबा के चरणों में गिर जाती है। 

उसे देखकर बाबा बोले -तुम तो देवी हो ,देवियां क्या चरणों में लेटती हैं ? तुमने तो एक बहुत बड़ा महान कार्य किया है , उसके लिए हम सभी ग्रामवासी तुम्हारा दिल से अभिनंदन करते हैं। किंतु उस अघोरी का क्या हुआ? बाबा ने प्रश्न किया। 

अघोरी अपनी सही स्थान पर चला गया, साथ ही कुंभर्क भी , उसको भी इस 'शापित जीवन' से छुटकारा मिल गया। कहते हुए , शेफाली रोने लगी। 

बाबा ने उसके सर पर हाथ रखा और उसे ढांढस बंधाया , बोले -बेटा ! यह सब पहले से ही तय होता है , तुम्हारे ही कारण ,उसको इस 'शापित जीवन 'से मुक्ति मिलनी  थी , इसमें तुम्हारा तनिक भी दोष नहीं है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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