Shrapit ,kahaniyan [part 74]

 जिस चीज को आज के समय में लोग''क्लोन '' बोलते हैं , उसका तो न जाने लोगों ने ,कब से अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए ,'अविष्कार' कर लिया था और उस अविष्कार का नतीजा ही , 'अवतार' की प्रति छाया थी। किंतु बाबा ब्रह्मानंद और शेफाली को उसके विषय में शीघ्र ही पता चल गया।  जिसके फलस्वरूप'' बाबा ब्रह्मानंद जी'' और अवतार को यानी नकली अवतार को , अपनी शक्तियों द्वारा, मंदिर के गर्भ गृह में कैद कर लिया। जिसका उपयोग अघोरी अपने लाभ के लिए उठा रहा था। उसका उद्देश्य अवतार के माध्यम से उनकी योजनाओं को विफल करना था। किंतु ऐसा ना हो सका। जब नकारात्मक शक्तियां अपने जोर पर थीं किंतु दैवीय शक्तियां भी अपनी तैयारियों में थी, जिसका परिणाम समय रहते ही ''बाबा ब्रह्मानंद और शेफाली ''को उस गांव के रूप में मिल गया। कहते हैं ना -''जो होता है ,अच्छे के लिए होता है।'' जो गांव वर्षों से और बर्फीली धरती के नीचे दबा हुआ था वह अचानक शेफाली  की नजरों में आ गया। जिसका ब्रह्मानंद जी ने लाभ उठाया। 


शेफाली को कुंभर्क सम्मोहित कर लेता है सम्मोहित करने के पश्चात, शेफाली को  कुछ भी स्मरण नहीं रहता ,कि उसके बीच और बाबा के बीच क्या बातें  हुई थीं  ? अघोरी उनकी योजना को जानना चाहता था किन्तु अब कोई लाभ नहीं। शेफाली चुपचाप गुफा में प्रवेश करती है , किंतु तभी अचानक बर्फीली तेज हवाएं चलने लगीं। न जाने कहां से , बहुत से चमगादड़ निकल कर बाहर की तरफ भागे। जबकि इन सबसे बेपरवाह अघोरी अपने 'महामहिम 'को , प्रसन्न करने में लगा था।

 बाबा जी ने  शेफाली को जो मंत्र दिया था , अभी वह उसका उपयोग नहीं कर सकती थी ,क्योंकि वह कुंभर्क  के वश में थी, जैसा वह कह रहा था ,वैसा ही कर रही थी। दैवीय शक्तियां वहां अभी पहले से ही उपस्थित थीं, जिनके कारण , काली आत्माओं का द्वार बंद था। अघोरी ने अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए , हवन करना आरंभ कर दिया। कुंभर्क  और अघोरी  काली शक्तियों के रक्षक थे , अभी तो काली शक्तियों के राजा को मुक्त होना था , तभी वे इस धरती पर , अपनी सत्ता कायम करेंगे। शेफाली ने भी उस हवन कुंड में अपने द्वारा आहुति दी , जिसके कारण वह अग्नि और तीव्र  हो गई ,उसके पश्चात  एकदम से बंद हो गई।  यह देखकर अघोरी आश्चर्य चकित रह गया। तब उसने अपने 'काली शक्तियों 'का ध्यान लगाया किंतु एक तेज प्रकाश ने , उसको आगे बढ़ने ही नहीं दिया। 

अघोरी अचंभित था, वह क्यों नहीं देख पा रहा है ? आखिर यह कौन है ? यह कोई आम इंसान तो हो नहीं सकती , जिसने' काली शक्तियों' के उपासक को अपना दास बना लिया , अवश्य ही ,कोई दिव्य शक्ति है। अब और देर नहीं करना चाहता था। रात्रि के 12:00 बज चुके थे , इस समय नकारात्मक शक्तियां अपने चरम पर होती हैं। अभी शेफाली , कुंभर्क  के वशीकरण मंत्र से बंधी हुई थी , वो  जैसा कह रहा था -वैसा ही कर रही थी। शेफाली ने उस बंद द्वार की तरफ देखा , वह द्वार जो मंत्रों से बंधा हुआ था किंतु शेफाली को उनका तोड़ नहीं मालूम था। यह बात जब अघोरी को पता चली ,वह परेशान हो उठा ,इस द्वार को खोलने का कोई और उपाय तो होगा ही। 

तब कुंभर्क बोला -तब  उस द्वार की  रक्षा के लिए जो शस्त्र  वहां पर लगाए हुए थे ,उन्हें वह स्पर्श  कर सकती है। इन दैविक शस्त्रों को तो इससे हटवा ही सकते हैं , यदि कुछ अनुचित होता भी है , तब  उसका परिणाम इसको ही भुगतना होगा ,वो ये नहीं समझ पा रहा था ,जिसके लिए वो ऐसा सोच  है ,वो उसका अपना प्यार है।

कुंभर्क की योजना सुनकर ,अघोरी प्रसन्न हो गया ,और बोला -जैसा तुम चाहो !करो !

तब कुंभर्क के कहने पर ,उस द्वार पर एक बड़ा त्रिशूल लगा  हुआ था , जिसे शेफाली ने  कुंभर्क  के कहने पर उस द्वार से हटा दिया , उसके हटते ही ,बाहर जो चांद निकला हुआ था ,अचानक वहां बादल छा गए  , पृथ्वी भी हिलने लगी ,उस गुफा में भी कंपन होने लगा। अभी आधा द्वार ही खुल पाया था कि कुछ शैतानी शक्तियां तो उसमें से ही निकल कर बाहर आ गई और गुफा से निकलते हुए तीव्र गति  से बाहर की तरफ  भागीं। अभी भी शेफाली कुंभर्क के वशीकरण मंत्र से बंधी हुई थी। किंतु जैसे ही ,उनमें से कुछ शक्तियों का , शेफाली  से स्पर्श हुआ ,वही भस्म हो गईं। यह सब देखकर अघोरी घबरा गया। कहीं उसने अपनी इस गुफा में ,अपनी मौत को तो नहीं बुला लिया है।

अभी  दूसरा द्वार खुल नहीं पाया था , तभी बाहर से कुछ आवाजें आने लगीं , तेज स्वर  सुनाई देने लगे, कुछ भयंकर हुंकार थीं , और भी न जाने कैसी कैसी डरावनी चीखें  आ रही थीं। अघोरी मन ही मन मुस्कुराने लगा और सोच रहा था -दूसरा द्वार ना भी खुले तब भी , हमारे पिशाच प्रेत आदि राक्षस बाहर आ ही जाएंगे। रही बात ,पाताल लोक के राजा की , उन्हें आने की आवश्यकता भी नहीं , उससे पहले ही यह सब निपटा देंगे। उस वशीकरण में भी शेफाली अपनी जगह पर , अड़िग बैठी रही। हां ,यह अवश्य था, कोई भी उससे स्पर्श हो जाता ,वह पुनः  पाताल लोक में पहुंच जाता या वहीं राख़ ढेर बन जाता , नरक की अग्नि तीव्र हो चुकी थी। 

बाबा ब्रह्मानंद का सोचना ,सही निकला , शैतानी शक्तियों का द्वार खुल चुका था , जिसके कारण वह बाहर आ गए थे। अब अघोरी भी ,गुफा से बाहर आ गया था ,उनका संचालन अघोरी कर रहा था। अघोरी अब  , शेफाली की तरफ से बेफिक्र हो गया था वैसे अभी उसका आधा ही काम हुआ था किंतु उससे भी संतुष्ट था। कुंभर्क  ने बाहर आकर देखा , शैतानी ताकतों की शक्तियां  बढ़ती जा रही हैं  और वह निर्विघ्न  वहां पर घूम रही हैं। इतनी रात गए कोई घर से नहीं निकलता , फिर भी कोई इक्का-दुक्का दिख जाता , तब वह पिशाच उसे मार डालते उसे खा जाते , उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी।शेफाली का सम्मोहन अभी तक टूटा नहीं था। उन्हें आतंक मचाते हुए ,लगभग तीन  घंटे हो चुके थे।

 जब बाबा को पता चला ,तभी बाबा ने शंख बजाना आरंभ कर दिया , और लगातार बजाते रहे। यह शंखनाद अवतार के लिए था ताकि वह अपनी सेना को लेकर उस गांव से बाहर आ जाए। उसकी ध्वनि से , उस जमी हुई बर्फ में भी ,हलचल होने लगी , और उसके अंदर से इंसान निकलकर बाहर आ गए ,वही मिटटी के इंसान ,जिन्हें ''ब्रह्मानंद जी ''ने पुनः जीवनदान दिया था। अब अवतार की सेना भी , उन शैतानों से लड़ने लगी , दोनों का घमासान युद्ध चल रहा था ,उधर बाबा का शंख भी बज रहा था। जिसकी ध्वनि, शैतानों के कानों को भेद रही थी। उस रात्रि में , बाबा मंदिर से बाहर आकर एक ऊँची चट्टान पर खड़े हो गए ,ठंड बहुत थी किन्तु उन्होंने शंख बजाना नहीं छोड़ा ,वह ध्वनि बढ़ती चली गई जो शेफाली के कानों तक भी पहुंची। उस शंख की ध्वनि ने, शेफाली के सम्मोहन को तोड़ दिया। 



सम्मोहन के टूटते ही , शेफाली ने इधर-उधर देखा कि वह कहां है ? वही एक तरफ एक मशाल जल रही थी उसी की रोशनी में उसने देखा, तब उसने अपने को एक गुफा में पाया ,उसने देखा एक तरफ हवन की अग्नि बुझी हुई है। कुछ कंकाल इधर-उधर पड़े हुए हैं , उसी हवन के पास एक खोपड़ी भी पड़ी हुई है। शेफाली को लगा ,शायद यही अघोरी कि वह गुफा है। तभी शेफाली ने देखा ,एक द्वार खुला हुआ है ,एक  त्रिशूल जो एक तरफ खड़ा  हुआ था। तब शेफाली ने अंदाजा लगाया ,हो न हो ,यही वह  द्वार है , जिसको खुलवाने के लिए अघोरी इतना परेशान हो रहा था। तब शेफाली को ध्यान आया ,कि उसने उस सम्मोहन में कितनी बड़ी गलती कर दी ? पहले तो वह घबरा गई। तभी उसने अपने आपको संभाला ,उसने साहस से काम लिया और बाबा का दिये  मंत्र का जाप करने लगी। सब कुछ बहुत जल्दी और स्पष्ट सा हो रहा था उधर बाबा का शंख बज रहा था ,इधर शेफाली मंत्रों का उच्चारण किए जा रही थी ,जैसे-जैसे उसके मंत्रों की शक्ति बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे वे नकारात्मक शक्तियां वापस उसी मार्ग में जा रही थीं। शिकारी ने अपना एक हाथ अपनी उस तगड़ी पर भी रखा हुआ था ताकि अन्य कोई भी काली शक्ति उसको अपने वश में ना कर सके। गुफा उसके मंत्रों के जाप से भरती जा रही थी। धीरे-धीरे जितने भी पिशाच ,जिन्न , राक्षस , नकारात्मक शक्तियां थीं  सभी उस द्वार से अंदर खींचती  चली जा रही थीं । जैसे वह लोग बाहर निकले थे वैसे ही उसमें समा रहे थे। 'ब्रह्म वेला ' का समय था, इस मुहूर्त में ,तो काली शक्तियां वैसे  ही कमजोर पड़ने लगती हैं ,उधर बाबा के शंख की ध्वनि लगातार उस  शांत वातावरण में गूंज रही थी। जब सभी राक्षस उस द्वार में समा गए, तब भी शेफाली का जाप बंद नहीं हुआ। वह जाप अघोरी  के सिर में घंटे की तरह बजने लगा। उसने कुंभर्क  से कहा -इसका जाप  बंद करवा दो ! वरना मेरे ''कर्णपटल ''नहीं बचेंगे। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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