कुंभर्क अपने ' माया जाल 'में जाकर अघोरी से छुपना चाहता था किन्तु अनजाने ही उसने ,उस गांव के मार्ग का द्वार , उनके लिए खोल दिया। जिसकी जानकारी उसे स्वयं भी नहीं थी। न ही ,अघोरी ने उसे ऐसा कुछ बताया था - शेफाली बाबा को अपने साथ ले जाकर, उस गांव को दिखलाती है और बाबा अपनी शक्तियों के माध्यम से जो 'पदम पुष्प 'उस गांव के कुएं में ही विद्यमान था , उसे बाहर निकालते हैं और मंत्रोच्चारण द्वारा , गांववालों के दिल ,उस पुष्प से मुक्त करके सही स्थान पर भेज देते हैं। अब उनके लिए ये प्रश्न उठ खड़ा होता है ,जब अवतार इधर है ,तो हमारी सुरक्षा और सहायता के लिए हमारे साथ कौन है ? बाहर आकर देखते हैं ,कुंभर्क के साथ ,पहले से ही शेफाली वहां मौजूद है ,यह देखकर वो वहाँ से चले जाते हैं।
बाहर आकर शेफाली ,कुंभर्क से कहती है -तुम्हारे साथ ,कब चलना है ?
कुंभर्क कहता है -आज शाम को ,हम लोग अपनी गुफा में जाएंगे।
शाम को ही क्यों ,क्या हम दिन में नहीं जा सकते हैं ? उसने कुम्भर्क़ से पूछा।
नहीं ,जो क्रियाविधि वह करेंगे ,वह शाम को भी होती है।
ठीक है ! तब तक मैं अपने कुछ कार्य निपटा कर आती हूं। शाम को मैं ,तुम्हें तुम्हारी गुफा वाले रास्ते पर मिलूंगी। कुंभर्क से मिलकर शेफाली और कहीं नहीं गई ,वह सीधे 'बाबा ब्रह्मानंद जी' के मंदिर में चली गई और उनसे संपूर्ण बातें बताई।
बाबा ब्रह्मानंद जी बोले, शाम को बुलाने का उसका उद्देश्य यही है कि रात्रि में पैशाचिक शक्तियां , बढ़ जाती हैं , हो सकता है ,वह तुम्हारे माध्यम से ,उन्हें स्वतंत्र कराने का प्रयास करें। क्योंकि जब शेफाली ने उन्हें बताया -कि वह मार्ग तो एक गुफा की तरफ जाता है, तब वह समझ गए कि यह उसी गुफा की बात कर रही है , जिसमें काली शक्तियों के बाहर न आने का मार्ग बंद कर दिया गया था। उन पवित्र शक्तियों को वह नहीं खोल पा रहा था ,खोलता कैसे ?वो उन्हें छू भी नहीं पायेगा इसीलिए उसने शेफाली को इसका माध्यम बनाया है। उन्होंने शेफाली से सचेत रहने के लिए कहा , और किसी भी कीमत पर ,वह द्वार ,न खोलने की चेतावनी दी ।
आज ना जाने अवतार कहां चला गया ?आज अवतार भी नहीं दिख रहा था ,बाबा बोले -कहीं उसे एहसास तो नहीं हो गया कि हम उसकी सच्चाई जान गए हैं ?
कैसी सच्चाई ? बाबा !
क्यों ?क्या तुम ,अभी भी नहीं समझीं , जब गांव में पहले से ही अवतार उपस्थित है वहीं पर है तब यह दूसरा अवतार कहां से आया ?
क्या मतलब ? मैं अभी भी कुछ नहीं समझ पाई।
जब तुम लोग 'मायाजाल 'में रहते हो ,तब उस बाहरी चट्टान पर तुम लोग ,कहां से आ जाते हो ?जो अघोरी को धोखा दे सके ,बाबा ने रहस्यात्मक तरीके से मुस्कुरा कर पूछा।
शेफाली सोचने लगी, क्या बाबा वही बात है ?जो मैं सोच रही हूं ,शेफाली ने प्रश्न किया।
हां ,तुम सही सोच रही हो। जिस तरह तुम लोग अघोरी को धोखा दे रहे हो, उसी तरह अघोरी ने भी, हमें धोखा दिया है , उसने अवतार का प्रतिरूप बनाकर हमारे पास भेज दिया है ताकि हम धोखे में रहे कि वह हमारे साथ है , जबकि वह अवतार नहीं, उसकी छाया है,उसका प्रतिरूप है , ताकि हमारी सारी प्रतिक्रियाओं पर उसका ध्यान रहे और वह यहां की खबर उन्हें देता रहे।
ओह ! इतना बड़ा षड्यंत्र ! शेफाली आश्चर्य से बोली।
हां, यह उसी का षड्यंत्र है, और यह तैयारी उसकी आज से नहीं वरन वर्षों से चल रही है, जिसके फलस्वरूप तुम कुंभर्क को भी जान गई हो , कुंभर्क भी उस षड्यंत्र का एक हिस्सा है। पूर्व जन्म के संबंध समझो ! वह तो कुंभर्क तुमसे प्यार कर बैठा ,वरना तुम न जाने कैसे अघोरी द्वारा ठग ली जातीं ?
तब हम उसकी गहरी चाल से कैसे बचेंगे ? चिंतित स्वर में शेफाली बोली।
जब उसकी काली शक्तियां ,अपना कार्य कर रही हैं तो हमारी दैवीय शक्तियां भी ,निश्चिंत तो नहीं होंगी उन्होंने भी कुछ सोचा ही होगा , उसका उपाय आधा तो हमें मिल ही गया ,उस गांव में जाकर, यह भी दैवीय शक्तियों का , दिखाया गया मार्ग भी कह सकते हैं। समय आने पर ,असली अवतार भी, हमारे सामने आ ही जाएगा। उससे पहले उस अवतार को, हमें उसकी सही जगह दिखानी है।
आश्चर्य से शेफाली बोली -बाबा, विश्वास ही नहीं होता कोई देखकर कह भी नहीं सकता, कि वह अवतार की 'प्रतिछाया 'होगी।
''जहां आवश्यकता है ,वहीं अविष्कार भी है '', काली शक्तियों ने अपनी शक्तियों से दूसरे की प्रतिछाया बनाना तो सीख ही लिया।
बाबा ! मुझे अब वहां जाने से भी डर लग रहा है ,पता नहीं ,वह लोग मुझसे क्या चाहते हैं ? रात्रि के समय तो कुंभर्क भी उन पैशाची शक्तियों के वश में होगा ,उन्हीं का साथ देगा। तब मैं अकेली वहां कुछ भी नहीं कर पाऊंगी , मेरे पास कोई ऐसी शक्ति भी नहीं है जिससे मैं अपना बचाव कर सकूं।
अब बाबा ब्रह्मानंद जी उसे एक मंत्र बताते हैं, और कहते हैं इस मंत्र का जाप लगातार करोगी तो इससे तुम्हारी शक्तियां बढ़ती चली जाएंगी , बिना डरे इस मंत्र का जाप लगातार करते रहना, तब वह पैशाचिक शक्तियां तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएंगीं। कहते हुए ,बाबा ने उसे एक अभिमंत्रित कमरबंद भी दिया , जिसमें छोटे छोटे चाकू लटके हुए थे।
उसे देखकर शेफाली बोली -बाबा इससे क्या होगा ?
यदि उस अघोरी ने, तुम पर जादू -टोना किया भी तो , तुम्हारा हाथ से स्पर्श होते ही , उसका हर जादू टूट जाएगा। यह काली शक्तियों का काट है , कमर में इसलिए बाँधा है ताकि हाथ या गले में डालने से ,यह उनकी नजर में आ सकता है , किंतु ये कमर में छुपा रहेगा। अपनी तरफ से तैयारी पूरी थी।
दिन ढलने लगा था, अब तो बस कुंभर्क के आने का इंतजार था, बाबा भी उसके संग ही ,कुंभर्क की प्रतीक्षा में थे किन्तु चट्टानों के पीछे छुपे हुए थे। पूरे आत्मविश्वास के साथ शेफाली, उस गुफा वाले मार्ग पर चल दी थी। तभी उसे कुंभर्क दिखलाई दिया, साथ में अघोरी भी था , उसके रूप को देखकर पहले तो शेफाली डर ही गई , किंतु अभी उसने कुंभर्क का शैतानी रूप कहां देखा था ?
न जाने आगे क्या होगा ? बाबा चट्टान के पीछे खड़े सोच रहे थे।अघोरी आसानी से मानने वाला नहीं है ,कुछ न कुछ चाल तो वो अवश्य चलेगा ,मुझे भी हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। यह सोचते हुए बाबा चट्टान के पीछे से निकलकर ,मंदिर की तरफ चले जाते हैं और एक गुप्त संदेश किसी के लिए छोड़ जाते हैं।
गुफा में प्रवेश करने से पहले ,अघोरी शेफाली का अपनी आँखों से निरीक्षण करता है ,उसकी दृष्टि उस करधनी पर अटक जाती है ,वो समझ जाता है ,ये काली शक्तियों का तोड़ है। अपनी शक्ति से उस करधनी की गांठें खोलने का प्रयास करता है किन्तु वो खुल नहीं पातीं ,तब तक कुंभर्क उसे अपने सम्मोहन में ले ले ता है। सम्मोहित ,शेफाली उस गुफा में प्रवेश करती है। तब एकाएक अघोरी चिल्लाता है -लो !महामहिम ,
आपकी मुक्ति का समय आ गया ,अब शीघ्र ही आप मुक्त होकर ,इस धरती पर राज करेंगे।

