Jail 2 [part 5 ]

अगले दिन ,अमृता ने हिमांशु की प्रतीक्षा की , किंतु वह नहीं आया। इस तरह उसका बुलाने पर भी, न आना ,अमृता को बुरा लगा। दृष्टि बोली -उसके चक्कर में ,आपको देरी हो जाएगी। ना चाहते हुए भी ,अमृता गाड़ी में बैठ गई, गाड़ी में बैठकर भी उसको लग रहा था -शायद ,वो अभी भी पीछे से आवाज देकर उन्हें रोक लेगा किन्तु वो नहीं आया। 

मन ही मन अमृता को उस पर क्रोध आ रहा था ,जब उससे अपनी भावनाएं नियंत्रित नहीं हुईं ,तब दृष्टि से बोली -ऐसा भी क्या व्यवहार ! मुझे लगता है, कुछ ज्यादा ही घमंडी है जब हमने बुलाया तो उसे आना चाहिए था। एक तो हमने उसकी सुविधा का ख्याल रखा ,कि जब दोनों को एक ही जगह जाना है ,तब क्यों न साथ चलें किन्तु वो तो अपने को न जाने क्या ,समझे बैठा है ?हमारी बात का मान भी नहीं रखा। 

जब दृष्टि ने अमृता को इस तरह परेशान होते देखा ,तो बोली -मैम ! हो सकता है ,आपसे पहले ही, पहुंच गया  हो। हो सकता है , आपके सामने आने में झिझक रहा हो ,आप इतनी बड़ी कलाकार और वो अभी नया  है। 


दृष्टि की बातों से , अमृता को थोड़ा ढाँढस बंधा ,बोली - उसने सोचा होगा ,मैं तो ऐसा नहीं सोचती कि मैं उसकी सीनियर हूँ ,या उससे ज्यादा अनुभवी ,कुशल हूँ ,अमृता मुस्कुराते हुए बोली। 

ऐसा आप सोचती हैं ,ये आपका बड़प्पन है किंतु दूसरा क्या सोचता है ? इसके विषय में तो आप, किसी से कुछ नहीं कह सकतीं। हो सकता है ,उसने सोचा हो ,ये उचित नहीं है आपने उसे बुलाया ,और वो दौड़ा -दौड़ा चला आये ,उसने सोचा होगा ,एक बार मैडम ने कहा नहीं कि मैं एकदम चला जाऊं ,जैसे वो इसी इंतजार  में था। 

दृष्टि की बात ,सुनकर मन ही मन अमृता सोच रही थी -मैंने तो यही सोचा था ,एक बार उससे कहूंगी ,वो दौड़ा चला आएगा और मैं चाहती भी यही थी किन्तु दृष्टि से बोली -तुम दूसरों की भावनाओं को बड़े अच्छे से समझती हो ,किसी ने क्या सोचा होगा ,या क्या सोच सकता है ?

जी मैम !मैंने किसी के मन में तो झांककर  नहीं देखा ,किन्तु मैं भी मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ ,तब मैं उस आधार पर सोचकर अंदाजा लगा सकती हूँ ,कि अपना मान बनाये रखने के लिए ,कोई क्या सोच सकता है ? दृष्टि की बात सही थी , हिमांशु उनसे पहले ही आया हुआ बैठा था। अमृता को गाड़ी से उतरता देख अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और उनके  करीब आया। उसे देखकर अमृता को फिर से क्रोध आ गया , अपने को शांत करते हुए बोली -तुम्हें मैंने बुलाया था तुम आए नहीं, मैं इंतजार करती रही। 

वह मैम! फिर अपनी गलती को सुधारते हो बोला - अमृता जी !मैं कुछ किसी कार्य  से ,पहले ही घर से निकल गया था उसी कार्य को करते हुए मैं ,इधर आ गया इसलिए आपके पास आ नहीं हो पाया। वैसे देखा जाये तो , वह अमृता से बचना चाह रहा था ,वह नहीं चाहता था उसके किसी व्यवहार से अमृता को अनुचित लगे , या वह कुछ गलत समझ बैठे। माना कि वह उसकी कला का प्रशंसक है उसकी सुंदरता का भी किंतु अब वो ,उसके साथ कार्य करता है 

अभी वह लोग बातें ही कर रहे थे ,तभी तेज बारिश होने लगी, मुंबई की बारिश तो है ही ऐसी जहां उम्मीद नहीं होती ,वहीं  हो जाती है , निर्देशक को थोड़ी परेशानी हुई , इस तरह तो शूटिंग कैंसिल करनी पड़ जाएगी,लेकिन अब क्या किया जा सकता है ? तभी उसके मानस पटल में एक विचार उत्पन्न हुआ क्यों न इस बरसात का लाभ उठा लिया जाए ,तब उसने बारिश का लाभ उठाने का ही प्रयास किया और बोला -एक दृश्य ,नायक -नायिका के साथ  बारिश का कर लेते हैं। कहते हुए ,उसने तैयारी करने के लिए कहा कैमरे वाले ने अपना  कैमरा संभाला, निर्देशक भी अपनी सीट पर बैठ गया। अमृता भी बारिश के लिए तैयार हो रही थी अपने वाटरप्रूफ मेकअप के साथ झीनी सफेद साड़ी में।

उन दोनो को दृश्य समझा दिया जाता है। अमृता  बाहर आकर ,शॉट देने के लिए तैयार थी, तभी दौड़ते हुए हीरो आता है ,शायद वो किसी से छुपते छुपाते आया है ,तभी उसे अमृता नहाते हुए दिखती है ,वो झड़ियो के पीछे से उसे नहाते हुए देखता है। अमृता अपने में खोई है और नहा रही है ,तभी हीरो सपनों में खो जाता है ,वो देखता है ,अमृता और वो प्यार में ,बरसात में भीगे हुए ,एक दूसरे के करीब आते हैं ,नाचते हैं ,उसका पानी में भीगा बदन देख ,हिमांशु जैसे अपने पर नियंत्रण नहीं कर पा  रह था। तभी कट,कट,कट,की आवाज से उसका ध्यान भंग होता  है। सभी टीम वाले हंस रहे थे। हँसते हुए ,निर्देशक बोला -बहुत अच्छा अभिनय ,तुम तो अपने किरदार में घुस ही गए थे और अमृताजी आप तो पहले से ही मंझी हुई कलाकार हैं। 

अब तो अमृता भी शर्माकर अपने कपड़े बदलने चली गयी। कपड़े बदल कर जब वो आई तो निर्देशक से बोली -आज मैं इसके आगे की शूटिंग नहीं कर पाऊंगी। अब  मुझे घर जाना चाहिए।


 शुटिंग करते हुए ,उन लोगों को चालीस दिन हो गए ,एक -दूसरे से नजर मिलाते और फिर चुराने भी लगते ,फ़िल्म चाहे चले या न चले ,किन्तु दोनों के मन एक -दूसरे की परवाह करने लगे। एक दूसरे को महसूस   करते और समझने का प्रयास करते हैं,अभी अपने विचारों  को ,अपनी भावनाओं को ,अपने से ही ,छुपाने का प्रयास करने लगे ,इस फ़िल्म का पूरी होना और हिट होना ,दोनों के ही जीवन में नया बदलाव ला सकती है। अमृता ने इतने दिनों से जो फ़िल्मों से दूरी बनाये रखी ,उसकी भरपाई होना आवश्यक है , यह फिल्मी दुनिया ,ऐसी ही है कुछ दिन महीने या साल दूरी बनाकर रखो तो लोग भूलने लगते हैं। हिमांशु के लिए तो यह,उसके करियर की पहली सीढ़ी होगी। यदि इस सीढ़ी  को सफलतापूर्वक पार कर देता है ,तब मंजिल की ओर आगे बढ़ेगा , जीवन की तरह ही, फिल्मी दुनिया में भी उतार-चढ़ाव लगे ही रहते हैं। किंतु इन उतार-चढ़ाव को कोई व्यक्ति कब तक झेल पाता है ?यह उसकी  हिम्मत पर उसके हौसले पर निर्भर करता है और सबसे  बड़ी बात उसकी जेब कब तक उसके खर्चों का बोझ झेलती है ?  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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