हवन की अग्नि ,तीव्र होती जा रहीं थीं ,उसकी ज्वालायें भड़क रही थीं ,वो महिला ,मदिरा के उन्माद में थी ,अघोरी, खोपड़ी के सामने ,मंत्र पढ़े जा रहा था। तभी अचानक वो उठा ,उसने उस महिला की गर्दन पर वार किया , उसके एक ही बार से ,उस महिला का धड़ से सर अलग हो गया , रक्त का गरम फ़व्वारा फूट निकला ,जो सीधे खोपड़ी पर जाकर गिरा ,जिसे खोपड़ी ने पीया , कुछ रक्त उस अघोरी ने, एक कटोरे में भर लिया। उस महिला का शरीर ,कुछ देर तक ,फ़ड़फ़ड़ाता रहा और कुछ ही देर में शांत हो गया। खोपड़ी को भोग लगाकर ,तब वो रक्त ,अघोरी और कुंभर्क ने पीया और उस महिला के शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके खाये। कुंभर्क के लिए ,ये कोई नई बात नहीं थी। उसके शैतानी रूप में आने पर इंसानों से और इंसानियत से उसका कोई नाता नहीं रह जाता है। तब अघोरी उसे , गुफा की गहराई में ले जाता है, न जाने कितनी सीढ़ियां नीचे जा रही थी ? जिन्हें आज तक कुंभर्क देखा ही नहीं था।
उसने अघोरी से पूछा- यह गुफा कितनी विस्तृत और गहरी है ? मैं आज तक अंदर तक आया ही नहीं , क्या आप इसके बारे में पहले से जानते थे ?
अघोरी ने उसे मुस्कुरा कर देखा, और आगे बढ़ गया, जैसे- जैसे वह नीचे जा रहे थे ,गहराई होने के साथ-साथ अंधकार भी बढ़ता जा रहा था। तब एक ही स्थान पर जाकर ,अघोरी ने मशाल जलाई, जो पहले से ही , वहां मौजूद थी। तब अघोरी वहां कुछ मंत्र उच्चारण करता है , और धीरे-धीरे लाल प्रकाश बढ़ने लगता है , उस लाल रोशनी में , कुंभर्क ने एक बहुत बड़ा दरवाजा देखा।
अघोरी ने उसे बताया, यह द्वार नरक लोक का है, पहले इसी द्वार से, शैतानी शक्तियां बाहर आती थीं , किंतु इस ग्राम के वासियों ने, इसको दैवीय शक्तियों से बांध दिया है जिसके कारण के द्वार ,हमेशा के लिए बंद हो गया है। हमें इसी द्वार को शेफाली के द्वारा खुलवाना है। तुम मेरी बात समझ रहे हो ना.......
कुंभर्क ने हाँ में गर्दन हिलाई , कुंभर्क को भी अपनी शक्ति पर अभिमान था, बोला -इसमें क्या है ? मैं इसे खोल सकता हूं ,कहते हुए उसके करीब गया , इससे पहले कि अघोरी उसे कुछ चेतावनी देता , उससे पहले ही उसके द्वार खोलने का प्रयास किया और जैसे ही उसे छुआ दूर जाकर गिरा।
तब अघोरी उसे समझाता है, उन लोगों ने हमारी शक्तियों को इस तरीके से कैद कर दिया है ? इस कारण से हम कुछ भी करने में असमर्थ हैं। हमें उन लोगों को उस कैद से बाहर लाना है और मुझे अपनी बहन 'चंडालिका 'की मौत का बदला भी लेना है।
यह चंडालिका कौन है ? उसकी मौत कैसे हुई , क्या कारण रहा ?
कुंभार्क के इतना पूछने पर, अघोरी जैसे पुरानी यादों में खो गया और क्रोधित होते हुए बोला - यह गांव आज भी उसके' श्राप 'को झेल रहा है , मैं इन्हें चैन से नहीं रहने दूंगा , अब यहां पर पिशाचों का और नकारात्मक शक्तियों का राज होगा, कहते हुए ,उसने दृढ़ निश्चय के साथ ,उस गुफा के धरातल पर अपना त्रिशूल खड़ा कर दिया। बाहर का वातावरण एकाएक बदल गया, उस गुफा के आसपास चमगादड़ घूमने लगे, काले बादल छा गए।
जिसको ब्रह्मानंद जी ने ,दूर बैठे महसूस किया और ,अपने इष्ट की आराधना करने लगे।
प्रतिदिन कुंभर्क और शेफाली मिलने लगे , दोनों ही ,अपने व्यवहार से एक दूसरे को बहला फुसला रहे थे, असलियत क्या है ?दोनों ही जानते थे। शेफाली मन ही मन सोच रही थी, मेरे साथ रहने से इसे कुछ भी क्यों नहीं हो रहा है ? इधर कुंभर्क अघोरी का दिया कवच होने पर भी , उससे थोड़ी दूरी बना कर रखता ,किंतु मन ही मन वह उसे चाहने लगा था। यही हाल शेफाली का था। वो जानती थी, कि उसे बाबा का कार्य करना है ,कुछ हद तक वो सफल भी हो रही थी। उस शैतान के मन में ,शेफाली का प्यार, अपना स्थान बना रहा था किन्तु इस बात की जानकारी ,''कुंभर्क ''अघोरी को नहीं होने देना चाह रहा था ,वो नहीं चाहता था ,कि अघोरी को किसी भी प्रकार की भनक लगे ,अघोरी का क्रोध ,हो सकता है शेफाली पर टूटे , हो सकता है ,उसे कोई नुकसान भी पहुंचा दे। इसीलिए जब भी उससे मिलता तो ,पत्थर के पीछे के उसी ''मायाजाल ''में दोनों कैद हो जाते।
अघोरी भी समझ नहीं पा रहा था ,आखिर यह लोग कहां चले जाते हैं ?जो मैं अपनी शक्ति से उनसे जुड़ नहीं पा रहा। प्रतिदिन शेफाली को अपनी गुफा में बुलाने के लिए कुंभर्क से कहता है , आखिर कब तक कुंभर्क ,शेफाली से छुपाता , उसका हृदय प्रेम से सराबोर हो चुका था। वह शेफाली को भी बचाना चाहता था और अघोरी को भी क्रोधित नहीं करना चाहता था। तब एक दिन उसने शेफाली से कह दिया -तुम मुझे जो समझती हो या मैं जो तुम्हें दिखलाई देता हूं वह मैं नहीं हूं। मैं शैतानी शक्तियों का उपासक हूं।
मैं यह जानती हूं ,शेफाली ने सहजता से उत्तर दिया।
शेफाली के मुंह से यह बात सुनकर ,कुंभर्क आश्चर्यचकित रह गया ,उसने उससे दुबारा पूछा -क्या तुम जानती हो ?
हां ,जब पहली बार तुमसे मिली ,तब मुझे भी कुछ अलग ही एहसास हुआ था, तब मेरे मैंने अपने गुरु कहो या बाबा उनसे यही प्रश्न किया था ,तब उन्होंने अपनी शक्तियों के माध्यम से मुझे ,तुम्हारे विषय में सब बतला दिया था।
तुम्हें मुझसे डर नहीं लगा ,कुंभर्क ने प्रश्न किया।
डर कैसा ?जिसे हम प्यार करने लगते हैं ,उसका चाहे कोई भी रूप क्यों ना हो ?वही अच्छा लगता है।
कुंभार्क को, शेफाली से ऐसे जवाब की उम्मीद ही नहीं थी ,तब शेफाली ने पूछा -क्या तुम भी, मुझसे प्रेम करते हो ? या फिर अघोरी के कारण ही यहां आए हो। कुंभर्क उसकी तरफ आश्चर्य से देख रहा था ,तभी शेफाली ने उसे बताया -'वह अघोरी तुम्हारा हितैषी नहीं है ,वह तुमसे अपना कार्य सिद्ध करना चाहता है, तुम्हारे इस रूप का कारण भी वही है ,उसी ने तुम्हारे माता-पिता को छला और उन्हें धोखा दिया है।
कुंभर्क सोच रहा था -यह मेरे विषय में ,मुझसे भी ज्यादा जानती है ,यह आखिर है ,कौन ?

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