Jail 2 [part 2]

अरे ,मैम !आप यहाँ ....... अमृता  ने मुड़कर देखा ,उसे लगा, जैसे कोई उससे ही ,कह रहा था। 

जी..... कुछ भी न समझते हुए ,अमृता ने पूछा -आप मुझसे बात कर रहे हैं। 

और नहीं तो क्या ? यदि मैं गलत नहीं हूँ तो आप, वही मशहूर अभिनेत्री अमृता देवी जी ही हैं न..... 

जी आप सही हैं ,अमृता ने अपना कोई प्रशंसक समझकर ,उसे मुस्कुराकर जबाब दिया। 

मैम मैं ,आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ ,मैंने आपकी सभी फिल्में देखीं हैं ,जबसे मैंने होश संभाला है  ,आपको ही देखा। आपके साथ ही सपने देखे हैं । आप जितनी सुंदर पर्दे पर नजर आती हैं ,उससे कहीं अधिक सुंदर हैं ,वो अपनी भावनाओं को छिपा नहीं पा रहा था। 

अमृता मुस्कुराई , क्या कह रहे हैं ?आप !



जी ,मेरा मतलब है कि मैंने जब से आपको देखा है तब से आपके साथ ही फिल्मों में काम करने के सपने देखता आया हूँ। अमृता आगे बढ़ने लगी, तभी वह बोला अगर आपको कोई परेशानी ना हो तो कुछ देर के लिए मेरे साथ बैठ सकती हैं। कृपया ,मैम !थोड़ी देर के लिए ,थोड़ी देर के लिए , वह खुशामद भरे  लहजे में बोला। और  एक कुर्सी पर अमृता को बैठने के लिए इशारा  किया। 

मैम  आपको अभी और भी कई कार्य हैं। आपकी मीटिंग भी है ,आपको जाना भी  है ,दृष्टि  ने उसे इशारा किया। अमृता ने देखा, वह छह  फुट का लंबा तगड़ा, सुंदर सजीला नौजवान था। 

प्लीज मैम ! वह फिर से बोला। 

अभी मैडम को, एक मीटिंग में जाना है बाद में मिलिए 

अमृता को रुकते न देख कर , तब उसने अपनी जेब से एक रुमाल निकाला और बोला -मैम ! इस पर अपने हस्ताक्षर तो लिख ही सकती हैं। कहते हुए उसके सामने वह रुमाल फैला दिया , और अपनी जेब से एक पैन  निकालकर भी उसके सामने रख दिया। अमृता मुस्कुराई और उसने मुस्कुराते हुए रुमाल पर अपने हस्ताक्षर कर दिए।' विद लव 'लिखकर......  वह तो जैसे कृतार्थ हो गया। धन्यवाद मैम ! उसने बड़े सलीके से बड़े तहज़ीब  से,झुककर उसको अभिवादन किया। 

उसके इस व्यवहार से , अमृता भाव विभोर उठी, मन ही मन सोच रही थी - आज के समय में इतने सभ्य व्यक्ति कहां दिखाई देते हैं। किसी अच्छे परिवार का ही लड़का होगा , उसका व्यवहार उसके दिल को छू गया , तभी वह सोचने लगी कुछ नाम तो बताया था उससे क्या नाम था उसका ! सोचते हुए दृष्टि से पूछा  - क्या नाम बताया था ?उसने !

जी मैम ! मैंने ध्यान नहीं दिया , ऐसे मनचले तो मिलते ही रहते हैं ,आप भी  न किस की बातें सोचने लगीं। 

सोच नहीं रही हूं मैं उसके व्यवहार को स्मरण कर रही हूं , उसका व्यवहार कितना सरल और सादगी पूर्ण था ?

आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए ,वह ऐसा कर रहा होगा, सृष्टि लापरवाही से बोली -मैम'' खन्ना सर '' का फोन भी आया था , उन्होंने कहा है -कि कुछ दृश्य , अभिनेता और अभिनेत्री दोनों के ही एक साथ लेने हैं , उसके लिए आपको एक अच्छी लोकेशन पर बुलाया है। 

ठीक है हम चलेंगे , तुम उनसे उस जगह का पता ले लेना। 

अमृता समय से पांच  मिनट पहले पहुंच गई , अभी उसके पास समय था, इस पिक्चर के अलावा उसके पास अभी और कोई फिल्म नहीं थी , एक -दो  फिल्म के लिए, प्रस्ताव आए हुए थे किंतु उनमें  उसकी मुख्य भूमिका ना होने के कारण ,उसने उन्हें ठुकरा दिया। तब उसने सोचा -मैं ,अपनी कला का बेहतरीन उदाहरण इसी फिल्म में डाल दूंगी ताकि अन्य फ़िल्म बनाने वाले , मेरी कला को जानें , और मुझे अपनी फिल्मों में काम दें। तभी फ़िल्म का निर्माता आ गया और बोला -आज आपको ,नाव में हीरो के साथ बैठकर ,प्यार भरे दृश्य ,फिल्माने हैं। देखिये ! एक बार में ही ,दृश्य बेहतरीन हो जाना चाहिए। 

जी ,मेरा पूर्ण प्रयास रहेगा ,कहते हुए ,अमृता बोली -अभी तक तो मैं अपने ''हीरो ''से भी नहीं  मिली हूँ ,उस दिन के रीटेक को ध्यान में आते ही, व्यंग्य से मुस्कुराते हुए बोली। 


कुछ ही देर में वह ,आने वाला होगा उससे भी आप मिल लीजिए वह बहुत ही सुलझा हुआ और व्यवहारिक लड़का है, अच्छा कलाकार भी  है , बाकी आपको दृश्य समझा दिए जाएंगे, कहकर वहां से चला गया। 

मन ही मन ,अमृता सोच रही थी -नया लड़का और आने में ,इतना समय लगा दिया ,हम पुराने होकर भी समय से पहले आये बैठे हैं। आपको बुलाया गया है , एक लड़का आकर अमृता को सूचना देकर जाता है। 

अमृता झीनी सी ,श्वेत रंग की साड़ी में ,उस तालाब के करीब आकर खड़ी हो जाती है ,उसके काले  घने ,खुले बाल ,उसकी सफेद साड़ी पर ,कुछ अधिक ही काले नजर आ रहे थे , सफेद फूलों से ही उसका शृंगार किया गया था। वो किसी परी  की तरह लग रही थी ,किन्तु उसके बनाव शृंगार को देखकर ,उस फ़िल्म के निर्देशक ने ,मना कर दिया और बोला -नहीं -नहीं ,यह सही नहीं है, साड़ी !आजकल साड़ी कौन पहनता है ? आज की फिल्मों की मुख्य नायिका है , हमें कुछ अलग दिखाना है, कहते हुए उसने, उस दृश्य को थोड़े समय के लिए पीछे टाल दिया ,जब तक अमृता पुनः तैयार नहीं हो जाती  , अबकी बार उसके लिए एक गाउन  लाया गया था। गाउन बहुत ही भारी, सफेद शानदार कपड़े से बना हुआ था , बाजू पर नेट [जाली ] लगी हुई थी। जब अमृता तैयार  होकर आई, तब उसे देखकर निर्देशक खुश हो गया , वह खुद के लिए भी महसूस कर रही  थी ,जैसे कि वह एक प्रिंसेस है। 

तभी पीछे से एक आवाज आई -अरे मैम !आप...... यह आवाज अमृता ने आज दूसरी बार सुनी थी , उसी प्रकार उसने पीछे घूम कर देखा तो ,उसके चेहरे पर मिले-जुले भाव थे, जो लड़का उसे ताज होटल में मिला था। वह घबरा सी गई, उसने सोचा -यह मेरा पीछा करते हुए ,यहाँ तक भी आ गया। यह ,यहां शूटिंग में कुछ हंगामा ना कर दे , उसे देखकर अमृता को खुशी तो हुई किंतु साथ ही परेशानी भी महसूस हुई। इसे इस वक्त यहां नहीं आना चाहिए था, वह मन ही मन सोच रही थी। 

तभी उसके निर्देशक की आवाज आई,' हिमांशु ''तुम सही समय पर आ गए , अब तुम अपनी हीरोइन को लेकर उस नाव में चले जाओ !

अमृता ने प्रश्न सूचक दृष्टि से अपने निर्देशक की तरफ देखा, उसके देखने के अंदाज  से ही ,वह समझ गया कि वह क्या कहना चाह रही है या पूछ रही है ? और बोला -हां ,यही तुम्हारी फिल्म का हीरो है ,'' हिमांशु ''

''हिमांशु'' खड़ा मुस्कुरा रहा था , अमृता के करीब आकर बोला- आज मैं ,भगवान से कुछ और भी मांगता तो मिल जाता, मुझे नहीं मालूम था कि आप ही मेरी हीरोइन हैं। मैं तो आपका बरसों से प्रशंसक रहा हूं , और आज जैसे मेरा सपना पूर्ण हो गया , कहते हुए उसने , अमृता का हाथ पकड़ा और नाव की तरफ बढ़ गया। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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