Shrapit kahaniyan [part 68]

शेफाली ,ने उन कॉलिज के लड़कों को ,समझाया और उन पर जो' काला साया' था ,जो उन्हें लड़ने के लिए उकसा रहा था ,उसे हटाया ,उनके जाने के पश्चात ,शेफाली ने देखा ,कोई तो है ,जो उस पर नजर रखे हुए है ,किन्तु जबसे शेफाली बाबा से मिली है ,तबसे ,उसे अपने जीवन का उद्देश्य मिल गया है। 

किन्तु सभी इस बात से अनजान हैं , इस धरती पर, 'औघड़ बाबा 'नामक काली शक्ति उतर चुकी है , उसका त्रिशूल इस जमीन की मिट्टी पर अपनी जगह बना चुका है , इसके कारण वहां के आसपास की सारी हिम पिघलकर, जल में परिवर्तित हो रही है। अब अघोरी और इंतजार नहीं कर सकता था , उसने स्वयं ही उस पृथ्वी पर आकर, आते ही ,अपना प्रकोप दिखला दिया। लोगों के अंदर अजीब सी बेचैनी हो रही थी, कुछ लोग बिना बात ही  लड़ने लगते थे। 


शेफाली जिसको देख रही थी वह अचानक से गायब हो गया किंतु जैसे ही वह पलटी, एक दुपहिए पर सवार , व्यक्ति उसके सामने आकर खड़ा हो गया , शेफाली ने उसकी तरफ देखा तो देखती ही रह गई, उसकी नजरों में अजब सी कशिश थी , उसने पूछा -कैसी हो ?

शेफाली ने जवाब दिया- ठीक हूं। 

मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूं ,

मैं भी...... कहते हुए , शेफाली उसकी  मोटरसाइकिल पर बैठ गई , अगर कोई देखे तो सोचे ,कि यह प्यार है या फिर सम्मोहन !  वह मोटरसाइकिल सवार शेफाली  को लेकर , जैसे हवा में ,उड़ चला। शेफाली  हवा में उड़ रही थी और बहुत खुश थी, जहां पर पहाड़ियां थीं , वहां पर दोनों ही पैदल चलने लगे। ऐसा लग रहा है ,दोनों जन्मों से ही नहीं मिले हैं , एक दूसरे का साथ पाने के लिए व्याकुल हो रहे थे। प्यार तो इन दोनों का पिछले जन्म का भी है, किंतु पिछले जन्म वाले प्यार में भी खोट था, और अभी भी स्वार्थ छिपा है। दोनों में ,प्यार है किन्तु दोनों का प्यार ही विपरीत दिशा की ओर भागता है। आज भी दोनों साथ हैं, किंतु एक अघोरी के कहने पर, उसके करीब आया, दूसरी तरफ शेफाली बाबा के कहने पर उसे ढूंढ रही थी। दोनों ही एक दूसरे के साथ हैं एक दूसरे के करीब हैं किंतु दोनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं ,दिल मिलना चाहते हैं किन्तु परिस्थितियाँ विपरीत हैं। उस सम्मोहन में भी ,शेफाली को अपना पिछला जन्म स्मरण है ,वो कुंभर्क  से कहती है -तुम जानते हो ,तुमने शेखर के रूप में भी मेरा कहा नहीं माना था , तुमने मेरे परिवार पर  तंत्र मंत्र किया किंतु मेरा कहा नहीं माना , उसी का दंड तो तुम्हें इस जन्म  में मिल रहा है। 

कुंभर्क को अपने पिछले जन्म की  कोई स्मृति नहीं थी ,अघोरी नहीं चाहता था, कि कुंभर्क  को कुछ भी पता चले, या उसे मेरे उद्देश्य का पता चले,अपनी' दिव्य दृष्टि 'से सब देख रहा था ,तभी उसने ऐसा मंत्र फूंका ,जिसकी तरंगें आकर शेफाली को  लगी ,जिसके कारण उसका सम्मोहन टूट गया। सम्मोहन टूटते ही , उसने इधर -उधर देखा और सोचने लगी ,मैं यहाँ कैसे आई ?उसने घूमकर देखा ,सामने वही हुडी वाला लड़का था ,उसे देखकर बोली -तुम..... उसका तो जैसे सपना पूरा हो गया अपने आप से ही बोली -आज तो भगवान से जो भी मांगती वो भी मिल जाता ,तब कुंभर्क से बोली -हम यहाँ कैसे आये ?

कुंभर्क ने उसकी तरफ देखा ,वो  समझ गया ,इसका सम्मोहन टूट गया है ,तब कुंभर्क ने उससे पूछा -क्या तुम ठीक हो ?

हाँ ,हाँ मुझे क्या हुआ है ? किन्तु एक बात समझ में नहीं आई ,हम यहाँ कैसे आये ?

तुम शायद ,भूल गयीं ,जहाँ कुछ लोग झगड़ रहे थे ,वहीँ तुम भी थीं किसी ने तुम पर ,आक्रमण किया जिसके कारण तुम बेहोश हो गयीं ,और मैं उन लोगों से ,बचाकर इधर ले आया ,अब तुम ठीक हो। 

हाँ ,मुझे क्या हुआ है ? शैफाली जानती थी ,कि वह झूठ बोल रहा है ,उसका साथ पाने के लिए शेफाली ने भी झूठ बोल दिया। वो उसका उद्देश्य जानना चाहती थी, कि मुझे इधर क्यों लाया है ?कुंभर्क का अभी इंसानी रूप उसके सामने था ,कुंभर्क को तो वो पहले ही पसंद आ गयी थी। रेशमी लम्बे बाल ,बड़ी -बड़ी पनीली आँखें ,नारंगी जैसे होंठ ,उस पर उसकी चाल उसका व्यवहार ,सबकुछ उसको मदहोश करने के लिए काफी था। वैसे तो उसका एक दूसरा रूप भी है,शैतानी रूप  किन्तु उस शैतान को भी शेफाली का रूप अपने वश में करने के लिए काफी था। 

क्या देख रहे हो ?शेफाली ने कुंभर्क से प्रश्न किया। 

कुछ नहीं ,

कुछ तो है ,मुझे बतलाओगे नहीं ,शेफाली उससे निर्भीकता से बातें कर रही थी ,उसके में कुंभर्क के साथ होने से या किसी अनजान व्यक्ति के साथ रहने से किसी भी प्रकार का भय नहीं था।  

काश ! मैं तुम्हें इसी तरह देखता रहूं ,

देखो ,न..... किसने रोका है ?कहते हुए ,उसके सामने आ बैठी। वो सोच रही थी , मैं भी उसे पसंद करती हूं यह भी मुझे पसंद करता है किंतु न जाने दोनों के बीच, कैसा अंजाना सा समझौता है ?

मन ही मन कुंभर्क अघोरी के विषय में सोच रहा था ,तभी उसके कानों में आवाज गुंजी इस लड़की को यहाँ लेकर आओ !किन्तु कुंभर्क अघोरी की बात अवमानना कर रहा था ,तभी कुंभर्क को कुछ सूझा ,उसने अपनी शक्ति से एक पहाड़ी में एक ऐसा स्थान बनाया ,जहाँ अघोरी की दृष्टि न पहुंच सके। उस स्थान की रचना करके, शेफाली से बोला -कितनी प्यारी जगह है ,क्या तुमने देखी है ?


नहीं ,मैं आजतक इस स्थान पर आई ही नहीं ,चलो ,चलकर देखते हैं ,कहकर दोनों उस गुप्त द्वार से निकल जाते हैं। वे तो जैसे किसी और ही दुनिया में आ गए ,मधुमास की तरह वहाँ ,हर जगह पुष्प ही पुष्प थे ,एक अलग ही दुनिया थी ,सुगंधित वातावरण था ,ये कुंभर्क का मायाजाल था ,जो शेफाली को बहुत पसंद आया। अब तो जैसे  सच में ही ,उन वादियों के सम्मोहन में वो खो गयी ,तुम कितने अच्छे हो ?कहकर शेफाली उससे लिपट गयी। 

कुंभर्क की धड़कने भी बढ़ने लगीं। ये सब तुम्हे अच्छा लगा ,कुंभर्क ने पूछा। 

बेहद ,उसके गले लगे ,लगे ही बोली। कुछ देर इसी तरह एक -दूसरे में खोये रहे ,तभी कुंभर्क को याद आया रात्रि होने वाली है ,शेफाली से बोला -अब चलते हैं ,तुम्हारी मकान -मालकिन तुम्हारी प्रतीक्षा में होंगी। 

हाँ ,वो तो है ,कहकर वो उस मायाजाल की दुनिया से बाहर आ गए ,अब कुंभर्क को शेफाली को सम्मोहित करने की आवश्यकता ही नहीं थी ,दोनों ही इन पलों में ,एक -दूसरेके प्यार में डूब चुके थे। दोनों ही एक -दूसरे को धोखा दे रहे थे किन्तु अपने आपको धोखा नहीं दे सके। लौटते समय शेफाली ने पूछा -अब कब लेने आओगे ? देखने में तो लग रहा था, कि वह यह कार्य बाबा के कहने पर कर रही है किंतु वह कुंभर्क  को सच में ही पसंद करने लगी  थी।  कुछ यही हाल कुंभर्क का भी था। दोनों वापस आ तो जाते हैं, किंतु एक दूसरे की यादों को अपने अपने साथ ले जाते हैं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post