Kuchh chehre hai !

 कुछ चेहरे नजर आते हैं, 'दर्द 'छलक जाते हैं। 

 ना देख, मेरे चेहरे की मुस्कान, दिल में  छाले उभर आते हैं।

 कैसे करें ?हाल ए बयाँ, कुछ फफोले हैं कभी-कभी रिस जाते हैं। 

  कुछ रिश्ते,नजर आते हैं ,वह दर्द दे जाते हैं। 

कुछ चेहरे नजर आते हैं ,दर्द छलक जाते हैं। 



दिल के तार न बजने देना, दिल के तार बजे तो...  गम के गीत बज जाते हैं।

दर्द की गहराइयों में डूबा है ,यह दिल !कैसे कहें?मुँह पर ताले लग जाते हैं। 

 कुछ रिश्ते,नजर आते हैं ,वह दर्द  दे जाते हैं।

कुछ चेहरे हैं, जिन्हें देख ,दर्द छलक जाते हैं। 

अपना ही समझ ,दिल की गहराइयों में ही ,कुछ दर्द हम छुपा जाते हैं। 

हमें आदत नहीं ,दुखड़ा  रोने की ,बाहर से तो हम खुश नजर आते हैं। 

कुछ रिश्ते हैं जो करीब हैं, दूर नजर आते हैं। 

कुछ चेहरे हैं ,जिन्हें देख ,दर्द छलक जाते हैं।

कह नहीं पाते हैं, दर्द दिल का...... वो स्वयं  ही आंखों से छलक जाते हैं। 

समेटे बैठे हैं, रिश्तो की गठरी , दर्द देने से , फिर भी बाज नहीं आते हैं। 



मेरी कमाई -

रिश्तो को सहेजा है,

दर्द को समेटा है ,

प्यार को बांटा है ,

 कर्म किया बहुत,

लोगों से मिला झांसा है। 

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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