Jail [part 104]

एक सुरीली बांसुरी की आवाज के साथ ही, अमृता का फोन घनघना  रहा था ,उसने अपने फोन में ,बांसुरी की मधुर धुन ही डाली हुई थी। अभी वो अलसाई हुई थी ,अभी नींद की खुमारी छाई  थी ,फोन उठाकर देखा ,सोच रही थी -इतनी सुबह किसका  फोन आ गया ? नाम पढ़ा ,फोन उठाते ही उसने कहा -हेलो ! 

उधर से  एकदम से कड़क और तेज आवाज आई - यह क्या हो रहा है ?अमृता जी!

अमृता , अनजान बनते हुए बोली -क्या हुआ ? सर!

क्यों ?क्या तुम कुछ जानती नहीं ,तुमने फिल्म में काम करने से क्यों इंकार कर दिया  ? खन्ना  गुस्से से बोले। 

अब मैं क्या बताऊं ?सर !आप ही देख लीजिए ,उसमें नायिका के कई सीन ऐसे हैं ,जो मुझे पसंद नहीं आए।


 

क्या पसंद नहीं आया ?क्या पसंद नहीं आया ?वो झल्लाते हुए बोला। 

उसमें कुछ दृश्य ऐसे हैं, जिनमें बहुत ही कम कपड़े पहनने होंगे,

तो क्या....... ? कहानी की डिमांड है , कहानी  की मांग यही है ,तो इसमें हम क्या कर सकते हैं ?

 किंतु सर !आपने तो बताया ही नहीं था, कि ऐसा भी कुछ हो सकता है ,या मुझे कपड़े कम करने होंगे। 

तुम आकर मुझसे मिलो ,अभी आकर ,मुझसे मिलो ! मुझे तुमसे बात करनी है ,खन्ना झल्लाते  हुए बोला । 

अमृता बिना इच्छा के तैयार होती है और नाश्ता करके, विकास खन्ना से मिलने के लिए निकल जाती है। 

जब उसके दफ्तर में पहुंची, उस समय वह उसका बेचैनी से  इंतजार कर रहा था। उसे देखते ही बोला-पहले तो तुम फिल्म मांग रही थी,जब फ़िल्म मिली तो अब ,एकदम से इंकार कर दिया  ,यह क्या तरीका है ?

सर ! यह बात, मैं पहले ही , फोन पर बता चुकी हूं। 

क्या कपड़े -कपड़े लगा रखा है ? तुम कौन सी, दुनिया में जी रही हो ? बिकनी पहनना, यह कोई नई चीज नहीं हैं ,अब आम बात है, तुम एक कलाकार हो, कलाकार को अपनी  कला में ,जैसे भी आवश्यकता होगी वह उस कहानी में , जान डालने के लिए कुछ भी करेगा। 

सर कलाकार तो हूं ,किंतु कपड़े पहन कर भी तो ,अपनी कला दिखाई जा सकती है। 

कला अपनी जगह है ,और ग्लैमर अपनी जगह ,आज की पब्लिक ,आज के लोग ग्लैमर भी देखना चाहते हैं और जब कहानी में, कहानी के साथ-साथ ग्लैमर का तड़का लगेगा तो कहानी, सुपर -डुपर हिट होगी। तुम खुद सोचो ! एक तो तुम इतनी खूबसूरत हो, तुम्हारा मक्खन जैसा बदन और जो बड़ी स्क्रीन पर झीनी साड़ी में भीगा बदन आएगा, लोग पागल हो जायेंगे ,वाह-वाह कर उठेंगे  , दिल से आहें  निकलेंगी ,आँहें.....  उसे देखने के लिए ही तो ,वह लोग फ़िल्म देखने जाएंगे। 

नहीं सर ,इससे पहले मैंने कोई ऐसा सीन नहीं किया है। 

तो अब करो, जो काम पहले नहीं किया ,वह अब करो !आगे बढ़ना है, अब तुम कुंवारी लड़की तो हो नहीं, कल को तुम्हारे रिश्ते नहीं आएंगे तुम एक छोड़ी गई ,महिला हो। 

सर !छोड़ी गयी नहीं ,वरन मैंने उसे बेइज्जत करके घर से निकाला है ,इस कहानी का मेरे निजी जीवन से क्या ताल्लुक ?

क्या ,फ़र्क पड़ता है ? उसने तुम्हें छोड़ा हो या तुमने उसे छोड़ा हो ये दुनिया है ,जो दिखता है ,वही सच मान लेती है ,पर्दे के पीछे की सच्चाई कौन जानता है ?पर्दे पर जो दिख रहा है ,वही उसके लिए सच है।  इस कहानी से ,तुम्हारी ज़िंदगी का कोई ताल्लुक नहीं है,लोगों को पता चलेगा , तभी तो हमें पता चलेगा ,उन लोगों की तुम्हारे प्रति भावनाएं कैसे जुड़ती हैं ? कुछ लोग तुम्हें बेचारी समझ कर तुम्हारी फिल्म देखना चाहेंगे , कुछ लोग तुम्हारा ग्लैमर देखने आएंगे। 

इसका अर्थ है ,आप मेरी जिंदगी को भी, इस फिल्म के माध्यम से भुनाना चाहते हैं। 

अगर तुम नहीं चाहोगी तो नहीं होगा, किंतु तुम खुद सोचो !तुम एक  कलाकार हो, अपनी कला से पैसा कमाना चाहती हो, मैं एक बिजनेसमैन हूं ,मैं भी अपनी कला द्वारा पैसा ही कमाना चाहता हूं, किसी को हमसे हमदर्दी नहीं होगी ,कल को हम सड़क पर आ  गए तो किसी को हमदर्दी नहीं होगी। आज तुम दिख रही हो ,चल रही हो ,लोग तुम्हें सर पर उठा लेंगे ,कल को तुम्हारे पास पैसा नहीं है , फ़िल्म नहीं है ,कोई तुम्हें  देखेगा भी नहीं , न जाने किन गलियों में भटक रही होंगी ?मैंने ऐसे बहुत से लोग देखे हैं ,जो आज आसमान की बुंलदियों पर हैं और जब गायब हुए ,चुटकी बजाते हुए ,उनका पता भी नहीं ,कहाँ गए ?उसने अपना जीवन दर्शन अमृता को समझाया। अगर यह फिल्म सुपर -डुपर हिट हो गई ,तुम नोटों में खेलोगी  नोटों में , उसे समझाते हुए खन्ना बोला। अब तुम ही देखो , तुम्हारा अपना कौन है? कोई कहने सुनने वाला भी नहीं है कोई तुम्हें रोकने वाला भी नहीं है।  अपनी मेहनत से ही  तुम्हें कमा कर खाना है और अगर इस फ़िल्म  से तुम सुपर हिट हो जाती हो तो ,तुम्हारे दरवाजे पर ,फ़िल्म बनाने वालों की लाइन लग जाएगी ,तब  लोग तुम्हें और अधिक जानेंगे। 

अमृता सोच रही थी -हालाँकि खन्ना स्वार्थी इंसान है किन्तु कह तो ठीक ही रहा है ,कोई मुझे खाने को नहीं देने आएगा ,ना ही ,अब मेरे परिवार के ऐसे  लोग हैं , जो मेरे इस तरह के  दृश्यों को देख कर शर्मिंदा होंगे मुझे अपने काम पर ध्यान देना चाहिए ,उसको और बेहतरीन बनाना चाहिए हालांकि इसका लाभ खन्ना भी उठाना चाहता है तो मैं भी क्यों ना ,इसका लाभ उठाऊ,यदि इसे इस पिक्चर से इतनी उम्मीदें  हैं  ,इसके कामयाब होने पर इतना विश्वास है। तब मैं ही क्यों कुछ सोच रही हूँ ? यदि यह पिक्चर सुपरहिट होती है ,तब इसे  करने में कोई बुराई भी नहीं है ,वह अपने मन को समझा लेती है। यह भी पैसा कमाना चाहता है,मैं भी पैसा कमाना चाहती हूँ। 

खन्ना ने ,घंटी बजा कर' दो कॉफी 'का आर्डर दिया, कॉफी पीते हुए पूछा -तो तुमने क्या सोचा?

सर ,मैं तैयार हूं। 

हां, यही तो मैं चाहता था , हम कलाकार हैं, अपनी कला बेचते हैं, किंतु बिकेगा तो वही जो लोगों को पसंद आएगा अमृता को समझाते हुए बोला। 

ठीक है सर! मैं तैयार हूं, अमृता ने अपना आखिरी फैसला सुनाया।आप भी अपनी बात मनवा ही लेते हैं ,ये भी एक सफल व्यापारी की निशानी है। किंतु इस फिल्म में मेरा साथी कलाकार कौन होगा ?

जब तुममें अभिनय का हुनर है तो ,उस हुनर को बेचने का हुनर हम भी रखते हैं ,कहकर मुस्कुराया। तब सोचते हुए बोला -कोई नया लड़का है , तुम्हारी ही इमेज को देखते हुए ,उसी के हिसाब का मैंने तुम्हारे लिए हीरो चुना है ,छह  फुट का स्मार्ट लड़का है ,तुम देखना, तुम दोनों की जोड़ी पर्दे पर धूम मचा देगी। 

जी सर, शूटिंग कब से हैं ?

 अभी जो सोमवार आता है उसी पर हम अपनी फ़िल्म का' श्री गणेश ' कर देते हैं। 

ठीक है सर ! अब मैं आपको शूटिंग पर मिलती हूं कहकर अमृता वापस आ गई। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post