Shrapit kahaniyan [part 67 ]

 बाबा ब्रह्मानंद जी, के सहयोग से शेफाली, अपने पिछले जन्म में घुम आई और अपने पिछले जन्म के प्रेमी को भी देख आई। वापस आकर उससे बड़ी सहजता से, बाबा को संपूर्ण बातें बताईं , सभी बातें बताकर ,जब वह जाने लगी ,तब बाबा को न जाने क्या सूझा ?उन्होंने पूछा -शेफाली बेटा !  क्या तुम्हारी तनिक भी इच्छा नहीं हुई ,अपने पिछले जन्म के माता-पिता को जानने की , उनसे मिलने की ,कौन थे ,कैसे थे ?

बाबा की बात सुनकर ,शेफाली एक बार को  ठहर सी गई , तब  बोली -बाबा ! उनको जानने क्या लाभ हो जाता ? इस जन्म में भी ,माता पिता के साथ ,कुछ ही दिन रही , पिछले जन्म के माता-पिता से मिलती ,न जाने क्या एहसास होता? सुख भी मिल सकता था , हो सकता है ,दुःख ही मिलता , समझ नहीं पाई, शायद उनसे मिलकर दुख ही होता ,उन्हें भी, इसी तरह छोड़ कर आना पड़ता ,उनके साथ तो मैं रह नहीं सकती थी ,वापस तो आना ही था। शायद ,मेरे जीवन में माता-पिता का सुख है ही नहीं , एक भाई  था वह भी नहीं रहा ,अब तो मैं पूर्णतः  अकेली हो गई हूँ , कहकर वो उदास हो उठी। 


बाबा ने कहा -तुम अकेली कहां हो ?हम सब तुम्हारे साथ है ना,  मानो तो, यह सारा संसार अपना है ,ना मानो तो ,अपने भी अपने नहीं हैं , शायद ,तुम इन्हीं अपनों के लिए इस धरती पर आई हो ,यह सभी तो तुम्हारे अपने हैं, जिनके लिए तुम्हें उस शैतान से बदला लेना है, उस शैतान को बदलना है। यही तुम्हारे जीवन का उद्देश्य है। ईश्वर की अनुकंपा है, उन्होंने तुम्हें , इस कार्य के लिए चुना। हर व्यक्ति के जीवन का एक उद्देश्य  होता है, तुम्हारा भी है, सबसे कठिन परीक्षा तो तुम्हारी अब है, जिससे तुम्हें लड़ना है और जीतना है। कहकर बाबा ने एक ताबीज उसके गले में डाल दिया। बोले- यह तुम्हारी हर तरह से रक्षा करेगा किंतु जब उससे मिलो तब इसको ना पहनना , इसके रहते वह तुम्हारे करीब नहीं आ पाएगा।

उसके करीब आने पर, यदि मुझे उससे खतरा हुआ तो मैं क्या करूंगी ? घबराते हुए शेफाली ने बाबा से प्रश्न किया। 

तुम्हारे पास एक और बहुत बड़ी शक्ति है ,वह है ,प्रेम की ,साहस की, कभी भी उस शैतान के सामने झुकना नहीं बल्कि झुकाने का प्रयत्न करना वह भी प्यार से...... 

बाबा! आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे वह कोई, साधारण सा इंसान  है और मेरे बहकावे में आ जाएगी , वह कोई छोटा बच्चा नहीं ,जिसे मैं बहका लूंगी ,वह एक शैतान है।

हां बेटा !तुम में इतनी शक्ति है ,तुम मां का रूप हो दुर्गा मां हो, तुम उस शैतान को हराओगी भी और झुका ओगी भी , मेरा विश्वास है ,वो अवश्य झुकेगा। तुम पर हमेशा ईश्वर की कृपा बनी रहेगी।

बाबा की बात सुनकर शेफाली ने उनके चरण स्पर्श किये  और बोली - अब मैं जाती हूं। 

अवतार ! इन दोनों को छोड़ आओ ! हमेशा सावधान रहना, अब वह अघोरी शांत  बैठने वाला  नहीं है उसकी योजना निष्फल हो गई है, वह अवश्य ही कुछ ना कुछ योजना बना रहा होगा।

आप निश्चिंत रहें ,मैं इन्हें सही स्थान पर छोड़ दूंगा , अवतार ने आश्वासन दिया।

अवतार उन्हें  लेकर, उनके घर की तरफ चल दिया, वह एक बालक के रूप में ,बर्फ के ऊपर फिसलता हुआ ,खेलता हुआ ,चल रहा था , तभी एक बड़ा आग का गोला उसके सामने आकर गिरा, यह देखकर तीनों आश्चर्यचकित रह गए , तब तीनो ही ,बर्फ की पहाड़ियों के पीछे छुप गए। यह देखने के लिए कि  जिसने भी आक्रमण किया है ,वह कौन है ?जो भी था ,छुपकर वार कर रहा था। अभी तक अवतार भी इतना सचेत नहीं हुआ था किंतु अब इसकी  गंभीरता को समझ गया था। उसने धीरे से शेफाली से कहा, क्या ?तुम ,उस व्यक्ति को देखकर अभी भी , पहचान सकती हो। 

हां ,लगता तो है , शायद मैं उसे पहचान लूंगी। 

तभी एक आवाज गूंजी, अबकी बार तुम लोग कामयाब नहीं हो पाओगे ,'' चंडालिका  के श्राप '' को तो झेल ही रहे हो , अपनी बहन की मौत का बदला मैं , तुम लोगों से अवश्य लूंगा , और यहां नरक का राजा आकर राज्य करेगा। तभी एक आग का गोला फिर से उनकी पहाड़ी के करीब आकर गिरा , वह तीनों उससे अलग छिटक गए, किंतु अब अवतार छुपा नहीं, और उसने उस बर्फ का पानी बना दिया जिससे वह अग्नि वहीँ शांत हो गयी।  

अवतार बोला-तुम जो कोई भी हो, ना ही पहले कामयाब हो पाए थे और ना ही अब कामयाब हो पाओगे। तुम्हारी बहन के श्राप को हम बरसों से झेल रहे हैं, किंतु हमारी शक्तियां अनंत हैं तुम हमें आगे बढ़ने से रोक नहीं पाओगे , हम धरती के नीचे रहकर भी , उसका सीना चीर कर तुम्हारी योजनाओं को हर बार ,विफल करने आएंगे। साहस है ,तो सामने आ जाओ ! तभी अवतार जोर जोर से हंसने लगा और हंसते -हँसते  उसका आकार भी बढ़ने लगा। बोला -तुम कैसे बाहर आ सकते हो ? तुम तो अंधकार के वासी हो , अंधेरा ही अंधेरा तुम्हारी जिंदगी में है , तुम जिस नर्क से आए हो ,उसी नर्क में तुम्हें वापस भेज दूंगा। जब दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आया , तब उसने शेफाली और उसकी मकान मालकिन को सबसे पहले सुरक्षित करना ही उचित समझा और वो उन्हें लेकर आगे बढ़ गया।

 शेफाली सोच रही थी, मुझे कैसे पता चलेगा ? पिछले जन्म का शेखर मुझे इस जन्म में न जाने किस रूप में मिलेगा ?

अगले दिन , वह कॉलेज जाती है , पढ़ने का तो सिर्फ बहाना था, अब तो उसे उस व्यक्ति से मिलना था, जिसके कारण इतने लोगों की जान पर बन आई थी और कई छात्रों की जान भी गयी ,हो सकता है ,मेरे भाई को भी..... आगे सोच नहीं पाई।  वातावरण फिर से परिवर्तित हो रहा था , कुंभर्क  के मन में ,अभी भी, उस अनजान लड़की के लिए आकर्षण बना हुआ था , इंसानी चेहरों में कुछ  शैतानी शक्तियां, कॉलेज के आसपास मंडरा रही थीं। आकाश में घने और काले बादल छाए हुए थे , दिन में ही रात्रि का एहसास हो रहा था , वातावरण में अजीब सी वहशत फैली हुई थी , कॉलेज के सभी अध्यापक- प्रधानाध्यापक सभी ने  बहुत विचार विमर्श किया और उसके बाद कॉलेज की छुट्टी कर दी, क्योंकि उन्हें कुछ भी ठीक नहीं लग रहा था न ही उनका पढ़ाने में मन था, पता नहीं ,सब के मनों में क्या हो गया था ? दिलो-दिमाग पर अजीब सा डर छा गया था। दूर से कहीं डरावने जानवरों की आवाजें आ रही थीं। कॉलिज से  बाहर आते ही , कुछ छात्र आपस में लड़ने लगे, उन्हें स्वयं ही नहीं पता कि वह क्यों लड़ रहे हैं ? झगड़ा बढ़ता जा रहा था , ऐसा लग रहा था वह एक दूसरे को मार देंगे , तभी, शेफाली उनके बीच में आ गई , शेफाली के बीच में आते ही ,वह सोचने पर मजबूर हो गए ,कि हम यह सब क्या कर रहे थे ? उस समय शेफाली के पास , बाबा का दिया हुआ  ताबीज ,उसने पहना हुआ था। उसने बारी-बारी से उनके हाथ पकड़े , और वह लड़के एकदम से शांत हो गए। उनके सिर पर जैसे कोई भारी बोझ पड़ा हुआ था , अब उतर गया शांत होकर वह लोग, अपने घर चले गए। 


ऐसी ही भीड़ में शेफाली ने एक संदिग्ध व्यक्ति को देखा, जो उसे ही देख रहा था , जब सभी लड़के चले गए तब शेफाली उसकी ओर बढ़ी, वह जानना चाहती थी, कि हुड़ी के पीछे, कौन छुपा हुआ है ? जैसे-जैसे वह उस व्यक्ति की तरफ बढ़ रही थी, वैसे -वैसे ही वह पीछे हटता जा रहा था। धुएं का बादल छाया और वह व्यक्ति गायब हो गया। शेफाली ने बहुत ढूंढा, किंतु वह कहीं नहीं दिखाई दिया। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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