बाबा ब्रह्मानंद जी ,को लगा- कि शेफाली को उनकी बातों पर विश्वास नहीं है, तब उन्होंने अपनी शक्ति से शेफाली की अंतर्दृष्टि खोली, ताकि वह अपना पूर्व जन्म देख सके, तब शेफाली अपने पूर्व जन्म में जाकर देखती है, कि वह एक चंद्रिका नाम की लड़की है और उसका प्रेमी जिससे वह प्यार करती है ,वह शेखर है। शेफाली शेखर का चेहरा देखना चाहती है, वह जानना चाहती है - कि अब वर्तमान में कौन उसका प्रेमी होगा ? वह देखती है, कि दोनों चंद्रिका और शेखर दोनों एक दूसरे से प्रेम तो करते हैं लेकिन शेखर अपनी मनमानियाँ बहुत करता है ,जिसके कारण चंद्रिका के परिवार वाले ,शेखर को पसंद नहीं कर रहे हैं, तब चंद्रिका उसे समझाने आती है और उसका कहना ना मानने पर क्रोध में चली भी जाती है, तब शेफाली को, कोई दूसरा दृश्य ही , दिखलाई पड़ता है। वह देखती है ,कि एक लड़का है जो एक तांत्रिक के साथ कुछ क्रियाएं कर रहा है। उसकी बातों को जानने के लिए वह थोड़ा उनके करीब जाती है। तब उसे पता चलता है कि यह लड़का और कोई नहीं शेखर ही है जो तांत्रिक बाबा से चंद्रिका के परिवार वालों पर सम्मोहित क्रिया करवा रहा था।
चारों तरफ अंधेरा था , सन्नाटा पसरा हुआ था, तब उसे कुछ मंत्र उच्चारण की ध्वनि सुनाई देती है , शेफाली उधर जाती है, तब उसने देखा ,कि एक लड़का, तांत्रिक बाबा से सम्मोहन क्रिया करवा रहा था। ताकि अपनी प्रेमिका के घरवालों को ,अपने 'सम्मोहन पाश ' में बांध सकें और अपनी शर्तों पर चंद्रिका से विवाह कर सकें। वह बाबा से कहता है- बाबा कुछ उपाय ऐसा कर दीजिए ताकि मेरी ससुराल वाले ,बस मेरा ही कहा माने।
बेटा यह उचित नहीं है, जब उनका सम्मोहन टूटेगा, तब वह तुम्हें माफ नहीं कर पाएंगे , इन शक्तियों का लाभ कभी भी अपने स्वार्थ के लिए नहीं उठाना चाहिए ,वो उसे समझाते हैं
कोई बात नहीं, तब तक तो चंद्रिका मेरी हो चुकी होगी ,वह लड़का निर्लज्जता से कहता है , उसे अपने इस कार्य के लिए तनिक भी अफसोस नहीं है।
वे लोग , तुमसे क्या चाहते हैं ? उन तांत्रिक बाबा ने प्रश्न किया।
कुछ नहीं वह चाहते हैं ,मैं ताउम्र मेहनत कर ,मशक्कत करके उनकी बेटी का भरण पोषण करूं, उन्हें लगता है मैं ,शायद उनकी बेटी को खुश नहीं रख पाऊंगा किंतु वह यह नहीं जानते कि मैं शीघ्र ही बहुत अमीर बनने वाला हूं।
तुम क्या कार्य करते हो? तांत्रिक बाबा ने शेखर से प्रश्न किया
फिलहाल तो कुछ भी नहीं करता किंतु अब आपका शागिर्द बन गया हूँ , आपसे शक्तियां प्राप्त करके, उन शक्तियों के बल पर मैं बहुत पैसा कमाउंगा ।
यह सब इतना आसान नहीं, जितना तुम समझ रहे हो, शक्तियां पाना इतना आसान नहीं है और वह भी ''काली शक्तियां'' तुम संभाल नहीं पाओगे, यह तुम जैसे साधारण लोगों के लिए नहीं है। यदि तुम उस लड़की से प्यार करते हो तो मैं तुम्हारी इतनी ही सहायता कर सकता हूं ,कि उसके परिवार वाले तुम्हें अपना दामाद बना लें , तुमसे विवाह के लिए तैयार हो जाएं।
अभी आप इतना ही कर दीजिए ,आपकी बहुत मेहरबानी होगी खुशामद भरे शब्दों में शेखर ने कहा।
शेफाली देखकर सोचने लगी -कि पिछले जन्म में भी ऐसा ही इंसान था, आलसी, लालची पिछले जन्म में काली शक्तियों के प्रति उसकी जिज्ञासा थी, वह शायद अब इस जन्म में पूरी कर रहा है, और लोगों को भी तंग कर रहा है। अंधेरा बढ़ता जा रहा है , सुनसान जंगल में ,झींगुरों की और तांत्रिक बाबा के मंत्र उच्चारण की आवाजें भी आ रही हैं। अब शेफाली को डर लगने लगता है ,वह सोचती है -किसी तरह से मैं इस लड़के का चेहरा देख लूँ और वापस चली जाऊं ,इससे आगे कुछ जानने की मेरी जिज्ञासा भी नहीं है, मेरे लिए इतना ही काफी है। यही सोचकर ,वह उस झोपड़े के और करीब जाती है। झोपड़ी में, हवन और पूजन सामग्री के कारण धुआं भर गया था। उस धुंए का लाभ उठाकर ,शेफाली तांत्रिक बाबा के पीछे जाकर खड़ी हो जाती है और उनके सामने बैठे ,व्यक्ति का चेहरा देखना चाहती है। जैसे ही थोड़ा धुआँ छटा सामने बैठे व्यक्ति को देखकर ,वह आश्चर्यचकित रह गई , और मन ही मन सोचा- यह तो वही लड़का है जो उस दिन मुझ से टकराया था, जहां मैं काम करती हूं वहां भी आया था । क्या यही मेरा वर्तमान का प्रेमी होगा या फिर मेरा दुश्मन ! उसे प्रश्नों ने घेर लिया।
शेफाली के वहां होने का ,तांत्रिक बाबा को एहसास हो गया था, कोई आत्मा तो है , जो यहां है , तभी बाबा ने कड़क आवाज में पूछा - कौन हो तुम? और कहां से आई हो ? जल्दी जवाब दो ! वरना मैं तुम्हें कैद कर लूंगा ? शेफाली घबरा गई , हड़बड़ाहट में उसने भागने का प्रयत्न किया और जोर से चिल्लाई -,बाबा मुझे बचा लो ! बाबा मुझे बचा लो !
बाबा ब्रह्मानंद को उसकी आवाज सुनाई दी और वह समझ गए कि यह किसी संकट में आ गई है , तब बाबा ब्रह्मानंद ने उसके मस्तक के मध्य में अपना अंगूठा फिर से लगाया और उसे वर्तमान में ले आए। शेफाली अपने आप में लौट आई , अपने को वर्तमान में पाकर उसने एक गहरी सांस ली और बोली -मैं तो फंस ही गई थी। तभी उसे आश्चर्य हुआ , यहां तो दिन निकला है, वह बोली बाबा -जहां पर मैं थी ,उस समय तो रात्रि हो रही थी।
हां जिस समय तुम्हें भेजा गया ,उस समय रात्रि का ही दृश्य था, बाबा ने पूछा -तुमने वहां क्या देखा ?
अवतार तब तक उसके लिए एक गिलास पानी ले आया था, अब वह दोनों उसकी तरफ जिज्ञासा से देख रहे थे -कि शेफाली क्या जवाब देती है ?उसने वहां क्या देखा ?
पानी पीकर शेफाली बताती है ,बाबा !पिछले जन्म में मैं,' चंद्रिका'' नाम की लड़की थी, और जो मेरा प्रेमी था, उसका नाम शेखर था , उसे मैंने कॉलेज के आसपास ही देखा है , किंतु अभी मैं उसका नाम नहीं जानती।
कोई बात नहीं ,बाबा ने प्रसन्न होते हुए कहा - तुम्हारा प्रेमी है ,वही तुम्हारा दुश्मन भी है ,अब दुश्मनी को कैसे प्रेम में बदलना है ?यह तुम्हें देखना होगा।
बाबा !वह पिछले जन्म में भी, शक्तियों द्वारा अमीर बनना चाहता था शेफाली आश्चर्य से बताती है।
तभी, तभी मैं कहूं, उसकी इन्हीं जिज्ञासाओं का, उस ''कामेश्वर ''ने लाभ उठाया, और उसके जन्म को भी काली शक्तियों का माध्यम ही बना दिया। तुम्हें ही अपने प्रेम से , उसके मन के गहराई में झांकना होगा और उसके मन से काली शक्तियों के प्रति विरक्ति पैदा करके, अपने प्रति प्रेम भरना होगा। कामेश्वर की वही शक्ति इस समय यहां कार्य कर रही है , यदि वही कमजोर पड़ जाए, तो कामेश्वर आगे ना बढ़ पाएगा और युद्ध होने से भी बच जाएगा, बाकी तुम स्वयं समझदार हो। न जाने बाबा को क्या सूझा बोले - शै फाली बेटा! क्या तुम्हारी बिल्कुल भी इच्छा नहीं हुई ,कि अपने पूर्व जन्म के माता-पिता को जानने की।

