Shrapit kahaniyan [ part 64 ]

 शेफाली ,अवतार के साथ,' बाबा ब्रह्मानंद 'जी के पास जाती है, उसे लगता है उसके सभी प्रश्नों का जवाब उन्हीं से मिलेगा।' बाबा ब्रह्मानंद 'जी अवतार के जन्म की कहानी शेफाली को सुनाते हैं , शेफाली आश्चर्यचकित होकर उसकी कहानी सुन रही थी और उस अवतार को भी देख रही थी , जो दिखने में तो साधारण सा मानव लग रहा था किंतु जब बाबा ने बताया - कि वो असीमित शक्तियों का मालिक है , तब उसे बहुत आश्चर्य हुआ। बाबा शेफाली को बताते हैं -कि यहां पर जो गांव था वह किसी'श्राप ' की वजह से जमीन में अंदर चला गया है। श्राप का कारण, कामेश्वर की बहन चंडालिका  थी। अवतार से युद्ध के पश्चात कामेश्वर अपनी जान बचाने के लिए, 'नरक लोक 'भाग गया और अपनी बहन को यही छोड़ गया। इस बात का उसकी बहन को बहुत दुख हुआ, तत्पश्चात उसने गांव वालों को ही 'श्राप 'दे डाला। आज भी वह गांव यहीं पर जमीन के अंदर स्थित है और लोग वहां रहते हैं मिट्टी के पुतले की तरह....... 


इससे आगे की कहानी सुनाते हुए बाबा कहते हैं,-अब मुझे लगता है, कोई तो है, जो फिर से यहाँ पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता है , काली शक्तियों को यहां स्थापित करना चाहता है। 

पर बाबा इन बातों से मेरा क्या लेना देना? मैं तो ,अपने भाई को ढूंढ रही थी ,मुझे वही नहीं मिला , शेफाली ने प्रश्न किया।

तुम्हारा इस कहानी में अहम किरदार है , जो भी यह काली शक्ति है , तुम उसके मन को शांत करने के लिए पैदा हुई हो, अपने प्यार से, अपने प्रेम से ,उस काली शक्ति की उपज को तुम शांत करोगी। रही बात, तुम्हारे भाई की, इसके लिए तुम्हें अपना मन कठोर करना होगा, अपने दिल पर पत्थर रखना होगा, क्योंकि तुम्हारा भाई उन काली शक्तियों की बलि चढ़ चुका है। 

बाबा के इतना कहते ही शेफाली को जैसे चक्कर सा गया ,अपने को संभालते हुए  बोली - बाबा !आप यह क्या कह रहे हैं ?

हां ,मैं सही कह रहा हूं , यही शायद कुदरत की नियति है , शायद यही कारण बन जाए तुम अपने भाई का बदला लो ! कहते हैं ना, हर चीज के पीछे उद्देश्य छुपा होता है या एक मकसद होना चाहिए वह मकसद,शायद  तुम्हें मिल गया , अपने भाई की मौत का बदला लेना और उस काली शक्ति को शांत करना अथवा अपने स्थान पर वापिस भेजना।  असुरों को इस पृथ्वी पर ना आने देना। नर्क का दरवाजा ना खुले, यही हम सबके लिए अच्छा है , यदि वह एक बार दरवाजा खुल गया , तो इस धरती पर हाहाकार मच जाएगा। 

बाबा ? मैं कैसे जानूगी ? मेरे भाई की बलि किसने दी है , किसने उसे मारा है ?मेरा वो ही तो सहारा था ,बचपन में ही माता -पिता का साया मेरे सिर से हट गया , रोते  हुए ,शेफाली बोली -जैसे भी होगा बदला तो लिया जायेगा ,जिसने मेरा इकलौता सहारा छीन लिया ,मैं भी उसे इसी तरह बेसहारा कर दूंगी।  

वह शक्ति स्वयं ही, तुम्हारी तरफ खींची चली आएगी , क्योंकि तुम्हारे उससे पूर्व जन्म के संबंध हैं किंतु इस जन्म में उसे काली शक्तियों की सेवा करनी पड़ रही है। मैंने पता लगाया है, कामेश्वर ने एक अघोरी के रूप में जन्म ले लिया है। वह  अपनी 'आत्मिक शक्ति 'से इस पृथ्वी पर आता है , सशरीर नहीं आ रहा , उस शक्ति को यह अपने लिए , प्रयोग करना चाहता है ,उस के माध्यम से अपने स्वार्थ सिद्ध करना चाहता है। तुम्हें हर तरह की परीक्षा के लिए तैयार रहना होगा। हमारी नजर हमेशा तुम पर रहेगी, तुम्हारी सुरक्षा का ध्यान रहेगा। अभी वह शक्ति तनिक कमजोर पड़ गई है , क्योंकि तुम्हारी छाया उस  पर जो पड़ गई है। 

मेरी छाया ! मैं कुछ समझी नहीं , शेफाली ने पूछा। 

हां वह तुम्हारा पूर्व प्रेमी है , तुम्हारी छाया पड़ने से अब वह पशोपेश में पड़ गया है ,एक तरफ आसुरी शक्तियां ,काली शक्तियां उसे अपनी तरफ खींच रही हैं , दूसरी तरफ तुम्हारी अच्छाई सच्चाई उसे अपनी ओर खींच रही है। अभी इसी अंतर्द्वंद में वह फंसा हुआ है। 

शेफाली को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था , उसके लिए तो यह सब एक काल्पनिक कहानी लग रही थी जो अभी उसे बाबा ने सुनाई , क्या ऐसा भी कुछ हो सकता है ?अभी भी वह यही सोच रही थी किंतु अवतार और बाबा ब्रह्मानंद जी तो झूठ नहीं हो सकते। क्या इस धरती पर जहां हम खड़े हैं इसके अंदर भी एक गांव बसा है ? यह किसी आश्चर्य से कम नहीं ।

क्या सोच  रही हो ? ये सभी बातें कोई मनघड़ंत कहानी नहीं ,सब सत्य है ,तुम्हारे सामने अवतार भी सत्य है ,इसका उदाहरण तुम ,उस जंगल में देख ही चुकी हो। 

क्या बाबा आप मन की बातें पढ़ लेते हो ?


अभी भी विश्वास नहीं हुआ ,जब वो मुझे पिछले जन्म में चाहता था ,तब इस जन्म में मेरा दुश्मन कैसे बन गया ?

उसका जन्म तुम्हारा दुश्मन नहीं ,वरन उसका कर्म तुम्हारा दुश्मन बना ,पिछले जन्म में तुम एक -दूसरे को पसंद करते थे ,दोनों ही प्यार करते थे किन्तु जब विवाह का समय आया ,तब पता चला ,ये बुराइयों में लिप्त था। जुआ ,चोरी ,कालाबाज़ारी इत्यादि उसके यही कार्य थे। जब माता -पिता ने तुम्हें उसके विषय में बताया और कहा -हम  तुम्हारा  विवाह उससे करवा सकते हैं ,किन्तु अब ये तुम्हें तय करना होगा ,कि क्या तुम ऐसे इंसान से विवाह करना चाहोगी ? जो बुराइयों में हमेशा लिप्त रहता है ,चोरी करके अपना घर चलायेगा। ये फैसला अब तुम्हारा है।

आगे क्या हुआ ?बाबा ! शेफाली उत्सुकता से बोली। 

आगे तुम ही देख लो ! कहते हुए ,''बाबा ब्रह्मानंद जी'' ने उसे अपनी आंखें बंद करने के लिए कहा और उसके माथे के मध्य में अपना अंगूठा रखा। अंगूठा रखते ही, शेफाली जैसे इस दुनिया से दूर होती चली गई और किसी प्रकाश  की गहराई में खोती चली गई ,उसने देखा -वह किसी अनजान जगह पर है किंतु लगता है ,जैसे -इस जगह को कहीं देखा है तभी उसे कुछ लोग जाते हुए ,दिखलाई देते हैं वह एक दीवार के पीछे छुप जाती है। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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