अवतार , शेफाली और उसकी मकान मालकिन को बचा कर ले जाता है , शेफाली के मन में अनेक प्रश्न उ भरते हैं। वह जानना चाहती है, कि मुझे यह अवतार बचाने क्यों आया है ? आखिर यह अवतार कौन है ? तब अवतार ने बताया- कि वह गुरु जी के कहने पर आया है , उसके गुरु जी और कोई नहीं 'ब्रह्मानंद जी 'हैं। वही'' ब्रह्मानंद जी'' जो शेफाली के सपने में ''दिव्य पुरुष ''आए थे। अब शेफाली को उम्मीद होती है, कि उसके सभी प्रश्नों का जवाब, उसे शीघ्र ही मिल जाएगा। अवतार उन्हें अपने साथ ले चलने के लिए कहता है। जिस मार्ग से अवतार जा रहा था, उसी मार्ग से शेफाली और उसकी मकान मालकिन भी चल देती हैं। अघोरी का षड्यंत्र नाकामयाब रहा ,इससे वह तिलमिला रहा था , और वह चाहता था -कि शीघ्र से शीघ्र कुंभर्क अपनी योजना में आगे बढ़े , जब अघोरी ने कुंभर्क पर दबाव बनाया, तब कुंभर्क भी चिढ गया और अघोरी से बोला - यह कार्य तुम क्यों पूर्ण नहीं कर लेते ?
अघोरी में भी कम शक्तियां नहीं थी ,वह भी 'काली शक्तियों' का मालिक था, किंतु वह नर्क का द्वार खोलने में सक्षम नहीं था, क्योंकि वह द्वार'' दैवीय शक्तियों ''से बंधा हुआ था। यदि उसके वश में होता तो अब तक वो , द्वार खुल चुका होता। कुंभर्क का इंतजार नहीं कर रहा होता , कुंभर्क के आधे इंसानी रूप का वह लाभ उठाना चाह रहा था। यदि उन पवित्र चीजों का कुंभर्क पर असर भी पड़ता है या उसकी जान भी जाती है तो अघोरी की बला से......
अघोरी ने जानबूझकर,' कुंभर्क '' को शैतानी शक्तियों की ओर खींचा, ताकि कुंभर्क के अंदर प्रेम ,दया, मोह- माया ,ममता एक भी भावना ना रहे। उसके इंसानी रूप को जानबूझकर , हैवानियत में बदला, ताकि समय आने पर वह कुंभर्क से अपनी भविष्य की योजनाओं का लाभ उठा सकें।
अवतार की सहायता से, वह दोनों शेफाली और उसकी मकान मालकिन, उन दिव्य पुरुष और अवतार के गुरु ''ब्रह्मानंद जी'' के समक्ष प्रस्तुत हो जाती हैं। शेफाली के मन में अनेक प्रश्न थे, उसने गुरु जी को दंडवत प्रणाम किया, उनसे आशीर्वाद लिया , गुरुजी के चेहरे पर तेज था, बर्फ जैसी सफेद दाढ़ी , गेरुआ वस्त्र , माथे पर चंदन का तिलक, उस बर्फ से ढके मंदिर में ,गुरु जी की छवि अद्भुत नजर आ रही थी।
तब शेफाली बोली -गुरु जी !यह मेरे साथ क्या हो रहा है ? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है ? क्यों कोई मुझे उस जंगल में ले जाकर मारना चाहता था ? मेरा भाई विरार भी मुझे नहीं मिल रहा है , न जाने वह कहां और किधर चला गया ?
गुरुजी ने उसे शांत रहने के लिए कहा।
तब वह बोले -तुम जानती हो, यह कौन है ? अवतार की तरफ देखते हुए बोले।
शेफाली ने 'नहीं 'में गर्दन हिलाई।
तब उन्होंने बताया- कि यह' अवतार' है, जिसका जन्म यहां के लोगों की सुरक्षा के लिए ही हुआ है, इसने यहां के लोगों की सुरक्षा का बीड़ा उठाया है , जिसे बरसों हो गए ,जब भी इस धरती पर कोई ''आसुरी शक्ति ''आती है ,तब इसका आवाहन करना पड़ता है और यह आ जाता है। यह अद्भुत शक्तियों का मालिक है , यह यहां के लोगों के लिए जीता है ,उन्हीं के लिए मर मिटता है। अब इस धरती पर फिर आसुरी शक्तियों का प्रकोप बढ़ने वाला है इसीलिए मैंने इसको बुलाया है । यह दिखने में इंसान है , किंतु किसी देव से कम नहीं , अपनी शक्ति के बल पर ,यह बच्चा भी बन सकता है और बड़ा भी ,इसकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल है। इस धरती पर पहले भी आसुरी शक्तियों ने आक्रमण किया था। जब उनका प्रकोप बढ़ा तब ,इसने और यहां के लोगों ने संघर्ष किया। यह बात हजारों साल पुरानी है आसुरी शक्तियों के संरक्षक' कामेश्वर 'ने इस इलाके पर आक्रमण किया। जैसा कि उसका नाम था , ऐसा ही उसका काम था। उसके रहने पर महिलाएं सुरक्षित नहीं थीं , महिलाओं द्वारा ही , वह अपनी शक्तियों को बढ़ाता था। उससे बचने के लिए महिलाएं ,अपने मकानों में बंद रहती रहतीं थीं , कोई भी महिला बाहर निकलती तो पकड़ ली जाती थीं ।
उसके सैनिक, उसके सेनापति , खूबसूरत महिलाओं की तलाश में रहते , अपनी रातें रंगीन करते। उस राजा का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा था क्योंकि उसमें आसुरी शक्तियां इतनी थीं उनका कोई सामना करने का किसी में साहस नहीं था। उस समय मेरे पिता ने 'अवतार' का आवाहन किया यानी अपनी शक्तियों से' दैवीय शक्तियों 'से अवतार को बनाया। कहने को तो...... यह अवतार इसी राज्य का एक मामूली बालक था, किंतु मन का बिल्कुल सच्चा , और भोला, मेरे पिता ने इसे अनेक शक्तियां भी सिखाई, किंतु उनकी शिक्षा से ही 'देवत्व' को प्राप्त हुआ। उस समय यह पृथ्वी अग्नि की तरह गर्म रहती थी। चहुँ ओर हाहाकार मचा हुआ था। जब अवतार को शक्तियां प्राप्त हो गईं , तब अवतार ने 'कामेश्वर' के विरुद्ध, एक सेना बनाई। इसे जल की शक्ति प्राप्त हुई इसीलिए इसे ''जल स्रोत ''का संरक्षक भी कहने लगे। जल इसके अधीन हो गया अब यह जल से, जो भी चाहता करवा सकता था ,इसने इस तरह से शक्तियां प्राप्त की,, कि जल का यह कोई भी रूप परिवर्तित कर सकता था इसके हाथों में जल को नियंत्रित करने की शक्तियां थी।' जिस तरह शिवजी ने अपनी जटाओं में बांधकर,गंगा को नियंत्रित किया था,'' उसी तरह यह अपने हाथों से' जल' को नियंत्रित कर सकता है,' उसके बहाव को बदलने की क्षमता इसमें है हिम बनाने की क्षमता इसमें है।
गुरुजी की बात सुनकर, शेफाली ने, अविश्वास से, अवतार की तरफ देखा, अवतार नीली आंखों वाला सिर पर एक चोटी गंजा व्यक्ति था, किंतु उसके चेहरे की रौनक देखते ही बनती थी ,उसके चेहरे पर तेज़ था कोई कह नहीं सकता था, कि यह हजारों साल पुराना कोई व्यक्ति है या फिर कोई आत्मा !
तब गुरुजी ने आगे कहना आरंभ किया - अवतार की शक्तियां ,धीरे-धीरे बढ़ने लगीं , कामेश्वर को भी इसका एहसास होने लगा ,उसकी उसकी शक्तियां अब काम नहीं कर रही थीं उसकी कार्य क्षमता कम होती जा रही थी। दैवीय शक्तियां बढ़ती जा रही थीं । एक दिन उसने अपने लोगों को ,उस अनजान की तलाश करने के लिए भेजा- कि ऐसा कौन है ?जो हमारी आसुरी शक्तियों का सामना करने की क्षमता रखता है ,वो कोई मानव है ,देव है ,या फिर कोई और....... अवतार की तलाश में ,वह लोग निकल गए , अवतार के करीब होते हुए भी , इसे ढूंढ नहीं पाए। तब कामेश्वर ने यहां की जनता पर अत्याचार करना आरंभ कर दिया। अवतार ने भी उनकी सुरक्षा के लिए ,एक' हिम' का किला बना दिया ,जिसमें कामेश्वर के सैनिक प्रवेश भी न कर सकें , कामेश्वर ने युद्ध करना आरंभ किया। उसने अपने आसुरी शक्तियों से यहां के सारे पशु पक्षियों ,पेड़ पौधों को , जलाकर भस्म करना चाहा । अवतार ने अपनी क्षमता से उस अग्नि को शांत कर दिया। धीरे-धीरे ' कामेश्वर 'की शक्तियां कमजोर पड़ने लगीं । अवतार ने अपने जैसे ही ,न जाने कितने अवतारों को बना दिया ? युद्ध कई दिनों तक चला, किंतु हारकर, कामेश्वर को उस' नरक द्वार' से भागना पड़ा , वह मारा तो नहीं गया लेकिन भाग गया। तब हमने ''दैवीय शक्तियों ''के माध्यम से, उस द्वार को बंद कर दिया। जो भी कोई आसुरी शक्ति वाला उसे खोलेगा वह स्वतः ही जलकर भस्म हो जाएगा।
कामेश्वर अपनी जान बचाकर तो भाग गया किंतु अपनी बहन 'चंडालिका 'को छोड़ गया , उसे नहीं ले जा सका उसकी बहन को उस पर अत्यंत क्रोध आया-उसने अपने भाई का क्रोध इन लोगों पर उतारा और उस 'चंडालिका 'ने अपनी शक्ति से संपूर्ण गांव को ''श्राप '' दे डाला- कि यह गांव जमीन में समा जाए , और इसमें रहने वाले लोग मिट्टी के हो जाएं। '' जिसके फलस्वरूप यह गांव जमीन में समा गया , यहां पर रहने वाले जितने भी लोग थे सब मिट्टी के हो गए। किंतु पृथ्वी के नीचे आज भी वह गांव स्थापित है और मिट्टी के वह लोग भी जिन्दा हैं और वहीं रहते हैं। शेफाली आश्चर्य से, बाबा ब्रह्मानंद जी की बात सुन रही थी।

