Mood hona chahiye

पिकनिक का क्या है ? बस मूड होना चाहिए ,

 दोस्ती..... और , दोस्तों का संग होना चाहिए। 

 जरूरी नहीं ,बाहर घूमने ही जाएं ,

 कहीं भी,कभी भी ,पिकनिक मनाएं। 

 बस अपनों का साथ ,होना चाहिए। 

 कुछ मस्ती ,कुछ मजा धमाल होना चाहिए। 



कौन जाता था ? पहले मनानइ... पिकनिक ! 

बस अपने हो ,और अपना मूड होना चाहिए। 

छुट्टियों में घर में ही ,अपने चचेरे भाई-बहनों संग ,

बिन पैसे ही ,अच्छी ''पिकनिक'' मन जाती थी।

बस आपसी समझदारी ,उम्र का तालमेल होना चाहिए। 

 खूब मस्ती, एक दूजे का संग कभी अंताक्षरी कभी पहेली,

 मिलजुल कर खाना और धूम मचाना ,

बस घर में ही,' पिकनिक' बन जाता था।

पहले बाहर कौन ?' पिकनिक' मनाने जाता था। 

दो माह कब बीते ? पता ही नहीं , चल पाता था। 

बस अगली मुलाकात का वायदा होना चाहिए।

'पिकनिक 'कहीं भी मने ,बस मूड़ होना चाहिए।  

अब दिलों में, प्यार नहीं, 'पिकनिक 'मनाने जाते हैं ,

 शाम को थके -हारे वापस...  घर को लौट आते हैं। 

चोंचले किये बहुत ,अपनों का ,वो सुख कहाँ पाते हैं ? 

बैठे-बिठाए खर्चे बढ़ गए हैं, दिनचर्या में लग जाते हैं। 

' पिकनिक 'कहीं भी मने ,बस 'मूड' होना चाहिए। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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