पिकनिक का क्या है ? बस मूड होना चाहिए ,
दोस्ती..... और , दोस्तों का संग होना चाहिए।
जरूरी नहीं ,बाहर घूमने ही जाएं ,
कहीं भी,कभी भी ,पिकनिक मनाएं।
बस अपनों का साथ ,होना चाहिए।
कुछ मस्ती ,कुछ मजा धमाल होना चाहिए।
कौन जाता था ? पहले मनानइ... पिकनिक !
बस अपने हो ,और अपना मूड होना चाहिए।
छुट्टियों में घर में ही ,अपने चचेरे भाई-बहनों संग ,
बिन पैसे ही ,अच्छी ''पिकनिक'' मन जाती थी।
बस आपसी समझदारी ,उम्र का तालमेल होना चाहिए।
खूब मस्ती, एक दूजे का संग कभी अंताक्षरी कभी पहेली,
मिलजुल कर खाना और धूम मचाना ,
बस घर में ही,' पिकनिक' बन जाता था।
पहले बाहर कौन ?' पिकनिक' मनाने जाता था।
दो माह कब बीते ? पता ही नहीं , चल पाता था।
बस अगली मुलाकात का वायदा होना चाहिए।
'पिकनिक 'कहीं भी मने ,बस मूड़ होना चाहिए।
अब दिलों में, प्यार नहीं, 'पिकनिक 'मनाने जाते हैं ,
शाम को थके -हारे वापस... घर को लौट आते हैं।
चोंचले किये बहुत ,अपनों का ,वो सुख कहाँ पाते हैं ?
बैठे-बिठाए खर्चे बढ़ गए हैं, दिनचर्या में लग जाते हैं।
' पिकनिक 'कहीं भी मने ,बस 'मूड' होना चाहिए।
