Shrapit kahaniyan [part 61]

शेफाली , अच्छा खासा सपना देख रही थी ,तभी उसकी मकान -मालकिन ने आकर उसका ,वह सपना तोड़ दिया। उस सपने को देख ,जब वह वर्तमान में आई तो उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था और उसके मन में अनेक प्रश्न घूम रहे थे। आखिरी अवतार कौन है? यह दिव्य पुरुष कौन थे ? ऐसी कौन सी काली शक्तियां हैं, जिनसे मुझे लड़ना है ? मैं किस तरह से लोगों की सहायता कर सकती हूं ? मेरे अंदर ऐसी कौन सी  शक्तियां हैं ? जिन्हें मैं नहीं जानती , मेरे सभी प्रश्नों का जवाब तो वही' दिव्य पुरुष 'दे सकते हैं , किंतु वह स्वप्न दोबारा तो नहीं आएगा। शायद यहीं कहीं मुझे मिल जाएं । 

क्या सोच रही है ?आज उठने में बड़ी देर लगा दी , मकान मालकिन ने प्रश्न किया। 

हां , गहरी सांस लेते हुए ,बोली -आज एक बहुत अच्छा सपना देख रही थी जो तुमने आकर तोड़ दिया मुंह बनाते हुए बोली। 

मैं भी तो सुनूं , तेरे सपने में ऐसा क्या था ?



कुछ कह नहीं सकती, यह सपना ही था या हकीकत भी हो सकता है ,ये मैं स्वयं ही नहीं समझ पा  रही हूँ ,वे '' दिव्य पुरुष ''कौन थे ,जो मुझसे कुछ बहुत कुछ कहना चाहते थे , हमसे मिलकर मुझे ,बहुत अच्छा लगा , ऐसा लग रहा था -जैसे मेरे सभी प्रश्नों का जवाब उनके पास है।  

अब तू तैयार हो जा !या  उसी सपने को सोचती रहेगी तुझे कॉलेज भी तो जाना है ,मैंने तेरे लिए नाश्ता भी बना दिया है। 

यह मकान- मालकिन भी अच्छी है ,जब से विरार भैया गया है, तब से मेरा बहुत ख्याल रखती है ,मेरे खाने -पीने का प्रबंध भी यही करती हैं  ,हां, किराया समय  पर ले लेती हैं  , इनका भी अपना कौन है ? एक बेटा है वह दूर रहता है , इसी किराए से तो ,अपना और मेरा खर्चा चलाती हैं। शेफाली भी , कॉलेज से आकर सीधे एक दुकान पर नौकरी करने जाती  है उस दुकान में वह' सेल्सगर्ल 'की नौकरी कर रही है ,उससे जो पैसा आता है ,उससे वह अपना खर्चा चलाती है , सही में सोचा जाए तो दोनों का खर्चा उसी आमदनी से चलता है। उन दिव्य पुरुष के विषय में सोचते हुए ,वह अपने कॉलेज के लिए तैयार हुई और चली गई। भले ही वह सपना था किंतु उसे वास्तविकता का अहसास हो रहा था। 

कुंभर्क के मन में यह जानने की इच्छा थी ,आखिर वो ''दिव्य बाला'' कौन थी ? जिसको जानने की मेरी उत्कंठा बढ़ती जा रही है। जब सभी शिष्य चले गए ,तब ''अघोरी बाबा '' अपने सूक्ष्म रूप में ,कुंभर्क को गुफा के नीचे की सीढ़ियों का रास्ता दिखलाया और उससे कहा -ये ''नर्क का द्वार ''है ,इसमें एक से एक ताकतवर ,शैतानी शक्तियां रहतीं हैं , तुम्हें ये द्वार  खोलना है ,ये द्वार खुलते ही ,समस्त आसुरी शक्तियां मुक्त हो जायेंगी। 

इसे मैं कैसे खोल सकता हूँ ?

इस द्वार के सामने ,तुम्हें तंत्र विद्या करनी होगी ,जो मैं तुम्हें बताता जाऊंगा और एक'' नरबलि'' देकर, इस द्वार को ''श्रापमुक्त ''करना होगा। 

''श्रापमुक्त ''मैं कुछ समझा नहीं , इसे किसने ''श्रापित '' किया ? और क्यों ? कुंभर्क  ने आश्चर्य से पूछा। 

यह बहुत लंबी कहानी है, बस तुम इतना समझ लो ! इस  दरवाजे को, पवित्र सामग्रियों  से बांधा गया है , ताकि आसुरी शक्तियां इस द्वार से,' पृथ्वी लोक 'में  प्रवेश ना कर सकें।इसे  शीघ्र अति शीघ्र खोलने का प्रयत्न  करो , हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। 

ठीक है ,मैं प्रयास करूंगा ,किंतु मैं यह जानना चाहता हूं -कि वह क्या चीज थी ?जो मुझसे टकराई और मुझे उसका गहरा असर हुआ ,एक बार को तो लगा जैसे ,मैं भूल ही गया ,कि मैं कौन हूँ ?कुंभर्क  अपने मन की व्यथा को बताना चाहता था किंतु अघोरी नहीं चाहता था -''कि वह शेफाली के विषय में ज्यादा सोचे ,उसके विषय में वार्तालाप भी करे अथवा दुबारा उससे मिलने का प्रयास भी करे । वह जानता था ,उस लड़की में ऐसी'' दिव्य शक्ति ''है जो इसे अपनी और चुंबक की तरह खींचेगी। उससे मिलने पर परिस्थितियां पलट भी सकती हैं। 

'अवतार 'अपने साथ रहने वाले लोगों को कुछ धार्मिक और कुछ युद्ध क्रियाएं सिखा रहा था, ताकि आने वाले समय में, यह लोग ,उन परिस्थितियों का डटकर सामना कर सकें , कैसे अपनी इंद्रियों को अपने वश में करना है ? कैसे जल को ही अपना शस्त्र बना लेना है ? कैसे अपना आत्मविश्वास डगमगाने नहीं देना है ? समय आने पर, वह अपने गांव की मिट्टी की मूर्ति बने इंसानों को भी, जिंदा करके ला सकता है। 

अंधेरा छाने लगा है , कुंभर्क,  शेफाली की तलाश में बाजार में घूम रहा है, तभी उसकी दृष्टि एक दुकान पर जा टिकती है। हो ना हो यह लड़की ,वही हो सकती है , इसका कैसे पता लगाया जाए? इस समय तो वह अपने शैतानी रूप में भी आ सकता है , इस बात को परखने के लिए ,कि यह लड़की वही है या कोई और वह अपना रूप बदल कर, उस दुकान के अंदर जाता है। सुनिए ! जैसे ही शेफाली ने पलट कर देखा तो वह देखता ही रह गया शेफाली की आंखों में उसे, ऐसा आकर्षण नजर आ रहा था कि वह अपने नजरें नहीं हटा पा रहा था वह भूल गया था कि वह एक शैतान है। उसका उद्देश्य , इस पृथ्वी पर शैतानी शक्तियों को बुलाना है ,उनका राज्य स्थापित करना है। सुंदर लड़कियां तो उसने पहले भी बहुत देखी हैं इसमें ऐसा क्या है ? जो मुझे इसकी ओर खींचे  लिए जा रहा है। क्या मुझे ,इसे छूकर देखना चाहिए , तभी तो मालूम पड़ेगा यह वही हो या कोई और ! 

अघोरी अपनी शक्ति से यह सब देख रहा था -वह नहीं चाहता था कि यह उसके करीब भी  जाए , किंतु ''होनी को कौन टाल सकता है ''? उसे कुछ नहीं सूझा और बोला- क्या एक गिलास पानी मिल  सकता है ?

 उसकी इस बात पर शेफाली जोर से हंसी और बोली -क्या आप यहां पानी पीने आए हैं ? शेफाली की आवाज उसके कानों में घंटियों की तरह बजने लगी और जब कुंभर्क ने पानी का गिलास पकड़ा ,उसकी इतनी ही छुअन से उसको  ऐसा लगा जैसे उसकी सारी शक्ति किसी दूसरी शक्ति ने खींच ली है , वह कमजोर पड़ता जा रहा था , अपनी शैतानी शक्ति से उसने जो अपने उस वास्तविक रूप को छिपा रखा था  उस पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा था और वह बाहर की तरफ भागा।

किंतु शेफाली समझ गई थी जो उसके आसपास काली परछाइयां मंडरा रही हैं ,शायद ,यह उनमें से एक ही था मुझे ऐसी ही ,न जाने कितनी परछाइयों से लड़ना होगा ?वह मेरा स्वप्न नहीं था ,मेरी सच्चाई थी जो वे बाबा मुझे दिखाना चाहते थे, समझाना चाहते थे। वह परेशान होती है , मुझे बाकी की सच्चाई कब और कैसे पता चलेगी ? वह बाबा मुझे कहां मिलेंगे ? कुछ जानना चाहती थी- उसके जीवन का उद्देश्य क्या है ?  यह कैसी परछाइयां हैं ,जो उसका पीछा कर रही हैं ?  समय हो जाने पर ,शीघ्र अपने घर आई  और खाना खाया तब अपने मकान मालिक मालकिन से बोली -क्या आप ,किसी ऐसे सिद्ध पुरुष को जानती हैं जो बहुत ही पहुंचे हुए हैं और मेरे प्रश्नों का जवाब दे सकें। 


शेफाली के घर आने से पहले ही ,उन काली शक्तियों ने ,उसकी मकान मालिक को अपने वश में कर लिया था , मकान मालकिन बोली - हां मैं जानती हूं एक ऐसे बहुत बड़े पहुंचे हुए तांत्रिक हैं जो तुम्हारी समस्याओं का समाधान शीघ्र ही कर देंगे।

अच्छा कहां पर हैं ? मुझे उनके पास ले जाना शेफाली खुश होते हुए बोली। 

यह सब अघोरी की चाल थी , उसने उस मकान मालिक को इसीलिए अपने वश में कर लिया था ताकि वह उसके पास शेफाली को लेकर आए और वह शेफाली को अपनी कैद कर ले। अगले दिन मकान मालकिन उसको एक पहाड़ी  पर ले कर जा रही थी। रास्ते में जंगल की पढ़ता था उसमें अनेक खूंखार जंगली जानवर भी थे। शेफाली को लगा -शायद ,यह रास्ता भूल गई हैं। 

उन्हें याद दिलाने के लिए पूछा -क्या हम सही रास्ते पर चल रहे हैं ?

हां हां मैं कई बार इस रास्ते से आ चुकी हूं , मकान मालकिन ने कहा। 

आप कब आई ? हमें तो पता ही नहीं चला।

यह बात तो से मकान मालिक भी नहीं जानती थी , क्या कहती ? बस चले जा रही थी क्योंकि वो तो अघोरी के सम्मोहन में थी।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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