अघोरी नहीं चाहता था ,कि कुंभर्क शेफाली से मिले , कुंभर्क में, इंसानी और शैतानी दोनों की शक्तियां मौजूद हैं , उसके अंदर यह जानने की जिज्ञासा पैदा हो चुकी थी, कि वह जिस लड़की से मिला आखिर वह है ,कौन ? वह उसे देखते ही अचंभित रह गया , शेफाली के स्पर्श मात्र से उसे लगा ,जैसे उसकी सभी शैतानी शक्तियां कमजोर पड़ रही हैं ,और वह उसके सामने से भाग गया। तब अघोरी ने ,अपने ''दिव्य दृष्टि ''से अपने शैतान के पुजारियों द्वारा ,शेफाली की मकान मालकिन को अपने वश में कर लिया , अपने शैतानों की सहायता से ,उस मकान - मालकिन को सम्मोहित करवा दिया। जैसे ही ,शेफाली ने मकान -मालकिन से पूछा -कि क्या आप किसी ''दिव्य पुरुष'' को जानती हैं ?जो भविष्यवक्ता हो , या हमारे विषय में कुछ बता सके।
तब उसने जवाब दिया - हां ! मैं, ऐसे एक ' दिव्य पुरुष 'को जानती हूं , अगले दिन मकान- मालकिन ,शेफाली को अपने साथ लेकर, पहले एक पहाड़ी की चढ़ाई आरंभ कर दी और फिर , पहाड़ी से उतरकर एक घने जंगल की तरफ ले गई , जैसे ही वह जंगल के समीप पहुंची , उसे देखकर शेफाली को थोड़ा डर लगा, वह जंगल कोई आम जंगल नहीं था , वह जंगल भी बहुत विचित्र था , उसके अंदर जो भी एक बार गया ,फिर कभी वापस लौट कर नहीं आया , उस जंगल के अंदर जाकर ,मानव भ्रमित हो जाता था ,उसे रास्ता ही नहीं मिल पाता था , तब वह उसी जंगल में भटकता रहता था जब तक उसकी मौत नहीं हो जाती। शेफाली ने अपने मकान मालकिन से पूछा -क्या हम सही राह पर चल रहे हैं ?
मकान मालकिन तो सम्मोहित थी, उससे जैसा का कहा जा रहा था, वही कर रही थी , बोली -हमें इसी जंगल के बीच से होकर जाना है। अघोरी ने मकान -मालकिन के माध्यम से ,वही जंगल का रास्ता शेफाली के लिए चुना , अघोरी उस जंगल में शैफाली को भटका देना चाहता था , ताकि वह जंगल से बाहर ना निकले और कुंभर्क के कभी सामने ना आ पाए।
यह सब वह ''दिव्य बाबा'' ब्रह्मानंद जी , अपनी दिव्य दृष्टि से देख रहे थे। वह शेफाली के सपने में आने वाले ,वह दिव्य बाबा और कोई नहीं अवतार के मंदिर वाले बाबा ब्रह्मानंद जी ही थे। वह समझ गए ,कि यह अघोरी की एक चाल है कुंभर्क को शेफाली से दूर रखने के लिए , तब उन्होंने अवतार को आदेश दिया तुम पहले उस लड़की को उस जंगल से बचा कर ले आतेज ओ ! जिसे हमारी इस लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान देना है।
अभी शेफाली ने ,उस जंगल में कुछ ही कदम रखे थे तभी एक बिजली सी चमकी , और उस स्थान पर एक बड़ा सा गड्ढा हो गया , अब उस गड्ढे से आगे वह जा नहीं सकती थीं। उसने अपनी मकान मालकिन से पूछा अचानक यह क्या हो गया? अब हम आगे कैसे जाएंगे?
किंतु वह तो अघोरी के सम्मोहन में थी, बोली- नहीं, हमें आगे बढ़ना ही होगा, हम अवश्य जाएंगे।
शैफाली ने सोचा- ये कैसे और क्या हो गया है ? इतने बड़े गड्ढे को हम कैसे पार कर सकती हैं ?
अभी वह यही सोच रही थी तभी उसे बर्फ की सीढ़ियां बनाकर आता अवतार दिखाई दिया। अब यह क्या बला है ?शेफाली सोचने लगी।
अवतार उनके करीब गया और बोला -तुम्हारा यहां रहना खतरे से खाली नहीं है ,आप लोग ,मेरे साथ चलिए !
शेफाली ने पूछा -आप कौन हैं ? हमें क्यों ले जाना चाहते हैं और कहां ले जाना चाहते हैं ?
किंतु उसकी मकान मालकिन बोली - हमें आगे बढ़ना है।
तब अवतार ने अपनी शक्ति का प्रयोग किया और उस मकान मालिक -मालकिन का सम्मोहन तोड़ दिया। सम्मोहन के टूटते ही, मकान मालकिन अपनी पूर्ववत स्थिति में आ गई और जंगल में अपने को खड़ा देख कर डर गई, शेफाली से बोली -हम यहां कैसे आ गए ? यह कौन सा जंगल है शेफाली तुम मुझे यहां क्यों लेकर आई हो ?कहते हुए, उसके चेहरे घबराहट थी। शेफाली कुछ भी समझ नहीं पा रही थी कि यह सब हमारे साथ क्या हो रहा है और यह व्यक्ति कौन है ?हमें कहां ले जाना चाहता है ?
अवतार उन दोनों के चेहरे देखकर समझ गया, कि यह दोनों डर रही हैं ,तब उसने कहा आप चिंता ना करें मुझे'' ब्रह्मानंद जी ''ने तुम लोगों की सुरक्षा के लिए भेजा है।
हम लोग तुम्हारे साथ क्यों जाएं और यह ब्रह्मानंद जी कौन हैं ? शेफाली ने प्रश्न किया।
यह '' ब्रह्मानंद जी'' और कोई नहीं ,वही तुम्हारे दिव्य पुरुष है जिन्हें तुम ढूंढ रही हो , उन्होंने ही मुझे तुम्हें यहां से ले जाने के लिए भेजा है
उसके इतना कहते ही शेफाली समझ गई कि अब हम सुरक्षित हैं और हमें इनके साथ चलना होगा ,शायद मेरे सभी सवालों का जवाब भी वही मिलेगा। शेफाली ने अवतार से प्रश्न किया ,तुम कौन हो और हमारे रक्षा के लिए क्यों आए हो ? तुम हमसे क्या चाहते हो ? हमें किस से खतरा है ? जो तुम हमारी सुरक्षा करना चाहते हो।
अवतार ने बस इतना ही कहा कि मुझे तुम्हारी रक्षा के लिए बाबा ने भेजा है और वही चलकर, तुम्हें सभी प्रश्नों के जवाब मिल जाएंगे।
शेफाली अवतार को देखकर आश्चर्यचकित थी ,किस तरह का आदमी है ? हवा में बर्फ की सीढ़ियां बना रहा है और उन पर चल रहा है अवश्य ही यह कोई ''दिव्य पुरुष ''है,''दिव्य पुरुष ''नहीं तो , यह भी कोई साधारण मानव भी नहीं है।
अघोरी की योजना फेल हो चुकी थी ,अपनी योजना के फेल होने के कारण वह बुरी तरह से तिलमिला रहा था। वह शीघ्र से शीघ्र अपनी योजना को अंजाम देना चाहता था। उसने कुंभक से संपर्क किया , और पूछा नर्क का द्वार खोलने में ,अभी देरी क्यों हो रही है ?
कुंभर्क ने अपनी असमर्थता व्यक्त की , उसने बताया जब से उस लड़की के करीब गया है तब से उसकी नकारात्मक शक्तियां कमजोर सी पड़ गई हैं। उन शक्तियों को पुनः प्राप्त करने में अभी उसे ,थोड़ा समय लगेगा।
कुंभर्क की बात सुनकर ,अघोरी झल्लाया इतने वर्षों से मैं इंतजार कर रहा था और तुमने सब पर ''पानी फेर दिया।'' मैं कुछ नहीं जानता, तुम्हें शीघ्र अति शीघ्र अपनी सारी शक्तियां वापस लानी होंगी और उस द्वार को खोलना होगा।
अघोरी की इस झल्लाहट से, कुंभर्क , भी तंग आ गया था, उसने कहा -आप स्वयं क्यों नहीं इस द्वार को खोल लेते ?
कुंभर्क के इतना कहते ही अघोरी कुछ देर के लिए शांत हो गया और वह अपने को समझाने लगा ,किस तरह इस को फिर से, इस कार्य के लिए प्रेरित किया जाए।

