आज प्रकृति में कुछ अलग ही बात है ,लगता है ,कुछ विशिष्ट घटने वाला है ,उस शांत वातावरण में भी, कुछ अलग ही हलचल है ,जैसे तूफान से पहले शांति का आभास होता है ,उसी तरह, आज प्रकृति कुछ अलग ही दिख रही है। आकाश पर बादल छाए हुए हैं , लोग मछली पकड़ने के लिए, बाहर निकलते हैं। भोजन की व्यवस्था करके शीघ्र ही ,अपने घरों में लौट जाना चाहते हैं। बर्फ की परत को तोड़कर, एक व्यक्ति ने उस पानी में मछली का कांटा डाला , उसे ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा ,शीघ्र ही ,उसके कांटे में मछली फंस गई। जैसे ही ,उसने उसे बाहर खींचा तो ,वह हतप्रभ रह गया ,क्योंकि उसके कांटे में कोई मछली नहीं वरन एक बहुत ही सुंदर बालक था। उसे देखकर वह आश्चर्यचकित रह गया। आसपास के लोग भी यह देखकर अचंभित रह गए, कि इतनी ठंड में ,इस बर्फ़ के नीचे से ,यह बच्चा कहां से आ गया ? इतना प्यारा खूबसूरत बच्चा था , उसकी नीली आंखें थीं ,बाल लम्बे हल्के और मुलायम थे। उसकी आँखें बहुत गहरी थीं ,जैसे अपने अंदर समुन्द्र समाये थीं ,नाक पर एक तिल था , इतना मासूम बच्चा इस ठंडी में पानी के अंदर कहाँ से आया ?अभी वो लोग यही सोच रहे थे।
उनके देखते ही देखते वो बच्चा हवा में उछला और अपने हाथों को हवा में घुमाया और एक बर्फ की परत सी बन गयी। वो उस पर चढ़ा और खेलने लगा। ये देखकर ,अन्य बच्चे भी वहां आ गए ,और उसकी तरह ही बर्फ से खेलने लगे। जो वातावरण इतना बोझिल और तनावपूर्ण लग रहा था , अब उस वातावरण में ख़ुशी और किलकारियां गूंजने लगीं ,डरे -सहमे से लोगों के चेहरों पर ,प्रसन्नता नजर आने लगी।
वहाँ खुशियां बांटकर ,अपने स्थान से हटकर, वह अपने हाथों से बर्फ की सीढियाँ बनाता हुआ ,आगे बढ़ रहा था। तब वह एक मंदिर में पहुंचा। गुरु ने उसे देखते ही पहचान लिया और बोले तुम आ गए , अवतार !
जी गुरु जी !आपने बुलाया तो मैं कैसे नहीं आता ? इस धरती पर फिर से वही नकारात्मक ऊर्जा पैदा हो रही हैं , जैसे आज से 5000 साल पहले हुआ था , ऐसी ही नकारात्मक शक्ति का मुझे आभास हो रहा है।
हां तुम सही कह रहे हो ,न जाने ,कहां से ऊर्जा आ रही है ? इसका पता लगाना होगा आज से 5000 साल पहले भी मैंने , इसी तरह से शैतानों में आकर ,यहां पर आक्रमण किया था। तब उन लोगों को तब उन लोगों को शैतान की हैवानियत से बचाया था। यह गांव सीधे और सच्चे लोगों के लिए बना था ।
उनकी बात सुनकर ,एक चेला भी वहां आ गया और वह कहने लगा -कि गुरुजी ! आप किसकी बात कर रहे हैं ? कौन सा गांव ,कैसा गांव ?
तब गुरुजी ने बताया कि आज से 5000 साल पहले ,यहां एक सुंदर गांव था, यहां के लोग, सीधे सच्चे और ईमानदार थे। तब कुछ नकारात्मक शक्तियों ने यहां पर अपना प्रभाव छोड़ा ,वे उन इंसानो का शिकार करना चाहते थे। यहां के लोगों में आपस में वैमनस्य की भावना पैदा हो गई , वे लोग आपस में अपने स्वार्थ के लिए लड़ने झगड़ने लगे। क्योंकि शैतानों ने उनके मन पर और दिमाग पर कब्जा कर लिया था।
क्या गुरूजी !आप उस समय में थे ,चेले ने आश्चर्य से पूछा।
नहीं ,यह कहानी मेरे दादाजी के दादाजी और उनके दादाजी ने पीढ़ी दर पीढ़ी हमें सुनाई है।
क्या उस समय के लोग नहीं बचे ,सब मर गए।
नहीं मरे नहीं ,उन्हें चंडालिका ने , मिट्टी की मूरत बना दिया और उस गांव को भी जमीन के नीचे ,मिटटी की कई तहों के नीचे दबा दिया। आज भी उस स्थान पर ,उस गांव में लोग ज्यों के त्यों मिट्टी के बने हुए खड़े हैं। गांव भी सुरक्षित उसी स्थान पर है। किन्तु जब सुरक्षा की बात आती है ,तब सारा गांव एक साथ खड़ा हो जाता है। उस समय भी ,उस गांव को इसी अवतार ने बचाया था।
यह तो एक बच्चा है यह क्या शैतानों से किसी को बचाएगा, मिट्टी के लोग, कैसे शैतान से लड़ेंगे और हम इंसानों को बचाएंगे , अवतार को देखकर ,और बातें सोचकर वह हंसने लगा।
अभी उसकी हंसी पूरी भी नहीं हुई थी तभी वह बच्चा एक बड़ा आदमी बन गया और बोला -मुझे बचपन में जीने की आदत है , मुझे बचपन अच्छा लगता है।
क्या ?आप ! 5००० साल पुराने हैं , उस चेले ने आश्चर्य से पूछा।
नहीं, मैं भी मिट्टी का ही बना पुतला था किंतु गुरुजी ने मेरे अंदर अपने ध्यान से अपने मंत्रों से चेतना डाली है , हम सभी की आत्माएं ,एक स्थान पर सुरक्षित हैं।आवश्यकता पड़ने पर हमारी आत्माएं स्वतंत्र होकर ,पुनः अपने शरीर में प्रविष्ट हो जाती हैं। यूं समझो ,जैसे मेरा फिर से पुनः अवतार हुआ है , इसलिए मेरा नाम अवतार पड़ा है। मैं जल तत्व से बना हूं ,मेरे अंदर जल को किसी भी आकार में बदलने की शक्ति है।
तब उसने गुरु जी से पूछा- गुरु जी इनको अवतार लेने की ,क्या आवश्यकता आन पड़ी ?
क्या तुम देखते नहीं, लोगों में कितना भय समाया हुआ है ? वातावरण में कितनी नकारात्मकता फैल गई है ? आने वाले समय में ,कुछ अनिष्ट की आशंका है।
हां ,गुरु जी !आप सही कह रहे हैं उसकी अग्नि का प्रभाव हमारे सुरक्षित गांव में भी पहुंच रहा है ? मुझे लगता है ,वह पाताल लोक का द्वार खोलना चाहता है ताकि संपूर्ण शैतानी शक्तियां उस द्वार के माध्यम से बाहर आ सकें अवतार ने अपना अंदेशा जतलाया।
अवतार अब तुम आ ही गए हो तो तुम्हें, लोगों में विश्वास जगाना होगा, ईश्वर के प्रति आस्था जगानी होगी , उन्हें भय मुक्त बनाना होगा,अपनी एक सेना तैयार करनी होगी। तभी उस अनजान नकारात्मक शक्ति का सामना ,हम कर सकते हैं।
इधर अवतार ने पुनः जन्म ले लिया था , उधर कॉलेज में भी वेदों का ज्ञान और, मंत्रो उच्चारण हो रहे थे जिससे वातावरण की शुद्धता बनी रहे।
इस बार जब कॉलेज खुले, सभी के मन में एक नई चेतना थी सबके मन में एक नया ,अलग ही उत्साह जागृत हुआ था। पहले से भय कम हो गया था। नए सिरे से सभी लोग ,अपनी जिंदगी की शुरुआत कर रहे थे। कुंभर्क भी जब कॉलेज के नजदीक पहुंचा तो उसे अजीब सी जलन होने लगी और वह कॉलेज के अंदर नहीं जा पाया।
एक आदमी कह रहा था -क्या जमाना आ गया है ? कॉलेज के शिक्षित वर्ग भी ,इन टोने टोटके, तंत्र -मंत्र में विश्वास करते हैं।
आज कुंभर्क , कॉलिज से कुछ दूरी बनाये , कॉलेज के बाहर ही खड़ा था। तभी उसके समीप से गुजरती हुई एक लड़की गई , उसके पास से निकलने मात्र से ही कुंभर्क को तेजी से, बिजली जैसी तरंगे महसूस हुईं । इतना तेज झटका तो ,आज तक उसे कभी नहीं लगा। उसके साथ यह क्या हुआ था ? कुछ समझ नहीं पाया। मेरे समीप से अभी कौन गुजर कर गया ? उसके दोस्त जो अभी तक उसके करीब खड़े थे वह भी कुछ समझ नहीं पाए उन्हें भी इसी तरह का का कुछ एहसास हुआ था। कुंभर्क को पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी ,उसे तो बहुत ज्ञान था ,शैतानी शक्तियों का ,शैतान को नर्क की अग्नि से कैसे बाहर निकालना है ? बाक़ी उसके अघोरी बाबा थे ही जो ,उसके दिमाग़ में घुसकर ,उसे सचेत करते और समझा ते। कुंभर्क अपने कॉलेज के लड़कों को ,शैतान की पूजा करने और अपनी सेना को बढ़ाने के लिए आता था।

