Shrapit kahaniyan [ part 58]

दीपाली को अपने सौंदर्य पर अभिमान तो था ,किंतु कुछ गलत भी नहीं था और सुंदर होने के साथ-साथ वो बुद्धिमान ,होशियार भी थी। उसने कुंभर्क के प्यार के इजहार को इनकार कर दिया और अपनी प्रतियोगिता पर ध्यान केंद्रित करने लगी। उसका उद्देश्य इस प्रतियोगिता में प्रथम आना था ,किंतु पता नहीं , आज  उसके साथ क्या हो रहा है ? पहले राउंड में वह गिरते-गिरते बची ,दूसरे में ,उसके कपड़ों के बटन खुल गए , पता नहीं ,आज कैसे अनहोनी सी हो रही है ? अबकी बार, वह जब रैंप पर आई तो वह तेज -तेज दौड़ने लगी। दौड़ते -दौड़ते एकदम नाचने लगी ,एक पैर पर नाच रही थी जबकि उसने  इतनी ऊंची हील पहनी हुई थी। सभी को आश्चर्य हो रहा था आखिर यह कर क्या रही है ? कोई साधारण लड़की इस तरह से डांस नहीं कर सकती थी। 


आगे की कुर्सी पर बैठा हुआ 'कुंभार्क ' उसे अपनी उंगलियों के इशारे पर चला रहा था। वह बुरी तरह थक चुकी थी, रुकना चाहती थी किंतु रुक नहीं पा रही थी। तभी वह हवा में उछली और जैसे किसी गुड़िया में से हवा निकलती है ,ऐसे ही पहले उसके हाथ लटक गए ,फिर उसकी गर्दन, फिर उसका धड़  और फिर टांगे , वह भरभरा कर ऐसे गिर पड़ी ,जैसे कोई मिट्टी की गुड़िया थी। उसकी हालत देखकर सभी लड़कियां चीख कर भागने लगी। दर्शक भी मंच पर चढ़कर उसे देखना चाहते थे किंतु गार्ड ने रोक दिया। किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ,कि क्या हुआ है ?एक अच्छी खासी लड़की ,अचानक इस तरह क्यों नाचने लगी , और कैसे वो गिर गई ? मंच पर हो बेजान पुतले की तरह पड़ी थी।

वहीँ प्रधानाध्यापक थे ,उन्होंने भी  डॉक्टर को नहीं, किसी पंडित को बुलाया ,वह भी जो तंत्र -मंत्र की विद्या जानता हो , उसने बताया -इस पर' सम्मोहिनी तंत्र 'किया गया है ,सम्मोहन करने वाला , वह जो भी व्यक्ति था ,वह इन दर्शकों के बीच बैठा हुआ था और वह अपने सम्मोहन से इसे नचा रहा था ,जो भी कार्य करने थे वह करवा रहा था। इसका कोई दुश्मन ही हो सकता है। सभी ने अंदाजा लगाया। प्रतियोगिता में जो लड़कियां भाग ले रही थीं ,सभी का ध्यान ,उन लड़कियों पर गया। क्या कोई इनमें से ऐसी लड़की हो सकती है ?जो अपनी दुश्मनी निभाने के लिए ,ऐसा भी कृत्य कर सकती है। किंतु किसी का भी कुछ पता नहीं चल पाया।  इतनी भीड़ में से ,न जाने किसने पुलिस को भी, फोन कर दिया पुलिस भी आ गई। वह यही जानने का प्रयत्न कर रही थी ,कि यह सब इसके साथ क्या हुआ ? प्रधानाध्यापक को जब पता चला कि पुलिस आई है ,तो वह नाराज हुए ,क्योंकि पुलिस कह रही थी -यह पंडित जी ,यहां क्या कर रहे हैं ? पुलिस अपनी छानबीन में लग गई। किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अचानक अच्छी खासी लड़की कैसे किस तरह का व्यवहार करने लगे लगी ? प्रतियोगिता में जो लड़कियां भाग लेने आईं थीं , उनसे भी पूछताछ की गई। सीसीटीवी कैमरे भी , छानबीन का रिश्ता बन गए। 

उधर कुंभर्क  की गुफा में ,बहुत अधिक अग्नि पैदा हो रही थी। वह बर्फीला इलाका ,कुंभर्क  की गुफा के आसपास का सभी हिस्सा गर्म होने लगा था और बर्फ पिघलने लगी थी। वातावरण कुछ बोझिल सा ,लगने लगा था ,हवा भी भारी सी हो गई थी। हवाएं भी गरम  महसूस होने लगी थीं । वातावरण में नकारात्मकता फैल गई थी। इतने  हादसों के पश्चात, कॉलेज भी कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया  था ।

कॉलेज के छात्र ,इधर -उधर, आते -जाते दिखते रहते थे अब वह भी नहीं दिखते , चारों तरफ डरावना सा सन्नाटा छाया था। कोई -कोई  व्यक्ति घर से निकलता ,वह भी डरता डरता। इधर कुंभर्क  के हवन और नरबलि की प्रक्रिया जोरों पर चल रही थी।  उसकी गुफा गहरे पाताल की ओर जा रही थी। एक दिन तो अनर्थ ही हो गया , जब उसके पिता जमींदार साहब ,उससे मिलने आए क्योंकि उसने ही, उन्हें मिलने के लिए बुलाया था।जमींदार साहब , इतना जानते थे -कि यह दिन में कुछ नहीं कर पाएगा ,लेकिन यह नहीं जानते थे ,कि अब उसकी शक्तियां बहुत बढ़ चुकी हैं । जिस राह पर, वह चल पड़ा है ,उस राह  से वापस लौटना शायद , अब उसके लिए मुमकिन नहीं है। उस अघोरी ने एक बार फिर ,उनसे झूठ बोला और कुंभर्क से अपना काम करा रहा है। 

जब वो उस स्थान पर पहुंचे , उस वातावरण में  अजीब सी घुटन थी। आज बहुत दिनों बाद उससे मिलने आ रहे थे ,किंतु कुंभर्क की क्या योजना है ?वो यह नहीं जानते थे। उसके लिए माता-पिता क्या और बाहरी इंसान क्या ?सब समान हैं । आज तो कुंभार्क ने तो अति ही कर दी अपने पिता को अपने स्वार्थ के लिए बुलाया, आज उसे कोई भी नर बलि के लिए नहीं मिला था , उसे नरबलि देनी थी ,इसलिए उसने उन्हें ,अपने पास बुलाया था। वह नहीं जानते थे, कि वह अपने बेटे के गुफा में नहीं बल्कि अपनी मौत से मिलने जा रहे हैं।'' जो होनी थी ,वह टल नहीं सकती '',जब वो उसकी गुफा में गए ,तब वो सारी तैयारी किये बैठा था। पहले तो वो उसके स्थान को देखकर घबरा गए उसके व्यवहार से उसके मंसूबे भी ,अच्छे नहीं लग रहे थे। तब वो बोले -मैं फिर आऊंगा किन्तु कुंभर्क ने अपनी शक्ति से ,उन्हें उसी स्थान पर जकड़ दिया। वो सुन और समझ सकते थे किन्तु कर कुछ नहीं सकते थे।  शैतान ने आज ,अपनी मां को ही विधवा बना दिया।कुंभर्क ने आज अपने पिता की नरबलि दे डाली। 


 उधर बंद कॉलेज में पंडितों द्वारा साधुओं  द्वारा तंत्र- मंत्र के तोड़, किए जा रहे थे ,किंतु अभी तक यह नहीं पता चल पाया था कि यह सब किसने किया ,क्यों किया, उसके पीछे कौन है ? कुंभर्क की गुफा के आसपास का वातावरण काफी नकारात्मक हो गया था ,हवाओं में वह मदहोशी नहीं रही थी साए साए करती हवा डरा रही थी। भूला -भटका पंछी भी उधर नहीं जा रहा था। 

एक  सप्ताह की छुट्टी के बाद कॉलेज खुले , सभी छात्रों के मन में एक भय सा समाया हुआ था। कोई किसी से बातचीत नहीं कर रहा था ,सब पढ़ाई पर ध्यान दे रहे थे और चुपचाप अपने घर चले जाते। माहौल काफी गमगीन हो गया था। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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