Dhyaan

सो बातों की एक बात -''भटके हुये मन को ,आत्म केंद्रित करना ,उसे स्थिर करना ही' 'ध्यान ''है।'' 

''बाहरी दुनिया  से अपने को मोड़कर ,उससे विरक्त होकर अपने को पहचानना  ही ''ध्यान ''है।''

 

ध्यानमग्न हो जा ,तू ! मस्त मलंग हो जा, तू !

प्रेम में उसके खो जा तू ! बैरागी हो जा ,तू !



ध्यान उसका ही रहे , दुनिया से बेपरवाह हो जा तू !

दिल में बसा ,मूरत उसकी ,भक्ति में ऐसी ,खो जा तू !

न तू ,तू रहे ,न वो ,वो रहे ,ऐसा एकाकार हो ,जा तू !

ध्यान जिसका करे ,मूरत उसकी  सामने दिखे ,

विरह बैरागी हो ,ऐसी सुध -बुध में खो जा तू !

तुझमें ''मैं ''न रहे ,''मैं ''में तू ही तू रहे ,

महसूस कर, उसके विरह की पीड़ा ,

प्रेम अश्रुओं में ,बह जा, तू !

उसकी लग्न में खो जा तू !

ऐसे स्वप्नों में खो जा तू !

ध्यानमग्न हो जा ,तू !


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post