Shrapit kahaniyan [part 57]

सभी छात्रों ने प्रधानाध्यापक के कक्ष के सामने, भीड़ लगा दी , वह जानना चाहते थे -यह किसकी लापरवाही है ?जो हमारे कॉलेज में इतनी मौतें हो रही हैं। प्रधानाध्यापक ने सहजता से सभी छात्रों से कहा-इसका कारण हम भी नहीं जानते ,ऐसा क्यों हो रहा है ? कृपया ,आप लोग !शांति बनाए रखें और शांति के साथ हमारा साथ दें। हमारे बहुत ही होनहार बच्चों की मौतें हुई हैं ,उनका हम ,पता लगाने की कोशिश करेंगे कि इसका क्या कारण है?

 प्रधानाध्यापक ने , सभी अध्यापकों की एक सभा बुलाई -मैं सभी अध्यापकों का अभिनंदन करता हूं, आज तक हमारे कॉलेज में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ किंतु इस तरह के अचानक हादसे किस वजह से हो रहे हैं ? इसका पता लगाने का ,प्रयास करें ! एक लड़का गायब है और दो की मौत हो चुकी है ,आगे ऐसे हादसे ना हों  इसीलिए आप हमारा सहयोग करें, और यह समझने का प्रयास करें ,कि यह किस कारण से हो रहा है ? 'दीपक की मौत 'एक हादसा हो सकती है किंतु कृतिका की मौत एक हादसा नहीं है। उसके हालात कुछ अलग ही थे। 


मुझे  यहां पर किसी दूसरी शक्ति के होने का आभास हो रहा है, एक अध्यापक ने खड़े होकर प्रधानाध्यापक से कहा।

यह आप क्या कह रहे हैं ?पढ़े लिखे हो कर भी ,ऐसी बातों पर विश्वास करते हैं ,ऐसा आप कह भी केेसे सकते हैं  ,कोई भी सुनेगा तो क्या कहेगा ,कि एक प्रसिद्ध कॉलिज के अध्यापक होकर इस तरह की बातें आपो शोभा नहीं देतीं ,जब आप ही ऐसी बातें करेंगे तो, बच्चों पर इसका क्या असर होगा ?

जी  सर! जिस तरह से वह लड़की भाग कर बाहर आई और चिल्ला रही थी कि मैंने शैतान को देखा और फिर से अचानक से उसका गला गुब्बारे की तरह फूल  गया, इससे तो यही लगता है -यह कोई बाहरी शैतानी ताकत हो सकती है। 

मेरे जानने वाले एक बहुत पहुंचे हुए , साधु हैं , मैं उनसे बात कर सकता हूं।  एक अन्य अध्यापक  ने बतलाया। वे इसी तरह की तंत्र -मंत्र क्रियाओं का तोड़ जानते हैं। 

आप लोग कुछ भी कीजिए किंतु हमारे विद्यार्थियों को अब आगे कुछ नहीं होना चाहिए ,ये हमारे कॉलिज की प्रतिष्ठा का प्रश्न है। प्रधानाध्यापक ने  यह जिम्मेदारी अन्य अध्यापकों पर  सौंप कर ,अपना पल्ला झाड़ लिया। 

अगले दिन कॉलेज की छुट्टी थी किंतु जिस अध्यापक ने ,प्रधानाध्यापक को सांत्वना दिया था, वह एक साधु को लेकर उस कॉलेज में आते हैं। उन साधु ने उस स्कूल का मुआयना किया , कहने लगे -कोई बाहरी शक्ति तो है किंतु इस समय नहीं है। किंतु मुझे और भी शैतानी शक्तियों का आभास  हो रहा है। यह कह कर वे  उस  कॉलेज में घूमने लगे।उन  साधु बाबा ने ,अपने हाथ में नीबू  लिये  हुए  थे । उस कॉलेज का भ्रमण करते हुए , एक सीढ़ियों के पास जाकर, अचानक वह नीबू उनकी हथेली पर तेज- तेज घूमने लगा। यह देखकर अध्यापक भी आश्चर्यचकित रह गए और बोले -महाराज !यह क्या हो रहा है ?

मुझे लगता है ,यहां कुछ शैतानी ताकतें हैं जो अपना प्रभाव दिखा रही हैं , कहते हुए -वह सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे , जैसे जैसे वह नीचे जा रहे थे ,वैसे -वैसे ही , वो नीबू भी काला पड़ता जा रहा था। सीढ़ियों से नीचे जाकर उन्होंने देखा कि वहां पर तंत्र मंत्र की कुछ क्रियाएं क्रियाविधि की हुई हैं। उन्होंने पूछा -यह सब कौन कर रहा है ?

अध्यापक ने इस विषय में अपनी अनभिज्ञता जाहिर की , यह सब मैंने पहली बार देखा है ,मैं नहीं जानता कि यहां कौन आता है, कौन जाता है ? उन अध्यापक को भी बहुत आश्चर्य हो रहा था। अब यह तो तय हो चुका था कि यहां पर अवश्य ही कुछ विज्ञान का गलत उपयोग हो रहा है। जैसे काली शक्तियों को जागृत करना, तंत्र मंत्र से अपनी सिद्धियां बढ़ाना इत्यादि कार्य। 

अगले दिन कॉलेज में, अध्यापक ने  प्रधानाध्यापक को वह सभी चीजें दिखलाई। 

 प्रधानाध्यापक उन चीजों को देखकर कहने लगे -यह हमारे कॉलेज में क्या चल रहा है ? यह सब कौन कर रहा है ? क्या कोई बाहरी व्यक्ति हमारे कॉलेज में आता है ,पता लगाइए !वह नहीं जानते थे , कि हमारे कॉलेज के ही विद्यार्थी भी ऐसा कुछ कर सकते हैं। ये सभी बातचीत आपस में अध्यापकों के बीच में चल रही थी। किसी को भी इसकी कोई जानकारी नहीं थी पूर्णतः गोपनीय तरीके से पता लगाने का प्रयास  किया जा रहा था कि इन सब में कौन शामिल है ? एक चपरासी को इसके लिए नियुक्त कर दिया गया कि वह पता लगाएं ,कि यह सब यहां कौन कर रहा है ? इससे पहले कि वह चपरासी पता लगा पाता  कि यह सब कौन कर रहा है ? उसकी मौत हो गई। अब तो अध्यापकों के बीच भी भय का वातावरण पैदा हो गया। उन बाबा को फिर से बुलाया गया , उन्होंने कहा - यह कोई बड़ी शक्ति है। 

कॉलेज में खेल चल रहे थे , यह वह विद्यार्थी थे ,जो राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे थे। अभ्यास कार्य चल रहा था, अबकी बार कॉलेज के कुछ विशेष छात्रों  के समूह ने, उन खेलों में भाग लिया। जब वह बाहर खेलने गए , तो जीते जा रहे थे। कॉलेज के अध्यापकों को भी ताज्जुब  हो रहा था ,यह सब क्या हो रहा है ?उन  छात्रों में कुछ विशिष्ट था , अद्भुत शक्ति का आभास हो रहा था। उन लड़कों में, अलग ही ऊर्जा भरी थी। इसके कारण उन्होंने उस कॉलेज का नाम रोशन किया। ये छात्रों का , वो समूह था ,जिस पर आज तक किसी का ध्यान गया ही नहीं। 

दीपाली जो उस कॉलेज की ,सबसे खूबसूरत लड़की थी, उसने सौंदर्य प्रतियोगिता में भी भाग लिया। कुंभर्क को भी वह बहुत पसंद थी , वह चाहता था- कि दीपाली उसे विशेष रूप से ,अपनाये यानि उससे प्यार करे किन्तु दीपाली को कुंभर्क में कोई दिलचस्पी नहीं थी।  एक  दिन कुंभर्क  ने उससे कह  भी दिया - मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूँ   किंतु दीपाली को भी अपने सौंदर्य पर अहंकार था ,उसे कुंभर्क जवान ,स्मार्ट होने के बावजूद भी पसंद नहीं था। कुंभर्क चाहता था ,दीपाली भी अन्य लड़कियों की तरह ,उसके आगे -पीछे घूमें किन्तु दीपाली ने ,हिकारत की नजर से देखा और बोली -तुम मेरे ''प्रिंस चार्मिंग ''नहीं। 



कुंभर्क को अपना अपमान लगा ,उस समय तो उसने कुछ नहीं कहा ,चुपचाप अपनी गुफा में आ गया। जो सही में कुंभर्क को जान गए थे ,कि ये क्या चीज है ?वो प्रतीक्षा में थे -कि अब दीपाली के साथ क्या होने वाला है ? किन्तु दीपाली सही -सलामत थी और अपनी प्रतियोगिता की तैयारी में जुटी थी। आज उसका कार्यक्रम था। सभी को उम्मीद थी कि वो ही जीतेगी। जब मंच पर आई ,बेहद खूबसूरत लग रही थी। दीपाली जब ''रैम्प वॉक '' कर रही थी ,अचानक उसे लगा जैसे ,पीछे से किसी ने धक्का दिया ,वो गिरते -गिरते बची। अपनी प्रतियोगिता के प्रति वो पहले से ही ,बहुत सचेत थी ,अब इस तरह गिरने और सम्भलने पर भी उसने धैर्य से कार्य लिया। पता नहीं ,आज किसकी उसे  ''काली नजर ''लगी थी। उसकी ड्रेस का बटन टूट गया ,किसी तरह उस परिस्थिति को संभाला। अगले राउंड में ,वो जैसे दौड़ने लगी ,कोई समझ नहीं पाया ,ये क्या कर रही है ?या इसे क्या हो रहा है ? वो स्वयं भी नहीं समझ पा रही थी ,वो ऐसा क्यों कर रही है ?


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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