Haunted [part 26]

पता नहीं, कैसी विचित्र दुनिया है ? आधी दुनिया तो किताबों  में बसी है। रोहित ,तन्मय, निम्मी,  टॉम आदि सभी दोस्त, एक साथ ''भूतों के इतिहास की दुनिया'' में सैर करने के लिए निकल जाते हैं। उस किताब का रक्षक '' नीलमणि '', उन्हें भूतों के इतिहास में भेज देता है। तब वह किताब उन्हें बताती है - कि भूतों की दुनिया बहुत पुरानी है , लगभग जबसे इंसानों का अस्तित्व आया और उनकी मौत आरंभ हुई तब से ही, भूतों की दुनिया का भी, लगभग आरंभ हो गया था। कोई कहता है -कोई अंग्रेज था, जो सबसे पहले भूत बना ,कोई कहता है -एक' बौना 'पहले भूत बना। ठंडी और गहरी स्वांस लेते हुए, ख़ैर ! ये सब भ्रांतियां    हैं , किंतु यहां पर बहुत से साहसी भूत भी आए , जो अपने देश की रक्षा के लिए, अपनी जान निछावर कर गए , मरने के पश्चात भी ,उनमें  वही जज्बा था। गुलामी  की बेड़ियों को वो तोड़ देना चाहते थे। ऐसे भी भूत थे ,जो बहुत बड़े राजा महाराजा, धनाढ्य परिवार से थे, किंतु उनकी इच्छाएं उनकी जिज्ञासा  इतनी बड़ी थी कि उन्हें भूत बनकर भी आराम नहीं था। बहुत से लोग, अपने जीवन से कुछ सीखते हैं, कुछ इंसानी रूप में ही सीख जाते हैं किंतु कुछ ऐसे लालची, अधर्मी ,अत्याचारी होते हैं जो भूत  बनकर भी नहीं समझ  पाते , उनका मन अपने ''राज महलों ''में भटका रहता है, जिसके कारण वह अपने राजमहल में ही भूत बनकर भटकने लगते हैं और जो इंसान वहां रह रहे होते हैं ,उनका जीना भी दूभर कर देते हैं। 


समझदारी तो इसी में ही है, इंसान को भूत  बनने से पहले ही, कुछ सीख लेना चाहिए किन्तु इंसान इस 'भूलोक 'की माया को जीते जी समझ नहीं पाता और इस माया की भूल -भुलैया में ही खोकर ,रह जाता है। 

ये 'माया ' कौन है ?निम्मी ने प्रश्न किया। 

'माया' ,धन को कहते हैं , इंसान जिसे पाने की चाहत में, सम्पूर्ण ज़िंदगी लगा देता है ,उस धन को वो ,अपने भविष्य के लिए एकत्र करता रहता है ,उस भविष्य के लिए ,जिसका उसे तनिक भी भान नहीं ,कि आगे क्या होने वाला है ? उस धन के लालच में, कभी-कभी वह चोरी भी करता है , कभी खून खराबा भी कर देता है, उसके रिश्ते भी अपने नहीं रह जाते हैं। माना कि, 'धन इंसान की जरूरत है ,उसके बिना क्या खाएगा ? क्या पहनेगा ?कहां रहेगा? यह सब भी संभव नहीं है , किंतु वह जरूरत के हिसाब से नहीं वरन उसे अधिक से अधिक इकट्ठा कर लेना चाहता है, वह सोचता है ,शायद इसे  इकट्ठा  करके वह अपने साथ ले जाएगा , यही भ्रम ही  तो'' माया ''है। प्रकृति भी एक माया ही है , इंसान जब पैदा होता है तो, प्रकृति उसे रिश्तो से जोड़ती है लोगों से मिलाती है उनके अंदर मोह पैदा करती है , प्रेम, विश्वास जगाती है , रिश्तों  की उलझन में इंसान उलझ कर रह जाता है। यह प्रकृति द्वारा फैलाया गया, इंसान के लिए ''मायाजाल'' है , उस मायाजाल में ही फंस कर, इंसान संपूर्ण जिंदगी वहीं बिताना चाहता है किंतु वहां से आना नहीं चाहता , यही 'मोह' है , इस 'मोह ' के कारण ही, मरने के पश्चात भी, उसकी आत्मा तड़पती रहती है, परेशान रहती है, वो अपने लोगों को छोड़ना नहीं चाहता, जिस कारण वह इस' भूत लोक 'में आकर भी परेशान ही रहता है। 

रिश्तों को समझने में ,सम्पूर्ण जीवन चला जाता है किन्तु रिश्तों  के जाल को सुलझा नहीं पाता , इसी  ''भूल -भुलैया ''में उलझ कर उन्हीं  रिश्तो के जाल को सुलझाता रहता है। उसकी इच्छाएं उसे इतना परेशान करती हैं , कि उसका चेहरा शक्ल -सूरत भी बदल जाती है। उसका विचलित मन उसे शांत नहीं रहने देता , जिस धन को उसने अपने ही लोगों से छुपाया होता है ,उस धन की निगरानी के लिए ही वो 'भूलोक'  पर जाकर ,' सर्प योनि' को भी प्राप्त कर लेता है या फिर कोई पिशाच बनकर , उसकी निगरानी करता रहता है, जब तक उसका कोई सही वारिस ना मिल जाए। 

बाप रे ! यह'' इंसानी योनि'' कितनी मुश्किल है ? इंसान बनकर जीना भी कितना कठिन है ? सूरज बोला। 

हां, फिर भी लोग, इस योनि में ही ,खुश रहना पसंद करते हैं और हम भूतों से डरते हैं , डरना भी जरूरी है, क्योंकि जो इंसान, इंसानी रूप में भी संतुष्ट न रह सका तब वो ' भूत योनि' में कैसे संतुष्ट रह सकता है? कैसे किसी को खुश देख सकता है ? इसीलिए कुछ भूत ऐसे भी होते हैं जो दूसरों को कष्ट पहुंचाने में ही अपनी खुशी महसूस करते हैं। उनकी योनि बदल जाती है किंतु उनकी इच्छाएं नहीं बदलती। सभी भूत एक जैसे नहीं होते , कुछ मजबूरीवश आ भी जाते हैं ,तो कुछ दिन यहाँ रह कर ,दूसरी योनि में चले जाते हैं। किंतु जिनकी इच्छाएं अनंत है असीमित है , वह वर्षों तक, इसी योनि में भटकते रहते हैं, इस योनि में भी कभी भूत ,कभी पिशाच ,कभी प्रेत बनते हैं। उन्हें इस बात का दुख नहीं होता वो उसी में खुश रहते हैं। इस योनि में रहकर भी , अपने इंसानी दोस्तों को ,मित्रों को भी तंग करते रहते हैं उन्हें भी चैन से नहीं रहने देते। क्योंकि इंसानी रूप में वह सम्भल  नहीं पाते, तब भूत योनि में क्या संभलेंगे ? 

जो 'देशभक्त भूत ''थे , वो तो  अपना देश आजाद होते ही, दूसरे लोक  में चले गए। एक किस्सा  तुम्हें सुनाती हूं ,वह किताब कहती है -जब कुछ देशभक्त यहां पर आए थे  जिनकी असमय ही मौत हो गई थी। तब यहां कुछ  अंग्रेज भी आए थे। उन्हें देखकर , आजादी के दीवाने भूतों ने इस लोक में भी ,आजादी का झंडा लहरा दिया ,कहते हुए पुस्तक मुस्कुरा दी। 

अच्छा ! तब आगे क्या हुआ ? रोहित ने प्रश्न किया। 

होना क्या था जो 'भूत लोक ' के राजा थे, उन्होंने कहा -ना ही यहां कोई गुलाम है ,ना ही कोई राजा, सब समान हैं। जिसका जी चाहे ,जहां चाहे जा सकता है, रह सकता है, किसी पर कोई नियंत्रण नहीं है ,ना ही , यहां कोई गुलाम है , ना ही कोई यहां बादशाह ! सब अपना -अपना जीवन जीते हैं , तब जाकर यहां शांति स्थापित हुई।

सही निर्णय लिया ,उन्होंने !तब तो यहां कोई किसी को तंग ही नहीं करता होगा ,सब सुखचैन अमन से रहते होंगे अफरोज बोला। 

न....... न....... यहाँ  शैतान इंसान ही तो भूत बनकर आते हैं ,यहां अमन -चैन कैसे रह सकता है? यहां जो सबसे बड़ा भूत होता है या जो ताकतवर होता है वो अपने से छोटों को, खा भी जाता है। 

इतना सुनकर सभी बच्चे डर गए , क्या ऐसा भी होता है ?

यह बात तो हर जगह होती है ,ताकतवर इंसान छोटे इंसान को दबाता है ,इसी तरह ताकतवर भूत भी ' छोटे 'और' कमजोर 'भूत को डरा कर रखता है। अगर वह इंसानी रूप में ही अच्छे होते तब भूत ही क्यों बनते ?



मैंने तो सुना है ,कि इन भूतों के पास बड़े-बड़े खजानों के रहस्य छुपे होते हैं , कौन सा धन कहां गढा है ?इन्हें सब पता होता है टॉम ने  प्रश्न किया। 

सही सुना है, कुछ भूत तो अपने ही धन की ,अपने ही खजाने की रखवाली करते रहते हैं , और कुछ भूत दूसरों के खजाने पर भी नजर डालते हैं क्योंकि इन्हें कोई रोक-टोक तो है नहीं, यह जमीन से ,पाताल में आकाश में, कहीं भी घुस जाते हैं ,चले जाते हैं किंतु उस धन का इन्हें  कोई लाभ नहीं होता। क्योंकि वह धन इस 'भूत लोक'  में तो चलता ही नहीं, तब कुछ भूतों को अक्ल आ जाती है और अपने उस छुपाए धन से जरूरतमंद इंसानों की मदद भी कर देते हैं , किंतु'' लालच बुरी बला है'' इसलिए यह सोचकर वह लालची लोगों की कभी सहायता नहीं करते। इस पर भी एक कहानी है , एक जमींदार जो बहुत अमीर था उसके पास बहुत सारा धन गड़ा हुआ था किंतु वह जब मर गया तो वह धन उसके किसी काम का भी नहीं था इसी चिंता में वह एक पेड़ पर बैठा रहता था। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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